'अभी तो मैं जवान हूं'

  • 4 दिसंबर 2011
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Image caption देव आनंद हमेशा कहते थे कि वो जवां महसूस करते हैं.

मुख़्तलिफ़ अंदाज़, अदाकारी और ज़िंदादिली की मिसाल बन चुके देव आनंद कहते हैं कि दिल जवां हो तो उम्र कभी आड़े नहीं आती.

देव आनंद ने पिछले वर्ष अपने जन्मदिन पर बीबीसी से विशेष बातचीत की थी.

26 सितंबर को 88वें बरस में क़दम रख रहे देव आनंद ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, "मैं लगभग 60 बरस से फ़िल्म उद्योग से जुड़ा हूं लेकिन आज भी मेरा दिल युवा है. अगर मैं जवां दिल और रूमानी ख्यालात का ना होता तो फ़िल्में ना बना पाता. मैं मानता हूं कि फ़िल्म युवा लोगों का माध्यम है".

सदाबहार अभिनेता कहे जाने वाले देव आनंद मानते हैं कि ख़ुद पर और अपने सपनों पर यक़ीन ही वो ताक़त है जो आपको आगे ले जाती है.

वे कहते हैं, "जब गुरदासपुर छोड़कर मैंने मुंबई में क़दम रखा था तभी से मैं जानता था कि मुझे अभिनेता बनना है. हमें बस पता होना चाहिए कि हम जो चाहते हैं वो हम कर सकते हैं या नहीं औऱ इसका क्या नतीजा होगा. इसके बाद हमें कोई ताक़त रोक नहीं सकती".

अपनी ग़ज़ब की ऊर्जा से प्रेरित करने वाले देव साहब कहते हैं कि वह बहुत आशावादी हैं और उन्हें अपनी उम्र खुद नहीं याद रहती जब तक कोई याद ना दिलाए.

उनका कहना था, "जब मैं एक फ़िल्म बनाता हूं तो फिर मुझे दुनिया में उससे ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ लगता ही नहीं".

हिंदी सिने उद्योग को देव आनंद का एक योगदान यह भी है कि वे ज़ीनत अमान और टीना मुनीम जैसी अभिनेत्रियों को सामने लाए.

देव आनंद ने हरे रामा हरे कृष्णा में ज़ीनत को मौक़ा दिया. ज़ीनत अमान को सत्यम, शिवम्, सुन्दरम् के ज़रिए राज कपूर का साथ मिल गया और ये बात देव आनंद को कुछ ख़ास पसंद नहीं आई.

देव कहते हैं, "आप किसी के रास्ते में नहीं आ सकते लेकिन शायद मैं ज़ीनत से थोड़ी ईमानदारी की उम्मीद कर रहा था. लेकिन यही तो क़ायदा है. ज़िंदगी नाराज़गी से रूक नहीं जाती. कहीं और ले जाती है".

अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए देव बताते हैं, "हम नौ भाई बहन थे. पिताजी वकालत करते थे. अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक करने के बाद मैं पोस्ट ग्रेजुएशन करना चाहता था लेकिन पिताजी के पास इतने पैसे नहीं थे. फिर मैं मुंबई आ गया और तब से सिनेमा ही मेरी ज़िंदगी है".

'नवकेतन फ़िल्म्स' देव साहब की फ़िल्म निर्माण कंपनी है जिसने 2009 में 60 बरस पूरे किए हैं.

'मुनीम जी', 'सीआईडी', 'गाइड' जैसी बेजोड़ फ़िल्में देने वाले देव आनंद को फाल्के रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

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