सबका हौसला बुलंद करेंगे कैलाश

कैलाश खेर
Image caption कैलाश खेर कहते हैं कि उन्हें आम लोगों की ज़िंदगी से बहुत प्रेरणा मिलती है

गायक कैलाश खेर ने गीतकार जावेद अख़्तर के साथ मिलकर एक नए तरह का गाना लिखा है.

इस गाने का नाम है 'हौसला बुलंद' और ये प्रेरित है आम लोगों की ज़िंदगी से जुड़े साहसिक कारनामों से.

एक निजी कंपनी के लिए बनाया गया ये गाना लोगों के साहस और जोश को समर्पित है.

कैलाश कहते हैं, "इस गाने को बनाने के पीछे जो मुहिम थी उसके तहत हमने आम आदमी की कहानियां मंगाईं और ऐसी कहानियां हमारे पास आईं भी."

"मसलन हमारे पास एक ऐसे पत्रकार की कहानी आई जो कठिन परिस्थितियों में एक ऐसी जगह जा पहुंचा जहां पुलिस भी नहीं पहुंच पाई. उसने ये काम किसी मेडल या ईनाम के लिए नहीं किया. भारत में कई ऐसे साहसी लोग हैं जिनकी कहानियां सामने आईं."

"इसके साथ दो ऐसे लोग जुड़ गए जो हौसला बुलंद होने के महाकाव्य और महाग्रंथ हैं. यानि मैं और जावेद अख़्तर. हम दोनों ने ही अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है."

जावेद अख़्तर के बारे में कैलाश कहते हैं, "जावेद साब गुणवत्ता की खान हैं. उनका काम हमारे लिए प्रेरणादायक है. वो हर काम आसान बना देते हैं. वो एक ऐसी आत्मा हैं जो शरीर के पार हैं."

"उनके सोचने और कार्य करने का ढंग निराला है. वो जो बात कहते हैं वो एक धरोहर बन जाती है. मसलन उनके डॉयलॉग - 'मैं जहां खड़ा होता हूं लाइन वहीं से शुरु हो जाती है', 'मेरे पास मां है' या फिर 'मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता'."

कैलाश ने कहा कि जावेद अख़्तर के सोचने का तरीक़ा और शब्दों को गढ़ने का ढंग अलग है.

कैलाश ने ये भी कहा कि वो किशोर कुमार, मुकेश, मोहम्मद रफ़ी और मन्ना डे से प्रेरित हैं.

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