दिन में मौज-मस्ती ज़्यादा बेहतर-फ़रहान अख़्तर

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गर्मी के इस मौसम में भले ही ज़्यादातर लोग मौज-मस्ती के लिए दिन में बाहर निकलने में कतराएं, लेकिन फ़िल्ममेकर-ऐक्टर-सिंगर फ़रहान अख़्तर मानते हैं कि दिन में मौज-मस्ती करना ज़्यादा बेहतर है.

फ़रहान कहते हैं, “मैं मानता हूं कि रात की जगह दिन में मौज-मस्ती करना ज़्यादा बेहतर है. अगर आप देर रात बाहर रहते हैं तो कई बार लोग उसके कुछ और मायने निकालने लगते हैं. लेकिन अगर आप देर शाम तक बाहर रहते हैं तो कोई शिकायत नहीं करता कि इतनी शाम तक बाहर क्यों थे.”

फ़रहान ने ये बात हाल ही में मुम्बई में एक कार्यक्रम ‘फ़न इन द सन’ के दौरान कही.

इस कार्यक्रम में उन्होंने स्टेज पर गाने भी गाए. ये पूछे जाने पर कि वो प्लेबैक करना ज़्यादा पसंद करते हैं या फिर लाइव परफ़ॉर्मेंस, फ़रहान का जवाब था,”प्लेबैक करना और स्टेज पर परफ़ार्म करना, दोनों की अलग बाते हैं. मगर जो भी स्टेज पर हो रहा है वो इस वजह से हो रहा है क्योंकि जो गाने मैंने फ़िल्मों में गाए हैं वो हिट हुए. स्टेज पर परफॉ़र्म करने समय आप दर्शकों के साथ ‘इंटरऐक्ट’ करते हैं जबकि फ़िल्म में आप सिर्फ़ कैमरा को देखकर ऐक्टिंग कर रहे होते हैं.”

प्रमोशन के लिए करोड़ों ज़रूरी नहीं

बतौर अभिनेता, फ़रहान की फ़िल्म ‘ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा’ अगले महीने रिलीज़ होने वाली है. फ़िल्म में उनके अलावा हृतिक रोशन, अभय देओल, कैटरीना कैफ़ और कल्कि कोचलिन भी मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे.

फ़रहान इस फ़िल्म के निर्माता भी हैं. वो कहते हैं कि फ़िल्म का प्रचार काफ़ी बड़े पैमाने पर होगा. लेकिन फ़रहान ये भी मानते हैं कि हर फ़िल्म के प्रमोशन के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की ज़रूरत नहीं होती.

उन्होंने कहा, “कई फ़िल्मों के प्रचार के लिए बड़ा बजट नहीं होता फिर भी वो चलती हैं. लेकिन वो फ़िल्म और उसके बजट पर निर्भर करता है. अगर फ़िल्म छोटे बजट की है तो आप उसके प्रमोशन पर एक हद तक पैसा खर्च कर सकते हैं क्योंकि आपको उससे बड़े बजट की फ़िल्म जितना पैसा नहीं कमाना होता. बड़े बजट की फ़िल्म से बॉक्स ऑफ़िस पर अलग तरह की उम्मीदें होती हैं. हर फ़िल्म के लिए अलग तरह के प्रमोशन की ज़रूरत होती है. हर फ़िल्म के प्रमोशन के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की ज़रूरत नहीं होती.”

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