'सिनेमा समलैंगिकता के प्रति जागरूकता ला सकता है'

  • 19 अक्तूबर 2011
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Image caption 'आई एम' में समलैंगिक संबंधों को भी दिखाया गया था.

भारतीय सिनेमा में हर तरह की फ़िल्में बनती आई हैं लेकिन सम्लैंगिक संबंधो पर बनी फिल्में गिनी चुनी ही हैं. मुंबई में चल रहे 13वें मुंबई फ़िल्म फ़ेस्टिवल यानी 'मामी' में आयोजित किया गया एक फोरम जहां समलैंगिकों पर चर्चा की गई.

समलैंगिक संबंधों पर दो फ़िल्में, 'माई ब्रदर निखिल' और 'आईएम' बना चुके फ़िल्मकार ऑनिर मानते हैं कि भारत में सिनेमा एक बेहद सशक्त माध्यम है और सिनेमा के ज़रिए लोगों में समलैंगिकता के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है.

ऑनिर कहते हैं, ''सिनेमा से, फ़िल्मों से आप आम लोगों को ये एहसास दिला सकते हैं की समलैंगिकता में कुछ गलत नहीं है, ये एक आम बात है. आपको अपनी फ़िल्मों के माध्यम से लोगों को समलैंगिकता को स्वीकार करना सीखाना होगा.''

ऑनिर की ही तरह एक और फ़िल्मकार हैं तरुण मनसुखानी जिन्होंने 'दोस्ताना' बनाई थी. हालांकि दोस्ताना में समलैंगिकता को गंभीर तरीके से पर्दे पर नहीं दिखाया गया था.

इस फोरम के दौरान जब तरुण से पूछा गया कि क्या समलैंगिकता पर फ़िल्म बनाने में इंडस्ट्री साथ देती है, तो वो बोले, ''इंडस्ट्री का साथ था तभी तो दोस्ताना बन पाई और अब मैं दोस्ताना 2 बना रहा हूं. मैं चाहता हूं कि दोस्ताना 2 को मैं दोस्ताना से एक नहीं बल्कि दो कदम आगे ले जाऊं.''

दोस्ताना 2 पर रोशनी डालते हुए तरुण कहते हैं कि इस फ़िल्म को देख कर भी कुछ लोग हसेंगे, तो कुछ लोंगो को गुस्सा आएगा तो कुछ लोग इस फ़िल्म द्वारा दिए जा रहे सन्देश को भी समझेंगे.

'मामी' में आयोजित किए गए इस फोरम के बारे में तरुण कहते हैं, ''समलैंगिकों के प्रति जागरूकता लाने के लिए उठाया गया हर क़दम बहुत ज़रूरी है. हर तरह का फोरम, हर तरह कि फ़िल्म स्क्रीनिंग ज़रूरी है. लोगों की पसंद नापसंद अपनी जगह है, लेकिन अगर वो समलैंगिकों पर आधारित फ़िल्में देखते हैं तो कम से कम वो उन लोगों के बारे में कुछ न कुछ ज़रुर जान पाएंगे.''

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