‘दिल्ली और इस्लामाबाद में फ़र्क नहीं’

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Image caption शशि थरुर ने घुमक्कड़ नारायण साहित्य उत्सव में युवाओं को संबोधित किया.

इस्लामाबाद के ख़लदूनियां हाई स्कूल की आयशा अहमद को अपने शहर और दिल्ली में कोई फ़र्क नहीं लगा.

आयशा इन दिनों 'घुमक्कड़ नारायण साहित्य उत्सव 2011' में शामिल होने के लिए दिल्ली आई हैं.

आयशा अहमद कहती हैं, “हमें दिल्ली आए हुए तीन दिन हो चुके हैं. हमें दिल्ली और इस्लामाबाद में कोई फ़र्क नज़र ही नहीं आ रहा. बस जब सड़क पर लिखे हुए साईन बोर्ड नहीं पढ़ पाते, तो लगता है कि हम दिल्ली में है. यहाँ की सड़कें,लोग,खाना बिलकुल पाकिस्तान जैसा ही है.”

घुमक्कड़ नारायण साहित्य उत्सव 2011 में आयशा समेत पाकिस्तान के सात बच्चे और तीन अध्यापक भी आए हैं. इनके अलावा बांग्लादेश और भारत के कई बच्चे भी इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं.

इस साहित्य उत्सव का आयोजन यूनेस्को और नई दिल्ली स्थित नेहरु मेमोरियल म्यूज़ियम और लाइब्रेरी ने मिलकर किया है.

साहित्य उत्सव में चार दिन का एक वर्कशॉप भी होगा जिसका विषय है, “सरहदों के पार अमन-टैगोर और फ़ैज़ की लिखाई के माध्यम से”

बच्चे कविवर रविंद्रनाथ टैगोर और शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के साहित्य पर एक कार्यशाला में भाग लेगें और चर्चा करेगें कि कैसे इनका साहित्य दोनों देशों के बीच शांति कायम करने में मदद कर सकता है.

इस उत्सव का उदघाटन करने पहुँचे पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरुर ने कहा, “मुझे ख़ुशी है कि मैं एक ऐसे साहित्य उत्सव का उदघाटन करने पहुंचा हूं जहां बच्चे रविंद्रनाथ टैगोर और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के साहित्य के माध्यम से भारत-पाकिस्तान के बीच शांति पर चर्चा करेंगे. दोनों ही लेखक ख़ासतौर पर राष्ट्रीय सीमाओं से परे की सोच रखते थे और मानवीय मूल्यों की बात करते थे.”

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Image caption घुमक्कड़ नारायण साहित्य उत्सव में हिस्सा लेने पाकिस्तान से भी बच्चे आए हैं.

ये दूसरा मौका है जब आयशा अहमद भारत आई हैं लेकिन इस बार वो पहले की अपेक्षा ज़्यादा ख़ुश हैं. वजह पूछने पर वो कहती हैं, “पिछली बार मैं अपने परिवार के साथ आई थी लेकिन अबकी बार स्कूल के दोस्तों के साथ आई हूँ. पिछली बार ज़्यादा लोगों से नहीं मिल पाई थी. लेकिन इस बार ज़्यादा लोगों से मिल पा रही हूँ, नए दोस्त बन रहे हैं. हम इनके साथ संपर्क में रहेंगे.”

इन सब के आलावा आयशा के ऐजेंडे पर कुछ और भी हैं और वो है बॉलीवुड.

आयशा कहती हैं, “बॉलीवुड की हमने लगभग हर फ़िल्म देखी है, लेकिन दिल्ली में हमारा सिनेमा देखने का तो प्रोग्राम है ही.”

घुमक्कड़ नारायण साहित्य उत्सव दिल्ली के अलावा देहरादून, चंड़ीगढ़ औऱ नैनीताल में भी आयोजित किया जाएगा.

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