रास्कल्स - नाम बड़े और दर्शन छोटे

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Image caption डेविड धवन की नई कॉमेडी फ़िल्म है रास्कल्स

रास्कल्स’ फ़िल्म का संगीत सुनने के बाद शायद आपके मुंह से भी ये ही शब्द निकले. अगर आप अपनी कमाई के रू150 फ़िल्म की सीडी पर बरबाद करके आये हों तो आप डेविड धवन, अजय देवगन, संजय दत्त, विशाल-शेखर जैसे बड़े नामों से ठगे से महसूस करगें.

माना रास्कल्स एक स्लैपस्टिक कॉमेडी है जिसमें संगीत की गुंजाइश ना के बराबर है मगर डेविड धवन, शोला और शबनम से लेकर पार्टनर तक हर कॉमेडी में लोकप्रिय संगीत की जगह निकाल ही लेते हैं. और फिर विशाल-शेखर भी मौजूद हों जो पिछले दो सालों में दुहराव के बावजूद हिट और लोकप्रिय संगीत देते आये हैं और रा.वन की सफ़लता से फिर से शीर्ष संगीतकारों की जमात में शामिल हो गये हैं, तो कुछ उम्मीदें तो बंध ही जाती हैं.

रास्कल्स का संगीत सुनने के बाद लगता है कि विशाल-शेखर ने अपनी सारी प्रतिभा और कोशिशें रा.वन के संगीत में ख़र्च करने के बाद बेमन से रास्कल्स का संगीत तैय्यार किया है.

चार गीत हैं एल्बम में और दो रीमिक्स ट्रैक्स हैं. शीर्षक गीत नीरज श्रीधर ने गाया है और हाल ही के दिनों के कई मज़ेदार शीर्षक गीतों के मुकाबले ये काफ़ी फ़ीका सा लगता है. गीत में हास्य भी बहुत थोपा हुआ सा, फ़ोर्स्ड सा लगता है. कुछ एक बार बजने के बाद बोर करने लगता है ये गीत.

जिस गीत में थोड़ा बहुत चलने की गुंजाइश है वो है सुनिधि चौहान का गाया ‘शेक इट सैयां’, हालांकि गीत का टैम्प्लेट बासी है लेकिन सुनिधि अपनी गायकी से गीत में कुछ रंग जमाने में सफ़ल हुई हैं. एक ठीक ठाक सा गीत है जो फ़िल्म के रीलीज़ तक कहीं कहीं सुनाई दे, मगर बहुत ज़्यादा दिनों तक बजने का दम नहीं रखता.

दलेर मेहंदी के गाये ‘टुक टुक घोड़ी चढ़ ले’ में कुछ संभावना थी लेकिन अंत में ये गीत भी साधारण ही साबित होता है. वैसे दलेर की गायकी असरदार है फिर भी हाल ही में इस किस्म के कई मज़ेदार गीत आये हैं इसलिये ‘विशाल-शेखर’ इस गीत में थोड़ा निराश करते हैं.

नीरज श्रीधर के गाये ‘पर्दानशीं’ में भी कुछ खास नहीं है. सुनिधि का एक केमियो है गीत में मगर गीत बहुत असर नहीं छोड़ता.

रास्कल्स एक बड़े बजट की मुख्यधारा की फ़िल्म है लेकिन संगीत का ट्रीटमैंट बहुत साधारण है. डेविड धवन की कुछ पिछली दो-तीन फ़िल्मों को छोड़ दें तो उनकी फ़िल्मों में संगीत हमेशा मस्ती से भरा मज़ेदार होता है लेकिन रास्कल्स में विशाल-शेखर की मौजूदगी के बावजूद निराशा हाथ लगती है.

फ़िल्म का संगीत अब तक फ़िल्म के लिये भी एक ज़रूरी आधार बनाने में नाकाम रहा है. साल की अब तक सबसे कमज़ोर प्रस्तुतियों में से एक है ‘रास्कल्स’ का संगीत.

नम्बरों के लिहाज़ से रास्कल्स के संगीत को 1/5 (पांच मे से एक).

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