संगीत समीक्षा: टेल मी ओ ख़ुदा

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Image caption टैल मी ओ ख़ुदा का निर्देशन ऐशा की मां हेमा मालिनी ने किया है.

‘टेल मी ओ ख़ुदा’, हेमा मालिनी के निर्देशन में नई फ़िल्म है. ऐशा देओल के ठंडे पड़े करियर के लिये ये एक रीलांच फ़िल्म कही जा सकती है. फ़िल्म की कहानी एक अनाथ लड़की के अपने पिता को खोजने के सफ़र पर आधारित है जो कुछ वर्ष पूर्व हॉलीवुड की म्यूजिकल-कॉमेडी ‘मामा मिया’ से प्रेरित लगती है.

फ़िल्म में संगीत दिया है प्रीतम ने और उनके साथ मेहमान संगीतकार के रूप में साजिद-वाजिद, अभिजीत हेगड़े पाटिल और जॉर्ज थियोफ़ेनस एक-एक गीत के साथ उपस्थित हैं. फ़िल्म में हेमा मालिनी के सह-निर्देशक मयूर पुरी फ़िल्म में मुख्य गीतकार हैं.

‘टेल मी ओ खुदा’ फ़िल्म का शीर्षक गीत है जिसे मेहमान संगीतकार साजिद-वाजिद ने संगीतबद्ध किया है. सुनिधि चौहान के स्वरों में, नवीनता के अभाव में ये गीत बहुत प्रभावित नहीं करता. पिछले सालों में इस तरह के कई गीत गा चुकी हैं सुनिधि, उन सब के मुकाबले फ़ीका है ये गीत. साजिद-वाजिद के वाद्य संयोंजन में अरेबियन संगीत की थोड़ी छाप है, लेकिन धुन बहुत पुरानी सी है इसलिये असर नहीं छोड़ पाता. ख़ुदा ही नहीं, आम संगीत रसिकों तक भी इस आधुनिक प्रार्थना का पहुंचना असम्भव सा लगता है.

‘नग़मा कोई गुनगुनाने का’ एलबम की एक ठीक-ठाक सी प्रस्तुति है श्रेया घोषाल के स्वरों में. प्रीतम का वाद्य संयोजन अच्छा बन पड़ा है और श्रेया भी अपनी मधुर आवाज़ से गीत को थोड़ा सुनने लायक बनाने में योगदान देती हैं.

एलबम के जिस गीत में थोड़ा बहुत लोकप्रिय होने की गुंजाइश है वो है ‘समवन समबडी’. सुनिधि यहां अपने अंदाज़ और गायकी से थोड़ा रंग जमाने में क़ामयाब रही हैं. अभिजीत हेगड़े ने रूटीन से ही संगीत रचना दी है लेकिन पर्दे पर सलमान ख़ान की मेहमान उपस्थिति कि वजह से गीत लोगों को कुछ आकर्षित करने में क़ामयाब हो, इसके संगीत में तो इतनी ताकत नहीं है. अनुष्का मनचंदा के स्वरों में इसका रीमिक्स वर्शन डिस्को-थैक्स में कुछ दिन तक सुनाई दे सकता है.

फ़िल्म की कहानी राजस्थान, तुर्की और गोआ में मुख्य तौर पर आधारित है तो यहां एक गीत प्रीतम ने राजस्थानी रंग में रंगा है ‘मेरा मन जबसे’ . श्वेता पंडित के मुख्य स्वर हैं जबकि राजस्थानी लोक गीत को बाबू खां लंगा और साथियों ने स्वर दिये हैं. श्वेता पंडित के स्वरों में रोमांटिक ट्रैक, प्रसिद्ध राजस्थानी गीत गोरबंद के साथ समाहित किया है. श्वेता पंडित के हिस्से में प्रीतम के चिर परिचित रोमांटिक टैम्प्लेट का ही दुहराव नज़र आता है जो गीत का असर कम करता है.

एलबम में एक थोड़ा अलग रंग का गीत है ‘लव यू डैड’, अदिति और अनुपम के स्वरों में. फ़िल्म में ऐशा देओल, पिता धर्मेन्द्र के साथ पर्दे पर पहली बार आ रही हैं. फ़िल्म के कथानक का महत्वपूर्ण हिस्सा होने की वजह से पर्दे पर कुछ गुंजाइश रखता है ये गीत, पर एलबम में एक संगीत रचना के रूप में ज़्यादा प्रभावित नहीं करता ये गीत.

‘मिले ना मिले तू’ डांस-फ़्लोर्स के लिये एक कस्टमाइज़्ड रचना है. जॉर्ज थियोफ़ेनस की ये संगीत रचना बहूत रूटिन सा एक डांस गीत लगता है. हो सकता है ये गीत कुछ दिनों फ़िल्म के प्रोमोस में दिखे, मगर उससे ज़्यादा चलने की गुंजाइश नहीं रखता. एक बिलकुल साधारण सी रचना है ये.

कुल मिलाकर ‘टेल मी ओ खुदा’ के संगीत में नवीनता का अभाव है. फ़िल्म की स्टारकास्ट की तरह संगीत भी ‘डेटेड’ प्रतीत होता है. फ़िल्म के लिये प्रचार का ज़रूरी आधार बनाने में अब तक नाकाम रहा है.

रॉक स्टार और रा.वन की धूम के सामने वैसे भी कहीं नज़र नहीं आने वाला इसका संगीत और फ़िल्म के रीलीज़ के बाद भी फ़िल्म के बाहर कहीं सुनाई देगा इसमें संदेह है.

रेटिंग के लिहज़ से ‘टेल मी ओ खुदा’ के संगीत को 2/5 (पांच में से दो)

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