'युवा कलाकार समझते हैं अपनी जिम्मेदारी'

  • 14 दिसंबर 2011
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Image caption शबाना की आने वाली फिल्में हैं 'मिडनाईटस चिल्ड्रन' और 'द रिलक्टन्ट फन्डमेन्टलिस्ट'

अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्त्ता शबाना आज़मी का कहना है कि आज हिंदी सिनेमा में जितने भी युवा कलाकार हैं वो किसी न किसी सामाजिक मुद्दे से जुड़े़ हुए हैं. वो कहती हैं कि ये सभी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों से भली भांति वाकिफ़ हैं और उन्हें पूरा भी करते हैं.

शबाना कहती हैं, ''सलमान ख़ान खुद अपनी सामाजिक संस्था चलाते हैं, आमिर ख़ान भी कई सामाजिक मुद्दों से जुड़े़ हैं, शाहरुख़ ख़ान भी चैरिटी करते हैं. हृतिक रोशन भी ऐसे कई मुद्दों से जुड़े़ हैं और खुले दिल से वो लोगों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.''

नौजवानों का पक्ष लेते हुए शबाना आज़मी कहती हैं, ''अक्सर लोग युवाओं पर ये आरोप लगाते हैं कि उन्हें अपने आस-पास के समाज से कुछ लेना देना नहीं है, किसी चीज़ की फ़िक्र नहीं है, वो बस अपनी ही धुन में रहते हैं, स्वार्थी हैं किसी सामाजिक मुद्दे से जुड़ते नहीं हैं लेकिन मैं इस बात से इतेफ़ाक नहीं रखती.''

शबाना अपने पैत्रिक गांव मिजवां में एक सामाजिक संस्था चलाती हैं. इस संस्था के 'गुडविल अम्बैसेडर' हैं रणबीर कपूर. शबाना कहती हैं, ''जब मैंने रणबीर को बताया कि भारत की 50 फीसदी आबादी 25 वर्ष की आयु से कम है और जब-जब भी कोई बदलाव आया है हमेशा युवा पीढ़ी ही आगे रही है और हमारी संस्था की ओर युवा पीढ़ी का ध्यान आकर्षित करने के लिए उनसे अच्छा और कोई चेहरा हो ही नहीं सकता, तो वो तुरंत मान गए.''

शबाना आज़मी का ये भी मानना है कि कला को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए. शबाना कहती हैं, ''सिर्फ मैं ही नहीं मेरे अब्बा कैफ़ी आज़मी और मेरी अम्मी शौक़त आज़मी भी यही मानते थे कि कला को समाज में बदलाव लाने के लिए एक हथियार के रूप में प्रयोग में लाया जाना चाहिए.''

शबाना कहती हैं कि सिनेमा एक बहुत अच्छा माध्यम है और फ़िल्मों के ज़रिए समाज में बदलाव लाया जा सकता है. वो कहती हैं, ''आजकल कई फ़िल्मकार ऐसे हैं जो सामाजिक मुद्दों पर फ़िल्में बना रहे हैं और इनके ज़रिए समाज में जाग्रति लाने की कोशिश भी कर रहे हैं.''

फ़िल्मों की अगर बात करें तो शबाना जल्द ही दीपा मेहता की 'मिडनाईटस चिल्ड्रन' और मीरा नायर की 'द रिलक्टेन्ट फन्डामेन्टलिस्ट' में नज़र आएंगी.

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