दूसरों की उम्मीदों पर ख़ुद को न परखें—अभिषेक

  • 31 मई 2011
इमेज कॉपीरइट PR Agency

पिछले एक साल में भले ही अभिषेक बच्चन की सभी फ़िल्में, रावण, खेले हम जी जान से, गेम और दम मारो दम, बॉक्स ऑफ़िस पर पिट गई हों, लेकिन इससे उनके हौसले और आत्मविश्वास में कमी नहीं आई है.

शायद इसकी एक वजह है वो मूलमंत्र जो उन्हें उनकी फ़िल्म खेलें हम जी जान से के निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने दिया.

अभिषेक ने बताया, “मैं और आशुतोष गोवारिकर फ़िल्म खेलें हम जी जान से के प्रीमियर के लिए कोलकाता में थे. फ़िल्म के बारे में दो-तीन रिव्यूज़ आ चुके थे और वो बहुत अच्छे नहीं थे जिससे मैं निराश था. आशुतोष ने उस समय जो मुझसे कहा वो मैं ज़िदंगी में कभी नहीं भूलूंगा. उन्होंने कहा कि ज़िंदगी में कभी भी दूसरों की उम्मीदों पर ख़ुद को ना परखें. अपने ख़ुद के लक्ष्य और उम्मीदें को अगर आप पूरा कर सकें, ज़्यादा ज़रूरी ये है.”

ये बात अभिषेक ने हाल ही में मुम्बई में एक पत्रकार सम्मेलन के दौरान बताई. मौका था उन्हें ग़ैर सरकारी संस्था ‘युवक बिरादरी (भारत)’ का अध्यक्ष बनाए जाने का.

अध्यक्ष की ऐक्टिंग

अभिषेक भले ही अध्यक्ष चुने गए हैं लेकिन वो कहते हैं कि असल में तो वो ऐक्टर हैं. थोड़े हल्के-फुल्के अंदाज़ में अभिषेक ने बताया, “जब युवक बिरादरी के संस्थापक क्रांति शाह मेरे पास ये प्रस्ताव लेकर आए तो मैंने उनसे कहा कि मैं एक ऐक्टर हूं और ऐक्टिंग करता हूं इसलिए अध्यक्ष की ऐक्टिंग कर सकता हूं. इस पर क्रांति शाह ने मुझसे कहा कि मैं आपको ऐसी टीम के साथ जोड़ दूंगा कि आपको अध्यक्ष की ऐक्टिंग ही करनी होगी, बाकी सब वो संभाल लेंगे.”

अध्यक्ष बनने की बात भले ही अभिषेक ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कही हो लेकिन वो अपने इस नए ‘रोल’ के प्रति काफ़ी संजीदा हैं.

ये पूछे जाने पर कि बतौर अध्यक्ष उनकी क्या योजनाए हैं, अभिषेक ने कहा, “मैं शिक्षा में विश्वास करता हूं. मैं मानता हूं कि सब कुछ शिक्षा से शुरु होता है और अगर हम अपनी युवा पीढ़ी को शिक्षित कर पाएं तो सभी समस्याओं से बेहतर तरीके से निपट सकते हैं.”

अभिनेता रितेश देशमुख युवक बिरादरी के एक उपाध्यक्ष चुने गए और फ़िल्ममेकर आशुतोष गोवारिकर ट्रस्टीज़ में शामिल हैं.

संबंधित समाचार