रॉकिंग है रॉकस्टार का संगीत

रनबीर कपूर और नर्गिस फख़री इमेज कॉपीरइट official website
Image caption 11 नवम्बर को रिलीज़ हो रही है रॉकस्टार

रॉकस्टार इस साल की सबसे प्रतीक्षित फ़िल्मों में से एक हैं लेकिन संगीत प्रेमियों को शायद फ़िल्म से भी ज्यादा इंतज़ार इसके संगीत का था. ए आर रहमान के लिये बहुत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है रॉकस्टार.

पिछले दो सालों में हिन्दी फ़िल्मों में उनका संगीत उनके नाम से जुड़ी अपेक्षाओं पर पूरा ख़रा नहीं उतरा और ऐसा लग रहा था कि अन्तर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स और फ़िल्मों के सामने हिन्दी फ़िल्मों को कम तरजीह दे रहे हैं रहमान. बीते दिनों में संगीत निर्देशकों में कई नये-पुराने नामों ने रहमान की इस खोई ज़मीन पर स्थान बनाने की कोशिश की है. रॉकस्टार में संगीत फ़िल्म का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है इस कारण भी रहमान की प्रतिभा, प्रशंसकों और आलोचकों की कसौटी पर है.

फ़िल्म एक गायक की ज़िंदगी का बायोग्राफिकल अकाउंट है. गायक से रॉक स्टार बनने और बाद में पतन और विघटन के सफ़र की कहानी में संगीत नायक के साथ कहानी के मुख्य किरदार के रूप में उपस्थित है. फ़िल्म, निर्देशक इम्तियाज़ अली और नायक रनबीर कपूर के लिये भी अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है और उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होने की पूरी सम्भावना रखती है.

बात करें संगीत एलबम की तो रॉकस्टार में अलग अलग रंगों के कुल 14 ट्रैक्स हैं. रहमान के संगीत को बोल दिये हैं इरशाद कामिल ने. मोहित चौहान एलबम में नायक रनबीर के मुख्य स्वर हैं.

मोहित के स्वरों में ‘फिर से उड़ चला’ से एलबम को एक ख़ुशनुमा शुरुआत मिलती है. पहाड़ों में किसी गांव से गिटार के तारों के सुर सुनाई देते हैं, एक महत्वाकांक्षी गायक के सपनों की उड़ान की बात करता ये सरल सा गीत सुनने वाले को अपने प्रवाह में बहा ले जाता है. रहमान एक सरल सी शानदार शुरुआत के बाद गीत को इलेक्ट्रोनिक संगीत और टैक्नो लूप की चिर परिचित दुनिया में ले आते हैं लेकिन गीत का बहाव और असर बरकरार रहता है.

‘जो भी मैं कहना चाहूं’ में रहमान एक लाइव रॉक कान्सर्ट का माहौल रचते है. फ़िल्म में नायक के रॉक स्टार बनने के संगीत सफ़र के किसी महत्वपूर्ण पड़ाव का संकेत है ये गीत. इरशाद कामिल के बोल गीत को असरदार बनाने में सहयोग करते हैं. मोहित चौहान ने कान्सर्ट सिंगिंग के अपने अनुभव का पूरा उपयोग किया है.

‘कुन फ़ाया कुन’ एलबम की सबसे ख़ूबसूरत प्रस्तुति है. रहमान, जावेद अली और मोहित चौहान के स्वरों में ये गीत कुछ देर के लिये सुनने वाले को अध्यात्म के संसार में स्थापित कर देता है. रहमान का आध्यात्मिक रूझान, गीत को एक फ़िल्मी गीत से कहीं ऊपर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एक ‘जॉनर’ जो फ़िल्मी गीतों में लगभग गायब सा हो चुका है, रहमान ने अपनी विशिष्ट प्रस्तुतियों से ज़िंदा रखा हुआ है. रहमान, जावेद अली और मोहित चौहान तीनों ही गायकों ने डूब के गाया है ये गीत. इरशाद क़ामिल ने क़ुरान के उद्धरण के साथ कुछ ख़ूबसूरत बोल दिये हैं ‘सजरा सवेरा मेरे तन बरसे, कजरा अन्धेरा, तेरी जलती लौ, क़तरा मिला जो तेरे दर पे.. मौला’. रॉक के वाद्यों के शोर से दूर सिर्फ़ हारमोनियम, तालियों और कोरस के उपयोग से गीत बहुत सुकून देता है.

हर्षदीप कौर का गाया ‘कतिया करूं’ एलबम को एक अलग ही रंग देता है. इम्तियाज़ अली की फ़िल्म में वैसे भी पंजाबी लोक गीत की अनिवार्य मौजूदगी रहती है . पारम्परिक पंजाबी लोकगीत पर आधारित ये गीत पहले भी कई गायक गा चुके हैं लेकिन हर्षदीप के स्वरों में ‘कतिया करूं’ का हुक ख़ूबसूरत बन पड़ा है. रहमान के वाद्य संयोजन में प्रेम के रंग है, मेले की मस्ती है, उत्सव का माहौल है.

रॉकस्टार में जिस गीत के हर नोट (सुर) पर ‘चार्ट बस्टर’ लिखा है वो है ‘साड्डा हक़, ऐत्थे रख’. गीत को निर्विवादित रूप से साल का ’एन्थम’ कहा जा सकता है. गीत में जोश है, रवानी है, उन्माद है. विद्रोही तेवर के इस कान्सर्ट गीत का नारा नायक के गुस्से का प्रतीक है और रहमान की धुन सुनने वालों की ज़ुबान पर गीत को चढ़ाने में सहायक होगी. ‘साड्डा हक़’, रॉकस्टार एलबम का सच्चा प्रतिनिधि गीत है, नायक के स्टार से एक ‘आईकॉन’ बनने का प्रतिनिधित्व करता हुआ.

‘शहर में हूं मैं तेरे’ एलबम की एक हल्की-फुल्की प्रस्तुति है. एक स्टुडियो गीत है, संगीत रचना और रेकॉर्डिंग की प्रक्रिया के आस पास बुना गया है. ये गीत नायक के संगीत सफ़र के शुरुआती पड़ाव का ज़िक्र करता है. नायक की आवाज़ के लिये मोहित चौहान का चयन एलबम का एक बहुत महत्वपूर्ण पक्ष है, फ़िल्म के अलग-अलग गीतों में उनकी आवाज़ और अलहदा अंदाज़, नायक के गायकी के सफ़र के अलग अलग दौर को बख़ूबी पेश करता है.

‘हवा हवा’ एक और अच्छी प्रस्तुति है एलबम की, चैकोस्लोवाकिया की एक प्रसिद्ध लोक कथा ‘स्लीपी जॉन’ पर आधारित गीत में रहमान ने अन्तर्राष्ट्रीय जिप्सी संगीत को आधार में रखा है. पर्दे पर कुछ मज़ेदार प्रस्तुति की उम्मीद है इस गीत से, रनबीर पर बहुत दारोमदार होगा कि गीत के असर को पर्दे पर कितनी बेहतरीन ढंग से पेश कर पाते हैं.

‘तुम को’ से कविता सुब्रह्मन्यम (कृष्णामूर्ति) की आवाज़ बहुत दिनों के बाद रहमान के संगीत मे सुनाई दी है. कविता वैसे भी आजकल फ़िल्मों में कम ही सुनाई देती हैं. ‘तुम को’ को कविता ने अपने स्वरों से गहराई देने की पूरी कोशिश की है, फिर भी रहमान की धुन बहुत कुछ उनके पुराने गीतों की याद दिलाती है. मोहित चौहान और सुज़ैन के गाये ‘तुम हो’ में भी रहमान के पुराने टैम्प्लेट को देखा जा सकता है. हालांकि मोहित ने ‘और हो’ में दर्द के स्वर बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किये हैं.

‘ओ नादान परिंदे घर आजा रे’ एलबम की थोड़ी कमज़ोर प्रस्तुति है. गीत में लोकप्रिय होने के सभी तत्व मौजूद हैं फिर भी गायकी में गहराई की कमी है. बोल अच्छे बन पड़े है लेकिन गीत के बीच में बाबा फ़रीद का प्रसिद्द छंद ‘कागा सब तन खाईयो’ बिना वजह ठूंसा सा लगता है.

रहमान ने देखा जाए तो ‘रॉकस्टार’ के संगीत से बॉलीवुड में वापसी की है. इसके अतिरिक्त उनके संगीत में भी अकॉस्टिक्स की वापसी देखी जा सकती है जिसने एलबम का असर बढ़ाने मे बहुत योगदान दिया है.

साउंडट्रैक में दो इन्स्ट्रूमैंटल ट्रैक्स भी हैं जिनमें ‘द डाइकोटॉमी ऑफ़ फ़ेम’ उल्लेखनीय है. रहमान ने शहनाई का फिर से बहुत ख़ूबसूरत उपयोग किया है, और काउंटरपाइंट के रूप में गिटार का प्रयोग इसको और प्रभावी बनाता है. इसके अतिरिक्त शम्मी कपूर को पर्दे पर शहनाई बजाते देखना एक सुखद अनुभव साबित हो सकता है.

ए आर रहमान ने रॉकस्टार के संगीत को ऐसे इन्द्रधनुषी रंगों में सजा कर एलबम प्रस्तुत किया है जिसके एक छोर पर अगर ‘साड्डा हक़’ में जोश और आक्रोश का उन्माद है तो दूसरे छोर पर ‘कुन फ़ाया कुन’ में अध्यात्म की सुकून भरी दुनिया रची है और बीच में खुशी, मस्ती, उत्सव, प्रेम, विरह, दर्द और उदासी के रंगों का संगीत पैलेट अपने रंग बिखेरता नज़र आता है.

रॉकस्टार साल की सबसे बेहतरीन प्रस्तुतियों मे निस्संदेह रूप से शामिल होगी. संगीत फ़िल्म के बारे में भी बहुत सम्भावनाएं जगाता है, लेकिन रहमान के पिछले रिकार्ड को देख के ये भी डर बनता नज़र आ रहा है कि संगीत के सामने फ़िल्म कमज़ोर साबित ना हो.

रॉकस्टार से रहमान ने अपना कद और बढ़ा लिया है और पिछले दो सालों में जो संगीतकार उनके समकक्ष खड़े होने की कोशिश कर रहे थे, रहमान के सामने फिर से बौने नज़र आने लगे हैं.

रेटिंग के लिहाज़ से रॉकस्टार के संगीत एलबम को 4/5 (पांच मे से चार).

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