अरे एक गवैया तो घर में ही है !

  • 28 सितंबर 2011
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Image caption लता मंगेशकर 28 सितंबर 82 साल की हो गईं.

पाँच साल की उम्र में गायकी का जो अविस्मरणीय सफर शुरु हुआ वो 77 सालों बाद भी जारी है. सुरों की मलिका के नाम से जानी जाने वाली वो हस्ती जिसे सब लता मंगेशकर के नाम से जानते हैं, 28 सितंबर को 82 साल की हो गईं.

बीबीसी के साथ एक ख़ास मुलाक़ात में लता मंगेशकर ने बताया कि कैसे बचपन से ही वो गाने लगी थीं. उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर बड़े संगीतज्ञ थे और संगीत की शिक्षा भी देते थे.

लता मंगेशकर कहती हैं, "मैं पाँच साल की थी. मेरे पिता अपने शागिर्द को गाना सिखा रहे थे. बीच में वो किसी काम की वजह से बाहर गए और उन्होंने अपने शिष्य को रियाज़ जारी रखने को कहा. जब वो गाने लगा तो मुझे लगा कि वो ग़लत गा रहा है. मैं उसके पास गई और कहा कि ऐसे नहीं गाते. जब मैं गाकर सुना रही थी, तब मेरे पिताजी पीछे आकर खड़े हो गए और उन्होंने मेरे गाना सुना. तब उन्होंने मेरी मां से कहा कि अरे एक गवैया तो अपने घर में ही है."

लता मंगेशकर ने बताया कि अगले दिन उनके पिताजी ने उन्हें सुबह उठाया और उसके बाद उनकी संगीत की शिक्षा शुरु हो गई.

अपने इतने लंबे गायकी के सफर में लता मंगेशकर ने संस्कृत, मराठी और हिंदी भाषा में ना जाने कितने गीत गाए होंगे.

1940 के दशक में उन्होंने फ़िल्मों में गाना शुरु किया और आज भी लता का दौर बदस्तूर जारी है.

सदाबहार हीरो कहे जाने वाले देव आनंद कहते हैं, "लता जी बेतहाशा अच्छा गाती हैं. वो इतनी कामयाब होने के बाद भी बिलकुल सरल हैं. ज़मीन पर बैठकर वो रियाज़ करती थीं. मैं उन्हें फ़ोन करता हूं तो एक सेकंड में फ़ोन पर आकर मुझसे बड़े प्यार से बातें करती हैं."

निर्माता निर्देशक श्याम बेनेगल ने लता मंगेशकर को बधाई देते हुए उन्हें हिंदी संगीत जगत की 'ग्रैंड ओल्ड लेडी' बताया.

हिंदी फ़िल्मों के सुपरस्टार शाहरुख़ ख़ान कहते हैं, "लता दीदी इतनी बड़ी हस्ती हैं कि उनके बारे में कुछ भी बोलना कम होगा. उन्होंने भारत में संगीत को परिभाषित किया है."

गायक सोनू निगम के मुताबिक़, "ये हम सबका सौभाग्य है कि हम लता दीदी के युग में पैदा हुए हैं. उन्होंने हमें प्रेरित किया है. वो हमारी अगली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेंगीं."

गायक सुरेश वाडेकर के मुताबिक़ लता मंगेशकर का गाना सुनकर परम आनंद की अनुभूति होती है और उसकी वजह से बरबस ही आंखों से आंसू निकलने लगते हैं. गायक शान कहते हैं, "लता दीदी के लिए क्या कहूं कुछ समझ में ही नहीं आता. उनकी आवाज़ में एक दैवीय शक्ति है. जो सबसे अनूठी और सबसे अलग है. जो आपको अपनी ओर खींच लेती है."

गीतकार प्रसून जोशी इस बात के लिए अपने आपको सौभाग्यशाली मानते हैं कि उनका लिखा पहला गीत लता मंगेशकर ने गाया था. फ़िल्म लज्जा में वो गाना था. प्रसून जोशी कहते हैं, "दीदी ने मेरे लिखे गाने लुका छिपी बहुत हुई को गाकर उसे अविस्मरणीय बना दिया है."

उनके 82वें जन्मदिन पर उन्हें उनके भाई ह्रदयनाथ मंगेशकर के नाम पर स्थापित पहला ह्रदयनाथ मंगेशकर पुरस्कार दिया जा रहा है. लता मंगेशकर को मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन ये पुरस्कार देंगे.

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