हम भी अगर बच्चे होते...

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Image caption दर्शील कहते हैं हर बच्चे को अपनी पढाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए.

बचपन के साथ एक शब्द जो अपने आप ही जुड़ जाता है वो है शरारत. आपने हमने सभी ने अपने बचपन में ढेरों शरारतें की हैं, कुछ में पकड़े गए तो कुछ शरारतों को करने के बावजूद बाल-बाल बच गए.

यूं तो बचपन की शरारतों को याद करने का कोई एक दिन या कोई एक पल नहीं हो सकता लेकिन बाल दिवस के मौके पर बीबीसी ने बात की टीवी और फिल्मों से जुड़े़ कई नन्हें कलाकारों से और जाना कि किस शरारत को करने के बाद वो बाल-बाल बच गए.

'तारे ज़मीन पर' से लोकप्रियता के आसमान को छूने वाले बाल कलाकार दर्शील सफारी ने बीबीसी के साथ बाटीं अपनी एक शरारत. दर्शील कहते हैं, ''एक बार मैं और मेरे दोस्त पटाखे छोड़ रहे थे, और मैंने के रॉकेट उड़ाया, वो रॉकेट पड़ोस के एक घर में जा घुसा. घर में से एक आंटी ने झाका और वो पूछने लगी कि ये रॉकेट किसने छोड़ा है. हम सब बच्चे वहां से भाग गए. अगर उस दिन वो हमें पकड़ लेती तो ज़रूर मेरे घर में मेरी शिकायत पहुंच जाती. उस दिन सच में मैं बाल-बाल बच गया.''

बाल दिवस के मौके पर दर्शील बाकि बच्चों से कहते हैं, ''जितनी भी शरारत करनी है करो लेकिन आपकी शरारत से किसी को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए. पढ़ाई मन लगा के करो क्योंकि भारत प्रगति के पथ पर अग्रसर है. और आनेवाले सालों में भारत को पढे़-लिखे लोगों की ज़रुरत होगी. और हम अपनी पढ़ाई से देश की प्रगति में भागी बन सकते हैं.''

साथ ही दर्शील ये भी कहते हैं कि अपने आस-पास के वातावरण को शुद्ध और हरा-भरा रखें.

दर्शील जिनती ही लोकप्रिय हैं बालिका वधु से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली आनंदी यानी के अविका गौड़. अब टीवी पर भले ही अविका जिनती भी गंभीर और संवेदनशील भूमिका निभाती हो लेकिन असल ज़िन्दगी में वो भी एक आम बच्चे की ही तरह हैं. अविका कहती हैं उनके दोस्त उन्हें किसी स्टार के नज़रिए से नहीं देखते और न ही किसी टीचर से उन्हें इसलिए छुट मिलती है कि वो टीवी पर आती हैं.

अपनी एक शरारत को याद करते हुए अविका कहती हैं, ''एक बार मैंने स्कूल में एक टीचर को बड़ा ही सताया. मैंने उनकी टेबल के आस-पास, उनकी कुर्सी पर यहां तक कि जिस डिब्बे में चौक रखते हैं उसमे भी कीड़े मरने की दावा छिड़क दी थी. टीचर बड़ी परेशान हो रही थी, क्योंकि उनके आस-पास की हर जगह से, उनके हाथों से उस दावा की बदबू आ रही थी. लेकिन टीचर को ये नहीं पता था कि ये शरारत किसकी है. उस दिन तो मैं बाल-बाल बच गई.''

ऐसी ही एक शरारत की ‘कृष’ और टचैन खुली की मैं खुली’ जैसी फ़िल्मों में अभिनय कर चुके ज़ैन खान ने भी. ज़ैन कहते हैं, ''एक बार क्लास में सब बच्चे मिलकर टीचर को चिड़ा रहे थे, ये बात टीचर को पता चल गई, लेकिन उन्हें ये नहीं पता चला कि असल में इसकी शुरुआत किसने की है. अगर उस दिन हमारी शरारत पकड़ी जाती तो पक्का हम सब को सज़ा मिलती.''

बाल दिवस हर साल 14 नवंबर को भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु के जन्मदिन पर मनाया जाता है.

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