अमिताभ के लिए अब 'गर्ल चाइल्ड'

  • 16 दिसंबर 2011
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Image caption अमिताभ कहते हैं वो अपनी पोती को भी पोलियो की ख़ुराक पिलाने ले जाएंगे.

अमिताभ बच्चन पिछले एक दशक से भारत में बच्चों के लिए काम करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था 'यूनिसेफ़' के 'गुडविल अम्बैसेडर' हैं और पोलियो उन्मूलन से जुड़े हैं. भारत में पोलियो उन्मूलन कैम्पेन की सफलता के बाद 'यूनिसेफ़' चाहता है कि अमिताभ अब उनके 'गर्ल चाइल्ड' कैम्पेन से भी जुडें.

मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमिताभ ने कहा, ''फ़िलहाल तो 'यूनिसेफ़' की ओर से मेरी जिम्मेदारी सिर्फ पोलियो की है. हाल ही में 'यूनिसेफ़' ने मुझ 'गर्ल चाइल्ड' और कन्या भ्रूण हत्या के बारे में भी लोगों को जागरूक करने का अनुरोध किया है.''

'यूनिसेफ़' के पोलियो कैम्पेन की सफलता के बारे में बताते हुए अमिताभ ने कहा, ''2011 में भारत में सिर्फ एक ही पोलियो का केस सामने आया है और वो भी पश्चिम बंगाल से जो कभी भी पोलियो का गढ़ नहीं रहा है. मुझे ख़ुशी इस बात की है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में पोलियो का कोई केस सामने नहीं आया.''

अमिताभ कहते हैं, ''इस सफलता का श्रेय मुझे नहीं जाता. 'यूनिसेफ़' की पूरी टीम को जाता है, जिन्होंने रात-दिन पोलियो उन्मूलन के लिए काम किया है. मैं तो बस इस टीम का हिस्सा हूं.''

अमिताभ कहते हैं जब उन्हें 'यूनिसेफ़' का अम्बैसेडर बनाया गया था तो उनके दिल में बस एक ही बात थी. वो कहते हैं, ''मेरे दिल में बस यही था कि मेरे देश में किसी भी तरह की बीमारी ना हो और मेरा देश स्वस्थ रहे और बस इस लक्ष्य को ध्यान में रख कर हम सबने काम करना शुरू किया.''

अमिताभ ये भी बताते हैं कि पोलियो उन्मूलन अभियान में उन्हें शुरू में इतनी सफलता नहीं मिली. और तब 'यूनिसेफ़' ने सोचा कि उन्हें टीवी पर पोलियो से जुड़े अमिताभ बच्चन वाले विज्ञापनों का सुर बदलना होगा इसलिए जहां शुरुआती कैम्पेन में अमिताभ लोगों से अपने बच्चों को पोलियो बूथ ले जाने की गुज़ारिश करते थे, वहीं नए विज्ञापनों में वो लोगों को अपने बच्चों को पोलियो बूथ ना ले जाने के लिए डांटने लगे.''

अमिताभ बच्चन की ये डांट काम आई. अमिताभ कहते हैं, ''यूनिसेफ़ द्वारा किए एक सर्वे से उन्हें पता चला की लोग अपने बच्चों को पोलियो बूथ इसलिए ले गए क्योंकि मैं उनसे नाराज़ था और उन्हें डांट लगा रहा था.''

अमिताभ कहते हैं 'दो बूँद ज़िन्दगी की' का पाठ वो सिर्फ दूसरों को ही नहीं पढ़ाते बल्कि निजी ज़िन्दगी में भी प्रयोग में लाते हैं. अमिताभ कहते हैं, ''हाल ही में हमारे घर भी एक बच्ची का जन्म हुआ है. हम उसे भी पोलियो की दो बूँद ख़ुराक ज़रूर पिलाएंगे.''

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