कितना दम है फ़िल्म फ़ोर्स के संगीत में?

  • 6 सितंबर 2011
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Image caption 'फ़ोर्स' में एक लंबे समय बाद दक्षिण भारतीय फ़िल्मों के संगीतकार हैरिस जयराज ने संगीत दिया है.

बॉलीवुड में दक्षिण भारत की सुपर हिट एक्शन थ्रिलर फ़िल्मों के रीमेक की इन दिनों बाढ़ सी आई हुई है. इसी श्रृंखला में अगली कड़ी है निर्देशक निशिकांत कामत की नई फ़िल्म ‘फ़ोर्स’ जो 2003 की सुपरहिट तमिल फ़िल्म ’काका काका’ की रीमेक है.

गजनी, वांटेड, रेडी, सिंघम जैसी रीमेक्स में आज़माये इस सुपरहिट नुस्खे के तड़के में भरपूर एक्शन के मसाले के साथ एक मासूम सी प्रेमकथा की ज़रूरत भी होती है और इस तरह की फ़िल्मों में संगीत भी बहुत कुछ उसी प्रेमकथा के इर्द-गिर्द रचा जाता है.

‘फ़ोर्स’ में संगीत दिया है मूल तमिल फ़िल्म ’काका काका’ के संगीतकार हैरिस जयराज ने और गीत लिखे हैं जावेद अख़्तर ने. हैरिस जयराज की ये दूसरी हिंदी फ़िल्म है. उनकी पहली फ़िल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ का संगीत बहुत लोकप्रिय हुआ था. बीच-बीच में उनकी कुछ और डब्ड फ़िल्में आती रही हैं लेकिन ‘रहना है तेरे दिल में’ जैसी लोकप्रियता किसी को हासिल नहीं हुई.

‘फ़ोर्स’ एलबम में पाँच गीत हैं. हैरिस जयराज ने चार गीतों की संगीत रचना की है जिनमें से दो गीत उनकी पुरानी तमिल फ़िल्मों ले लिये गये हैं. एलबम में मेहमान संगीत निर्देशक के रूप में एक गीत के साथ मौजूद हैं ललित पंडित.

एलबम को एक अच्छी शुरुआत मिलती है ‘ख़्वाबों ख़्वाबों’ से जो मूल तमिल फ़िल्म ’काका काका’ के सुपर हिट गीत ’उयिरिन उयिरे’ का ही हिन्दी वर्ज़न है. गीत में मुख्य स्वर हैं के.के. और सुचित्रा के जिन्होंने मूल गीत में भी स्वर दिये थे. सुचित्रा के स्वर धुन को एक अनोखा माहौल प्रदान करते हैं और जयराज एक थिरकाने वाली लोकप्रिय रचना गढ़ने में सफ़ल हुए हैं.

‘चाहूं भी’ एलबम की अगली प्रस्तुति है जिसे गाया है कार्तिक के साथ बॉम्बे जयश्री ने. हैरिस जयराज की धुन नई है और एक रोमांटिक गीत है जिसका वातावरण बहुत कुछ रहमान के संगीत स्कूल से निकला सा लगता है. हैरिस जयराज के वाद्य संयोजन में गिटार और सैक्साफोन के साथ कोरस का अच्छा उपयोग हुआ है. बॉम्बे जयश्री, हैरिस जयराज की फ़िल्मों में एक नियमित आवाज़ रही हैं और शायद इसी वजह से गीत ‘रहना है तेरे दिल में’ के उनके गीत ‘ज़रा ज़रा’ की याद दिलाता है.

एलबम की एक और अच्छी रचना है ‘मैं चली’. श्रेया घोषाल के साथ नरेश अय्यर के स्वर हैं. हैरिस जयराज ने इस गाने में अपनी पुरानी तमिल फ़िल्म ’मुन्ना’ के गीत को नये कलेवर में प्रस्तुत किया है. धुन अच्छी है और श्रेया अपनी गायकी से मूल तमिल गीत से इस गीत को ज़्यादा असरदार बनाने में क़ामयाब रही हैं. जावेद अख़्तर के बोल भी अच्छे बन पड़े हैं.

मेहमान संगीतकार ललित पंडित की रचना ‘दम है तो आजा’ एलबम का सबसे कमज़ोर गीत है. ‘वीवा’ बैंड की पुरानी सदस्य महुआ कामत के स्वर में इस गाने में न धुन में कोई नवीनता है और न ही स्वरों में ज़्यादा दम.

हैरिस जयराज का एक गीत और है एलबम में ‘दिल की है तमन्ना’ जिसे विजय प्रकाश और शालिनी सिंह ने स्वर दिये हैं. एक ठीक ठाक सा गीत है ख़ासकर मुख्य गायकों के स्वर ताज़गी लिये हुए हैं, हालांकि गायकी असरदार नहीं है.

कुल मिलाकर हैरिस जयराज ‘फ़ोर्स’ के संगीत को थोड़ा असर देने में क़ामयाब रहे हैं हालांकि उसका श्रेय उनकी तमिल मूल रचनाओं को जाना चाहिये. फ़िल्म का संगीत ‘ग़ज़नी’ टैम्प्लेट की एक्शन थ्रिलर के बिल्कुल माफ़िक है लेकिन ‘रहना तेरे दिल में’ जितना लोकप्रिय और क़ामयाब होगा इसमें संदेह है.

रेटिंग के लिहाज़ से ‘फ़ोर्स’ के संगीत को २.५/५ (पाँच में से ढाई)

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