मनोरंजक संगीत है 'चिल्लर पार्टी' का

  • 29 जून 2011
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Image caption फ़िल्म चिल्लर पार्टी बच्चों की फ़िल्म है.

आने वाली फ़िल्म ‘चिल्लर पार्टी’ के केंद्र में बच्चों की फ़ौज में है. हालांकि बाल फ़िल्में भारतीय सिनेमा में अमूमन मुख्य धारा में उपेक्षित की जाती रहीं हैं. मगर ‘चिल्लर पार्टी’ को एक मुख्य धारा की फ़िल्म की तरह प्रचारित किया जा रहा है.

फ़िल्म को यूटीवी और सलमान ख़ान ने प्रोड्यूस किया है.

फ़िल्म का संगीत भी बाल फ़िल्मों के टैम्प्लेट से हट कर है. फ़िल्म में संगीत दिया है अमित त्रिवेदी ने और गीत लिखे हैं नीलेश तिवारी, अमित त्रिवेदी और अमिताभ भट्टाचार्य ने.

साउंडट्रैक में कुल आठ गीत हैं जिसमे बच्चों के हुड़दंग के साथ सपनों की उड़ान भी है, फ़ोक की मस्ती भरे कुछ टपोरीनुमा गीत और दुनिया से पंगा लेने के जज़्बे के साथ कुछ रॉक के ग़ुस्सैल तेवर भी.

एलबम की शुरुआत होती है मस्ती भरे, टपोरीनुमा गीत ’टाँय-टाँय-फ़िस्स’ से, जिसे अमित त्रिवेदी ने महाराष्ट्रीय लोक संगीत का जामा पहनाया है और एक थिरकने वाली धुन दी है. अमित त्रिवेदी ने इसे मस्ती भरे अंदाज़ में इसे गाया भी है और उनका साथ दिया है जयश्री त्रिवेदी ने. नीलेश तिवारी के बोल सड़कछाप भाषा लिए हुए हैं. मगर जिस वजह से ये गीत लोकप्रिय होने की सबसे ज्यादा गुंजाइश रखता है वो है ’आइटम बॉय’ रणबीर कपूर का प्रोमो वीडियो जो इन दिनो टीवी चैनल्स पर काफ़ी दिख रहा रहा है. गीत ने प्रचार में फ़िल्म के लिये एक प्लेटफ़ार्म बनाने का काम बखूबी निभाया है.

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Image caption रणबीर कपूर पर फ़िल्माया गया गाना टांय-टांय फ़िस्स काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है.

अगला गीत ’आ रेला है अपुन’, टाँय-टाँय-फ़िस्स का ही विस्तार लगता है... वही भाषा है, वही अंदाज़ और वही जोश मगर मज़ा उतना नहीं है. अमित त्रिवेदी का साथ दिया है अमिताभ भट्टाचार्य, अरमान, तन्मय और अरविंद ने. फ़िल्म रेडी के ’ढिंका चिका’ के सुपर हिट होने के बाद शायद आने वाले दिनों में कई सड़कछाप गीत सुनने को मिलें, जिसकी ये दोनों गीत एक कड़ी मालूम होते हैं.

एलबम की सबसे बेहतरीन प्रस्तुति है ’एक ही थाली के चट्टे बट्टे’ जिसे मोहित चौहान ने गाया है और साथ में बाल गायक अरमान, गौरिका, केशव भी हैं. चिल्लर पार्टी’ की फ़ौज का परिचय गीत सा है ये खुशनुमा गीत. मोहित चौहान ने बड़ी ख़ूबसूरती से इसे गाया है और अमित त्रिवेदी का वाद्य संजोयन भी बेहतरीन है. बच्चों का कोरस भी गीत का प्रभाव बढ़ाने में सहयोग देता है. मोहित चौहान की आवाज़ में इस गाने का एक उदास वर्ज़न भी है, जो फ़िल्म में किसी महत्वपूर्ण मोड़ पर शायद असरदार साबित हो.

’एक स्कूल बनाना है’ का प्रारम्भिक माहौल अमित त्रिवेदी-अमिताभ भट्टाचार्य के ‘उड़ान’ की याद दिलाता है. गौरिका, केशव, फ़िरोज़ा और अन्य बच्चों के स्वर हैं जिनका अमित त्रिवेदी ने प्रभावशाली ढंग से उपयोग किया है. अमिताभ भट्टाचार्या के बोल बच्चों की आकांक्षाओं की उड़ान को ख़ूबसूरती से पेश करते हैं.

’ज़िद्दी-पिद्दी’ में रॉक कॉन्सर्ट सा माहौल है, जो बच्चों की फ़िल्म मे थोड़ा अनूठा लगता है.गीत में बच्चों का ‘एटीट्यूड’ है, दुनिया से पंगा लेने का जज़्बा है, और ज़िद है. ज़िद्दी बच्चों की फ़ौज को स्वर दिये हैं अमित त्रिवेदी, अरमान और तन्मय ने. हो सकता है कि फ़िल्म मे देखने लायक प्रस्तुति हो.

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Image caption चिल्लर पार्टी को यूटीवी मोशन पिक्चर्स और सलमान ख़ान ने प्रोड्यूस की है.

’बहला दो’ में फिर से रॉक के स्वर हैं. कुछ समय पहले ‘लिटिल चैम्प्स सारेगामापा ज़ी’ से अपनी पहचान बनाने में सफ़ल हुए संगीतकार अनु मलिक के भतीजे, अरमान मलिक ने मुख्य स्वर दिए हैं और उनका साथ दिया है फ़िरोज़ा ने. अमित त्रिवेदी ने बच्चों के स्वर के साथ मुख्य धारा के संगीत का प्रयोग किया है. देखना है फ़िल्म में गीत कितना प्रभाव छोड़ पाता है.

’लायर लायर’एक बाल-कवितानुमा प्रस्तुति है जिसे गाया है गौरिका और केशव ने. एक मासूम सा ग़ुस्सा लिये गीत है, छोटे बच्चों को पसंद आ सकता है.

कुल मिला कर ‘चिल्लर पार्टी’ का संगीत मनोरंजक है. बच्चों पर केंद्रित इस एलबम में तेवर कई रंग के हैं लेकिन कहीं भी मासूमियत को भुनाने करने की कोशिश नहीं है. बल्कि स्वरों में ज़िद्दी तेवरों को प्राथमिकता दी है. अमित त्रिवेदी ने बच्चों की फ़िल्म में ओर्केस्ट्रेशन मे प्रयोग किये हैं. बिना स्टारकास्ट की इस फ़िल्म का एलबम, फ़िल्म के लिए बढ़िया प्लेटफ़ार्म है. संगीत से उम्मीद बनती है है कि पर्दे पर भी बच्चे धमाल मचाने में कामयाब होंगे.

रेटिंग : 3/5 (पाँच में से तीन)

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