औसत है 'आरक्षण' का संगीत

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Image caption 'आरक्षण' का संगीत शंकर-एहसान-लॉय ने बनाया है

गम्भीर विषयों पे धारदार फ़िल्में बनाने वाले प्रकाश झा एक और नई फ़िल्म लेकर हाज़िर हैं - आरक्षण. गम्भीर विषयों के बावजूद अपनी फ़िल्मों में प्रकाश झा संगीत के लिये ज़रूरी जगह बना ही लेते हैं.

उन्होंने इस बार संगीत का ज़िम्मा सौंपा है शंकर-अहसान-लॉय को और बोल प्रसून जोशी के हैं. साउंडट्रैक की एक ख़ास बात है कि एक गीत की संगीत रचना का श्रेय प्रसून जोशी को दिया गया है.

एलबम में चार मुख्य गीतों के साथ कुल 6 ट्रैक्स हैं. श्रेया घोषाल और मोहित चौहान के स्वरों में ’सीधे पॉइंट पे आओ ना’ एलबम को एक ख़ुशुनुमा शुरुआत देता है. गीत शंकर-अहसान-लॉय के ही पुराने कुछ गीतों, 'कुछ ना कहो' के 'अच्छे लगते हो' और 'लक्ष्य' के 'अगर मैं कहूं' का विस्तार सा लगता है. धुन में नवीनता नहीं है मगर प्रसून अपने शब्दों के खेल से गीत को कुछ हद तक मनोरंजक बनाने में सफल रहे हैं. मोहित चौहान और श्रेया अपने-अपने जाने पहचाने अंदाज़ से कुछ अलग और नया प्रस्तुत नहीं करते हैं.

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Image caption प्रकाश झा की पिछली फ़िल्मों का संगीत अच्छा रहा है

’मौक़ा - एक चान्स तो दे दे’ फ़िल्म के विषय आरक्षण पर आधारित थीम गीत है. एक गम्भीर विषय पर प्रसून जोशी के बोल शुरुआत में गीत के बारे में संभावनाएं जगाते हैं मगर गीत को युवाओं में लोकप्रिय करने के लिये एक युवा ’आईटम गीत’ की शक्ल देने की कोशिश निराश करती है. महालक्ष्मी अय्यर, रमन महादेवन, तरुण सागर, गौरव गुप्ता और रेहान के स्वरों में गीत को मनोरंजक बनाने की कोशिश की गई है मगर प्रसून जोशी के बोल कहीं काव्यात्मक हैं तो कहीं युवा भाषा का मिक्स, बहुत बेमेल से लगते हैं और अन्त में गीत प्रभावित नहीं करता.

एलबम की एक ख़ास बात है. शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात गायक पद्म भूषण पंडित छन्नू लाल मिश्रा का पहली बार हिंदी फ़िल्म के लिये गायन. उनका गाया गीत 'सांस अलबेली' एलबम में दो संस्करण में है. गीत की एक और खास बात है कि संगीत रचना का श्रेय प्रसून जोशी को दिया गया है. प्रसून जोशी प्रतिभाशाली कलाकार हैं और एक अच्छे गीत की रचना करनें में सफल हुए हैं. हालांकि पंडित छन्नू लाल मिश्रा की प्रतिभा और ख्याति अनुरूप अवसर साबित नहीं हो पाया है ये गीत और उनके स्वरों को वो उड़ान देने में असफल रहा है जिसके लिये वे जाने जाते हैं. मगर फिर भी एलबम की सबसे बेहतर प्रस्तुति है. गीत के एक और वर्शन में पंडित जी का साथ दिया है श्रेया घोषाल ने जो कि एलबम की एक और अच्छी प्रस्तुति है. प्रसून के बोल अच्छे हैं और वाद्य संयोजन भी गीत को माहौल देने में सफ़ल रहा है. फिर भी उनके संगीतकार के रूप में आकलन के लिये ये एक गीत काफ़ी नहीं है.

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Image caption अमिताभ बच्चन ने पहली बार 'आरक्षण ' में प्रकाश झा के साथ काम किया है

एक और गीत है एलबम में 'रोशनी’, फ़िल्म के कथानक के हिसाब से एक 'रैली गीत’ है. प्रसून जोशी के बोल विषयानुसार अच्छे बन पड़े हैं और शंकर-अहसान-लॉय की संरचना भी अच्छी है मगर कहीं ना कहीं वाद्यों का ज़रूरत से ज्यादा उपयोग गीत का असर कम करता है.

कुल मिला कर 'आरक्षण' का संगीत बहुत संभावनाएं होने के बावजूद उम्मीदों पे पूरा खरा उतरने में नाकाम रहा है. गीत ठीक-ठाक हैं मगर शंकर-अहसान-लॉय और प्रसून जोशी इससे बेहतर प्रस्तुतियां दे चुके हैं. शंकर-अहसान-लॉय अपनी खोयी ज़मीन की तलाश में फिर से हैं मगर इस फ़िल्म में मिले चानस को भुनाने में असफ़ल रहे हैं और संगीत को वांछित उड़ान नहीं दे पाये हैं.

रेटिंग के लिहाज़ से 2.5/5 (पाँच में से ढाई).

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