भ्रष्टाचार आम आदमी का दर्द है:गुलज़ार

टीवी धारावाहिक ऑफ़िस-ऑफ़िस के मुसद्दी लाल को तो आप भूले नहीं होगे.

भ्रष्टाचार से जूझते-जूझते मुसद्दी अब बड़े पर्दे पर पहुँच गए हैं और जल्द ही फ़िल्म ‘चला मुसद्दी ऑफ़िस-ऑफ़िस’ रिलीज़ होने वाली है.

मशहूर लेखक और गीतकार गुलज़ार ने इस फ़िल्म के गाने लिखे हैं .मुंबई में आयोजित एक प्रेस वार्ता में इस फ़िल्म का संगीत पेश किया गया.

इस मौके पर मौजूद गुलज़ार ने कहा, “इस फ़िल्म के लेखक राजीव ने आम आदमी को एक नया नाम दिया है और वो नाम है मुसद्दी लाल.”

गुलज़ार के मुताबिक़ इस फ़िल्म में हर किसी को अपनी झलक नज़र आती है, “इस फ़िल्म की सबसे बड़ी बात है कि ये कहानी आप की है,आप हँस भी लेते हैं,लेकिन कहीं एक फांस रह जाती है,एक चुभन रह जाती है कि हाँ यार हमारे साथ भी तो यही हो रहा है लेकिन आप हँस के जी लेते हैं.”

गुलज़ार ने आगे कहा,“यही आम आदमी का दर्द है और वो भी मुस्कुराकर बर्दाश्त करता है.”

जब गुलज़ार से पूछा गया कि क्या आप ने कभी रिश्वत ली है तो उन्होने मुस्कुराते हुए कहा, “जब डेंटिस्ट सामने हो तो मुँह तो खोलना ही पड़ता है. इस फ़िल्म के लिए भी राजीव ने मुझे रिश्वत दी है. और वो रिश्वत थी इस फ़िल्म की बेहतरीन कहानी. बस मैं उस बेहतरीन स्क्रिप्ट में फंस गया.”

उन्होंने ये भी कहा कि मुसद्दी के साथ जो गुज़रता है वो आम आदमी के साथ गुज़रता है और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने का ये पूरा किस्सा बड़ा लंबा है.

'ऑफ़िस-ऑफ़िस' एक मशहूर हास्य धारावाहिक था, जिसे दर्शकों ने काफ़ी पसंद किया. अब इसे फ़िल्म के रूप में उतारा जा रहा है. ग़ौरतलब है कि इससे पहले धारावाहिक खिचड़ी को भी फ़िल्म में तब्दील किया जा चुका है.

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