न कोई फ़ेल होगा, न देगा 'कैपिटेशन' फ़ीस

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Image caption यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो दंड और जुर्माना के कड़े प्रावधान हैं

छत्तीसगढ़ के प्राथमिक स्कूलों में अब बच्चों को फ़ेल नहीं किया जा सकता. इसी के साथ यदि दाख़िले के लिए कोई स्कूल 'कैपिटेशन' फ़ीस लेता है तो उस स्कूल को इस राशि के दस गुना तक का जुर्माना देना पड़ सकता है.

ये प्रावधान राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में किए गए हैं.

इस अधिनियम में ये प्रावधान भी है कि यदि किसी स्कूल में शिक्षक छात्र को मानसिक यातना पहुंचाता है तो उसके खिलाफ़ विभागीय करवाई की जा सकती है.

सरकारी सूत्रों का कहना है, "प्रारंभिक शिक्षा संबंधित किसी विद्यालय में विद्यार्थी को शारीरिक दण्ड नहीं दिया जाएगा या फिर उसका किसी भी प्रकार से मानसिक उत्पीड़न नहीं किया जाएगा. जो शिक्षक या स्कूलकर्मी इन नियमों का उल्लंघन करेगा उसके खिलाफ़ विभागीय भर्ती नियम एवं सामान्य प्रशासन विभाग के नियम के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी."

न कैपिटेशन फ़ीस और न सक्रीनिंग

स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि छत्तीसगढ़ में प्राथमिक शिक्षा पा रहे छात्रों को न तो किसी कक्षा में रोका जाएगा, न ही विद्यालय से निष्कासित किया जाएगा. अगर ऐसा होता है तब भी शिक्षकों और स्कूल के संचालकों की कार्रवाई की जाँच होगी.

शिक्षा विभाग नें स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में प्रारंभिक शिक्षा की अवधि में किसी भी स्तर पर कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी. साथ ही प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने पर प्रत्येक बच्चे को निर्धारित प्रमाण पत्र संबंधित विद्यालय द्वारा जारी किया जाएगा.

इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग नें यह भी तय किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य में प्रारंभिक शिक्षा के लिए संचालित कोई भी विद्यालय प्रवेश देते समय 'कैपिटेशन फ़ीस' नहीं लेगा और छात्रों या उनके अभिभावकों को किसी तरह की स्क्रीनिंग यानी अनुवीक्षण प्रक्रिया से नहीं गुज़रना होगा.

विभाग के आदेशानुसार, "जो कोई विद्यालय या व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रति छात्र फ़ीस प्राप्त करता है, तो जुर्माना केपिटेशन फ़ीस से दस गुना तक होगा. यदि कोई स्कूल किसी छात्र को अनुवीक्षण प्रक्रिया के अधीन रखता है, तो उसे 25 हज़ार रूपए से लेकर 50 हज़ार रूपए तक का का जुर्माना लगाया जा सकता है."

इसके साथ ही नीजी ट्यूशन देने वाले शिक्षकों के बारे में हिदायत दी गई है कि कोई भी शिक्षक या शिक्षाकर्मी निजी टयूशन या निजी शिक्षण क्रियाकलाप में स्वयं को नहीं लगाएगा.

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