बच्चों के मुद्दों से है लगाव-आमिर ख़ान

  • 30 नवंबर 2011
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बच्चों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ़ के ब्रैंड एम्बैसडर बने आमिर ख़ान कहते हैं कि उन्हें बच्चों से जुडे़ मुद्दों से भावनात्मक लगाव है

यूनिसेफ़ ने बुधवार को बॉलीवुड अभिनेता आमिर ख़ान को भारत में अपना ब्रैंड एम्बैसडर बनाया.

बच्चों के विषय पर आधारित ‘तारे ज़मीं पर’ जैसी फ़िल्म बना चुके आमिर ख़ान भारत में बच्चों में कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगे.

इस मौक़े पर दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में आमिर से सवाल पूछा गया कि क्या वो ब्रैंड एम्बैसडर की भूमिका निभाने के लिए अपने आप को लाय़क मानते हैं. इस सवाल के जवाब में आमिर ने कहा, “मेरा अपने आप को लाय़क मानना और ना मानना कोई मायने नहीं रखता. मायने रखता है कि क्या यूनिसेफ़ मुझे लायक़ मानता है और क्या सरकार मुझे लाय़क मानती है. मैं अपनी तारीफ़ करुँ ये माइने नहीं रखता.”

अमिर ने कहा कि बच्चों से जुडे मुद्दों से उन्हें लगाव रहा है और वो इस तरह की भूमिका के अलावा भी बच्चों से जुडे़ मुद्दे उठाते रहे हैं.

आमिर कहते हैं, “मैंने ‘तारे ज़मी पर’ फ़िल्म बनाई जो कि बच्चों से जुड़ी हुई थी. मेरे लिए ऐसी फ़िल्म करना ज़रुरी नहीं था, मैं कोई और फ़िल्म भी बना सकता था लेकिन मैंने ये फ़िल्म इसलिए की क्योंकि मुझे ऐसे विषयों से भावनात्मक लगाव है. मुझे लगता है कि मेरे पास काफ़ी कुछ है कंट्रीब्यूट करने को.”

आमिर ने कहा, “लोग समझते हैं कि मैं कोई विद्वान हूँ और शहर में पढ़ा लिखा हूँ लेकिन मैं भी कुपोषण से जुड़ी कई बाते नहीं जानता था. पिछले एक साल में प्रसून जोशी की टीम और यूनिसेफ़ की टीम के साथ काम करने के बाद मैंने जाना कि असल में कुपोषण क्या है. और ये जानने की प्रक्रिया काफ़ी अच्छी रही.”

आमिर ख़ान ने कहा कि वो भारत सरकार और यूनिसेफ़ के साथ पिछले एक साल से काम कर रहे हैं और इसी दौरान उन्होंने जाना कि भारत में कुपोषण कितनी बड़ी समस्या है.

आमिर कहते हैं कि कुपोषण एक ऐसा दुश्मन है जो दिखाई नहीं देता और इसीलिए इसकी जानकारी लोगों तक पहुँचाना बहुत ज़रुरी है.

आमिर ने कहा कि ये संदेश लोगों तक पहुँचाने के लिए हर माध्यम का इस्तेमाल करेंगे. आमिर ख़ान के इस अभियान को प्रसून जोशी की एडवर्टाइज़िंग कंपनी ने डिज़ाइन किया है. इस अभियान से ज़ुड़ा ज़मीनी तैयारी

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