नसों में स्याही

एस निहाल सिंह
Image caption निहाल सिंह ने निजी अनुभवों का बेबाकी से विवरण दिया है

जाने माने पत्रकार एस निहाल सिंह मे अपनी आत्म कथा ‘इंक इन माई वेंस’ में लिखा है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मोरारजी देसाई ने उन्हें दूरदर्शन और आकाशवाणी के महानिदेशक बनने का न्योता दिया था जिसे उन्होंने इसलिए अस्वीकार कर दिया था कि इससे उनकी पत्रकारिता पर बंदिशें लग जातीं.

निहाल सिंह लिखते हैं कि मोरारजी को सवाल के जवाब में सवाल करने की आदत थी.

इंदिरा सरकार में रक्षा मंत्री जगजीवन राम की याददाश्त ग़ज़ब की थी. वह अपनी दोनों हथेलियाँ जोड़ कर हुक्के के अंदाज़ में 555 ब्राँड की सिगरेट पिया करते थे. लालू के तरह उनके कान के बाल भी बाहर दिखाई देते थे.

इंदिरा गाँधी के साथ निहाल सिंह के घूप छाँव वाले संबंध थे. उनके अनुसार उन्हें इस बात की ललक थी कि उन्हें बौद्धिक व्यक्ति के रूप में पहचाना जाए. निहाल उनकी रानी जैसी अदाओं के मुरीद थे और विदेशी मामलों में जिस तरह से वह शक्तिशाली से शक्तिशाली व्यक्ति को मुस्कान के साथ ठिकाने लगाती थीं, निहाल उसके भी कायल थे.

आपातकाल की यादें

निहाल को अभी भी याद है जब 26 जून 1975 को जब उन्हें पता चला कि आपातकाल लगा दिया गया है, उन्होंने स्टेट्समैन का विशेष संस्करण निकालने की योजना बनाई.

जल्दी जल्दी लोगों को घर से बुलाकर संस्करण तैयार करवाया गया.लेकिन जब उसे सेंसर को भेजा गया तो अख़बार के ज़्यादातर हिस्से को छापने लायक नहीं माना गया. निहाल सिंह ने बिना किसी की परवाह करते हुए अख़बार के प्रथम पृष्ठ पर लिखा कि अंक को इसको सेंसर किया गया है.

1976 में तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल ने जब उन्हें बुलाकर शिकायत की कि आपने मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात की ख़बर को अपनी मुख्य ख़बर क्यों बनाया है जबकि उसी दिन राज्य सभा ने आपातकाल के विधेयक को पारित किया था, निहाल सिंह ने उन्हें जवाब दिया था, "मंत्री महोदय आपके सेंसर कानून हमें यह तो बताते हैं कि कौन सी ख़बर न छापी जाए, लेकिन अगर आप यह चाहते हैं कि कौन सी ख़बर छापी जाए और किस तरह छापी जाए तो आपको अपने क़ानूनों को बदलना होगा." ज़ाहिर है विद्याचरण शुक्ल को यह बात बहुत नागवार गुज़री थी.

25 सालों तक स्टेट्समैन में काम करने के बाद उन्होंने संपादक पद से इसलिए इस्तीफ़ा दे दिया क्योंकि प्रकाशक सीआर ईरानी उनके काम में हस्तक्षेप कर रहे थे. इसके बाद वह इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया पोस्ट और दुबई से प्रकाशित होने वाले ख़लीज टाइम्स के संपादक बने.

निहाल ने अपनी किताब में अंग्रेज़ महिलाओं को पसंद करने की अपनी कमज़ोरी को छुपाया नहीं है. अपने कालेज के दिनों में उन्होंने माउंटबेटन की युवा पुत्री पामेला माउंटबेटन को अपने कालेज आमंत्रित किया था.

अपनी अमरीका यात्रा के दौरान वह जानी मानी हॉलीवुड अभिनेत्री जेन मेंसफ़ील्ड से मिले थे जिन्होंने एक दिलचस्प बात उन्हें बताई थी कि सोते समय भी वह यह ध्यान रखती हैं कि वह सुंदर पोज़ बनाकर सोंएं. लेकिन उनकी पिन अप गर्ल थीं मशहूर अभिनेत्री अवा गार्डनर.

26 साल की उम्र में उन्होंने अपना दिल अपने से 11 साल बड़ी डच महिला गीर्तजे ज़्यूदरवेग को दे दिया था जिनसे बाद में उनका विवाह हुआ.

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