मेरे ब्रदर की दुल्हन-नहीं है यादगार संगीत

  • 23 अगस्त 2011
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'मेरे ब्रदर की दुल्हन' यशराज फ़िल्म्स की आने वाली रोमांटिक कॉमेडी है जिसमें इमरान ख़ान और कटरीना कैफ़ के साथ पाकिस्तान के पॉप स्टार अली ज़फ़र मुख्य भूमिकाओं में हैं.

युवा दर्शक वर्ग को केंद्र में रख कर बनाई गई इस किस्म की फ़िल्मों में संगीत मौज-मस्ती के माहौल में रंगे हल्के-फुल्के गीतों से रचा जाता है.

इस बार संगीत रचनाओं का ज़िम्मा यशराज ने दिया है सोहेल सेन को जोकि अपनी पिछली फ़िल्मों में प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं और उनके साथ में गीतकार हैं इरशाद कामिल.

एलबम में छह मुख्य ट्रैक्स हैं. शीर्षक गीत 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' एलबम को एक मज़ेदार शुरुआत देता है.

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Image caption फ़िल्म में मौज-मस्ती के माहौल में रंगे हल्के-फुल्के गीत हैं.

मैच-मेकिंग के मनोरंजक पहलुओं को उजागर करता ये गीत फ़िल्म का थीम गीत कहा जा सकता है, जहां अपने भाई के लिये एक परफ़ेक्ट दुल्हन की खोज, गीत का आधार है.

के के और कृष्णा बेरुआ के स्वरों में ये गीत अपने आप में शायद लोकप्रिय होने का माद्दा नहीं रखता हो लेकिन एक मनोरंजक वीडियो के साथ लोकप्रिय होने की गुंजाइश ज़रूर रखता है.

'धुनकी' एलबम की अगली रचना है. गीत को चार्टबस्टर की तरह कस्टमाइज़्ड करके प्रस्तुत करने की पूरी कोशिश नज़र आती है और इसे एक डिजाइनर गीत कहा जा सकता है.

शुरुआत में ये गीत बहुत कुछ 'फ़ैशन' के 'फ़ैशन का है ये जलवा' की याद दिलाता है. नेहा भसीन की गायकी असरदार है हालांकि इस किस्म के गीतों में सुनिधि चौहान के स्तर तक पहुंचने में बहुत मेहनत करनी होगी.

गीत में मलंग की मस्ती कम है फिर भी सोहेल सेन गीत में रॉक स्टार कटरीना कैफ़ के लिये कॉन्सर्ट का उचित माहौल देने में सफल हुए हैं और ये गीत आने वाले दिनों में लोकप्रियता की और सीढ़ियां चढ़ेगा इसमे शक की कोई गुंजाइश नहीं है .

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Image caption फ़िल्म में सोहेल सेन के संगीत से सजे कुल छह गीत हैं.

राहत फ़तेह अली खान के गाये 'इस्क रिस्क' को एलबम की सबसे बेहतर प्रस्तुति कहा जा सकता है. राहत अपनी गायकी से किसी भी साधारण सी रचना को भी प्रभावशाली बनाने का माद्दा रखते हैं.

धुन में नवीनता नहीं है मगर फिर भी राहत की वजह से गीत सुनने लायक बन पड़ा है. इरशाद कामिल ने ब्रदर की होने वाली दुल्हन से हुए इस्क के रिस्क को गीत में बखूबी से पेश किया है.

गीत एक 'मॉडर्न अवतार' में भी मौजूद है 'रिस्की लव'. श्रीरामचन्द्र और नेहा भसीन के स्वरों में ये गीत मुख्य संस्करण जितना असरदार तो नहीं है पर डिस्को-थेक्स में आने वाले कुछ दिनों तक सुनाई ज़रूर देगा.

फ़िल्म में पॉप स्टार अली ज़फ़र हैं मगर उनके हिस्से में एक ही गीत आया है 'मधुबाला'. अली ज़फ़र युवाओं में काफ़ी लोकप्रिय हैं मगर एक गायक के रूप में उनकी रेंज सीमित है और 'मधुबाला' में भी उनकी गायकी साधारण ही है. हाँ, उनके प्रशंसकों को पसंद आ सकता है उनका ये गीत.

देखना ये है कि पर्दे पर कितनी मस्ती और मज़ा बिखेर पाते है अली ज़फ़र.

बेनीदयाल और अदिति सिंह शर्मा के स्वरों के साथ सोहेल सेन अपने वाद्य संयोजन से, एलबम की अगली प्रस्तुति 'छू-मंतर' को एक अच्छा माहौल देते हैं.

इरशाद कामिल के बोलों में मुख्य किरदारों के बीच पनप रहे प्रेम की घोषणा करता ये गीत पर्दे पर एक बेहतर प्रस्तुति की गुंजाइश रखता है.

यशराज की 'बंटी और बबली' में 'कजरारे' की अपार सफलता ने बाद में कई 'ढाबा छाप आइटम' गीतों को जन्म दिया है. एलबम की आख़िरी प्रस्तुति, 'दो धारी तलवार' भी उनमें से एक है. सिद्दार्थ माल्या के स्वरों में कुछ ताजगी है अन्यथा एक साधारण सी रचना है.

इस तरह के गीतों में फ़िल्मांकन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यहां भी गीत की सफलता फ़िल्मांकन पे बहुत निर्भर करती है.

कुल मिलाकर 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' का संगीत फ़िल्म की कथानक के अनुरूप है लेकिन फ़िल्म के बाहर एक संगीत एलबम के रूप में बहुत प्रभाव नहीं छोड़ता.

पर्दे पर गीत ज्यादा असरदार हो सकते हैं इसकी गुंजाइश है. 'धुनकी' फ़िल्म के लिये ज़मीन बनाने में निश्चित रूप से कामयाब होगा, लेकिन फिर भी फ़िल्म का संगीत ऐसा नही है जो बहुत दिनों तक याद रखा जायेगा .

रेटिंग के लिहाज़ से 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' के संगीत को 2.5/5 (पाँच में से ढाई).

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