बीबीसी सेवेन्टी एम एम

  • 1 अगस्त 2011

बीबीसी सेवेन्टी एम में इस हफ़्ते मनोरंजन जगत से जुड़ी दिलचस्प बातें. इस हफ़्ते की नई फ़िल्मों पर बात. फ़िल्म समीक्षक अरनब बैनर्जी की पैनी नज़र हफ्ते की फ़िल्मों पर.

इस हफ़्ते बॉक्स ऑफ़िस पर तीन फ़िल्में आईं हैं ‘गांधी टू हिटलर’,‘खाप’ औऱ ‘बबलगम’.'गांधी टू हिटलर' के लिए काफ़ी उत्सुकता थी लेकिन फ़िल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी. हमारे फ़िल्म समीक्षक अरनब बैनर्जी कहते हैं कि ‘पूरी पटकथा काफ़ी उलझी हुई है अन्त तक ये समझ नहीं आता कि गांधी और हिटलर की विचारधाराओं को साथ दिखाने का मकसद था क्या

जनता की राय में भी ये फ़िल्म असर नहीं डालती हालांकि रघुवीर यादव के काम को लोगों ने पसंद किया’.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

सुनिए बीबीसी सेवेन्टी एम एम

सप्ताह की दूसरी फ़िल्म 'खाप', इज़्ज़त के नाम पर हत्या जैसे गंभीर मुद्दे को केन्द्र में रखकर बनाई गई है लेकिन यहां भी निर्देशक अजय सिन्हा अपने रास्ते से भटक गए हैं.बीबीसी फ़िल्म समीक्षक अरनब बैनर्जी की नज़र में ‘खाप पंचायतें इज़्ज़त के नाम पर हत्याओं को ग़लत नहीं ठहराती फ़िल्म इसे लेकर बननी चाहिए थी लेकिन कहानी एक प्रेम कथा और ढेर सारे चरित्रों के इर्द गिर्द घूमकर रह जाती है’.

सप्ताह की तीसरी फ़िल्म 'बबलगम' किशोरावस्था के प्यार और उससे जुड़ी परिस्थितियों को लेकर बुनी गई है औऱ हमारे फ़िल्म समीक्षक के मुताबिक़ बाक़ी दो फि़ल्मों के मुकाबले ये फ़िल्म ज्यादा देखने लायक है.

ख़ास पेशकश

31 जुलाई को गायक मोहम्मद रफ़ी की 31वीं पुण्यतिथि पर बीबीसी की तरफ़ से एक ख़ास पेशकश सुनिए बीबीसी के ख़ज़ाने से मोहम्मद रफ़ी की आवाज़.

संबंधित समाचार