आइटम सॉन्ग के चलन से नाराज़ जगजीत सिंह

जगजीत सिंह इमेज कॉपीरइट official website
Image caption जगजीत सिंह फ़िल्मों में आइटम सॉन्ग के चलन से नाराज़ हैं.

बीते कुछ महीनों में मुन्नी, शीला, शालू, जलेबी बाई और ना जाने ऐसे कितने आइटम सॉन्ग फ़िल्मों में आए और कई तो बड़े कामयाब भी साबित हुए. लेकिन मशहूर ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह इस चलन से नाराज़ हैं.

जगजीत सिंह कहते हैं, "लोग सिर्फ़ पैसे कमाने के बारे में सोचते हैं, इसलिए आजकल की फ़िल्मों में आइटम सॉन्ग की भरमार होती है. आज के फ़िल्मकार समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझते ही नहीं है."

जगजीत सिंह के मुताबिक़ लोगों को सिर्फ़ फ़िल्म संगीत ही नज़र आता है, और कुछ नहीं. इसलिए इन दिनों वो अपना कोई ग़ज़ल एलबम नहीं निकाल रहे हैं. गायक-संगीतकार शंकर महादेवन की पहली ग़ज़ल एलबम के लॉन्च के मौक़े पर जगजीत सिंह ने ये बातें कहीं.

हालांकि शंकर महादेवन की राय जगजीत सिंह से थोड़ी जुदा है. वो आइटम सॉन्ग के चलन से ज़्यादा ख़फ़ा नहीं है.

शंकर कहते हैं, "अगर स्क्रिप्ट में किसी धमाल की गुंजाइश है तो आइटम सॉन्ग डालने चाहिए. हां, ये ज़रूरी नहीं कि ज़बरदस्ती आइटम सॉन्ग डाले ही जाएं."

शंकर महादेवन ने बताया कि उन्होंने कजरारे और धन्नो जैसे आइटम सॉन्ग भी कंपोज़ किए हैं तो दूसरी ओर फ़िल्म माइ नेम इज़ ख़ान का भी संगीत दिया है जिसमें एक भी आइटम सॉन्ग नहीं था और गानों में ग़ज़ल का पुट था, फिर भी गाने सुपरहिट रहे.

शंकर कहते हैं, "आप अच्छी नीयत से, मन लगाकर कोई काम करो तो वो ज़रूर पसंद किया जाएगा. चाहे वो ग़ज़ल हो या किसी दूसरी तरह का गाना हो."

'तेरी परछाइयां'

इमेज कॉपीरइट official website
Image caption शंकर महादेवन ने अपना पहला ग़ज़ल एलबम 'तेरी परछाइयां' लॉन्च किया.

शंकर महादेवन के पहले ग़ज़ल एलबम का नाम है 'तेरी परछाइयां'.

शंकर इस एलबम के बारे में कहते हैं, "इस एलबम के गाने लिखे हैं कनाडा में रहने वाले निर्दोष जी ने और संगीत दिया है मेरे क़रीबी दोस्त आशीष मजूमदार ने. दरअसल मुझे बहुत दिनों से ग़ज़ल गाने की तमन्ना थी. मुझे ग़ज़लें बहुत पसंद आईं तो मैंने तय किया कि ये एलबम मैं ज़रूर करूंगा."

शंकर ने कहा कि जितने बेहतरीन तरीके से ग़ज़लें लिखी गईं हैं और जितना अच्छा संगीत दिया गया है, उतने ही अच्छे तरीक़े से उन्होंने इसे गाने की कोशिश की है. एलबम में कुल आठ ग़ज़लें हैं.

वहां मौजूद जगजीत सिंह कहते हैं कि शंकर जैसे मशहूर लोगों के ग़ज़ल गाने से इस विधा को और बढ़ावा मिलेगा और मीडिया कवरेज मिलने से लोग ग़ज़ल सुनने वाले लोगों की संख्या में इज़ाफ़ा होगा.

संबंधित समाचार