फ़िल्म का संगीत भेजा फ़्राई करता है

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चार साल पहले आई फ़िल्म ‘भेजा फ़्राई’ की सफ़लता से उत्साहित निर्देशक सागर बेल्लारी फिर से अभिनेता विनय पाठक के साथ हाज़िर हैं ‘भेजा फ़्राई-2’ के साथ.

‘भेजा फ़्राई’ में विनय का किरदार भारतभूषण संगीतप्रेमी था लेकिन कथानक में संगीत के केन्द्रबिन्दु में होने के बावजूद वो एक गीत-विहीन फ़िल्म थी. वहीं फ़िल्म के सीक्वेल में एक रीमिक्स ट्रैक के अलावा पांच मुख्य गीत हैं. एलबम में मुख्य संगीतकार हैं इश्क बेक्टर और साथ में स्नेहा खानविलकर और सागर देसाई के नाम एक-एक गीत की संगीत रचना है.

एलबम की पहली प्रस्तुति है इश्क बेक्टर द्वारा रचित, 'इश्क दा कीड़ा मुझे काट गया' जिसे स्वर दिये हैं श्री डी और इश्क बेक्टर ने. ‘भेजा फ़्राई-2’ के कथानक मे शायद लव एंगल का नया पेच है जिसकी तरफ़ ये गीत इशारा करता है. गीत में एक मज़ेदार सा वातावरण रचने की कोशिश है, जो बहुत असरदार नहीं है. श्री डी और सोनी के बोल हास्य प्रधान हैं और गायकी में भी अजीब स्वरों के साथ जो माहौल रचा गया है वो कृत्रिम सा लगता है. एक-दो बार सुनने में मज़ेदार लगता है ये गीत, मगर उसके बाद बोर करता है.

एलबम की अगली प्रस्तुति 'वी गो क्रेज़ी जो हिलाए तू कमर.. हो जाए भेजा फ़्राय' थोड़ी बेहतर है. इश्क बेक्टर अपने खास अंदाज़ में डांस फ़्लोर्स के लिये एक लोक गीत की मस्ती लिये मज़ेदार सा माहौल बनाने में कुछ हद तक सफल हुए हैं. स्वर श्री डी के हैं और साथ दिया है अपेक्षा डांडेकर ने. गीत में फिर से हास्य के स्वर हावी हैं और लोकप्रियता के पैमाने पर ये गीत बाकी गीतों से बेहतर संभावनाएं रखता है.

'बंजारे' रेखा राव के स्वरों मे अगली पेशकश है. सागर देसाई ने इसका संगीत रचा है. शुरुआत मे बीन के साथ बंजारों के कालबेलिया संगीत की एक अच्छी रचना होने की संभावनाएं जगाता है मगर आगे निराशा हाथ लगती है. रेखा राव अपनी गायकी से बहुत कुछ सुनिधि चौहान की याद दिलाती हैं. टेक्नो ध्वनियों का ज़रूरत से ज़्यादा प्रयोग बंजारे की प्रभावहीन प्रस्तुति का सबसे बड़ा कारण है. एक गीत जिसमें नवीनता और प्रयोगों की बहुत संभावनएं थीं, अन्त में साधारण सी प्रस्तुति के साथ खत्म होता है.

एलबम में एक गाना विनय पाठक की आवाज़ में भी है 'ओ राही' जिसका संगीत स्नेहा खानविल्कर ने दिया है. गायक के रूप में विनय पाठक लोअर नोट्स पर ठीक हैं लेकिन हाई नोट्स पर बहुत ‘इरिटेटिंग’ हैं. अगर उनका उद्देश्य फ़िल्म में परेशान करना हो तो ज़रूर वो सफल हुए हैं, लेकिन अगर ये उनकी ये गम्भीर कोशिश है तो वे वाकई में भारत भूषण साबित हुए हैं. स्नेहा खानविल्कर पिछले कुछ अर्से में एक प्रतिभाशाली संगीतकार के रूप में उभरी हैं मगर यहां उम्मीद पर खरा नहीं उतरतीं. शकील आज़मी के बोल भी कमज़ोर हैं और गीत का असर कम करते हैं.

Image caption मिनिषा लांबा भेजा फ़्राई 2 में नज़र आएंगी.

'बुरा ना मानो जी' एलबम की अन्तिम प्रस्तुति है जिसमें गायकी मे श्री डी का साथ दिया है डॉली पीटर्स ने. श्री डी अपनी गायकी में विनय पाठक की नकल करते हैं और कुछ हद तक सफल भी हुए हैं. विनय पाठक का किरदार क्योंकि पुराने गीतों का शौकीन है इसलिये यहां पुराने गीतों के बोल लेकर नया गीत रचने की कोशिश की गई है. एक टाइम पास सा गीत है.

फ़िल्म के गीत विनय पाठक के किरदार के आस पास ही रचे गये हैं बेसुरापन उस कैरेक्टर की ज़िन्दगी का हिस्सा है, इसलिये गीतों मे भी नज़र आता है. ये बेसुरापन फ़िल्म की कॉमिक सिचुएशन मे हंसाने की गुंजाइश भले ही रखता हो लेकिन एलबम के तौर पर कहीं-न-कहीं संगीत का मज़ा ख़राब करता है. पर्दे पर विनय पाठक अपने बेसुरेपन से किरदारों का कितना ही भेजा फ़्राय करें, मगर संगीत एलबम के तौर पर सुननेवालों को चिढ़ाने की ज़रूरत समझ नहीं आती. हाँ, अगर आप संगीत से अपना भेजा फ़्राय करना चाहते हैं तो ये एलबम आपकी काफ़ी मदद करेगा!

रेटिंग : 2/5 (पाँच मे से दो)

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