दसवीं में फ़ेल हुए,पिता ने दी दावत

  • 4 जनवरी 2012
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एक बार मेरे पिताजी मुझे एक मंहगे होटल में लेकर गए, जहां हम तीन-चार महीनों में एक बार ही जाते थे.

पिताजी ने अपने लिए और मेरे लिए खाना मंगवाया और खाने के बाद मुस्कुराते हुए बिल दे दिया.

मैंने अपने पिताजी से पूछा, “क्या आपका प्रोमोशन हुआ है.”

मेरे पिताजी ने कहा नहीं.

फिर मैंने अपने पिताजी से कहा, “क्या आपने रिश्वत ली है.”

उनका जवाब फिर ना था.

मैंने पूछा, “ये तो बताइए कि आख़िर हुआ क्या है”

तो मेरे पिताजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम दसवीं कक्षा में फ़ेल हो गए हो.”

मैंने आश्चर्यचकित होकर कहा,“और आप जश्न मना रहे हैं.”

मेरे पिताजी ने कहा, “मैं तुम्हारी असफलता का जश्न मना रहा हूँ ताकि ज़िदगी में जब कभी भी तुम असफल हो तो चिंता मत करना.”

दसवीं कक्षा में फ़ेल होने वाले ये छात्र थे बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर और इस वाक़्ये ने अनुपम खेर के दिल से असफलता के डर को हमेशा के लिए निकाल दिया.

अनुपम खेर ने ये वाक़्या मुंबई में अपनी किताब “द बेस्ट इन यू इज़ यू” के विमोचन के मौक़े पर सुनाया.

अनुपम खेर ने अपनी ज़िदगी के कई पहलुओं से प्रेरणा लेते हुए इस किताब को लिखा है. हिन्दी फ़िल्म जगत के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन ने इस किताब का विमोचन किया.

इस मौक़े पर अमिताभ ने कहा,“अनुपम के व्यक्तित्व के बारे में बात करने के लिए इस तरह का मौक़ा शायद कम पड़े,उनके बारे में बात करने के लिए मुझे कई दिन चाहिए.”

अपनी किताब के शीर्शक के बारे में अनुपम कहते हैं, “आज की दुनिया में जब आपको सब डराने की कोशिश में लगे हुए हैं. आज की दुनिया की मार्केटिंग आपको हर पल अहसास करवाती रहती है कि आप से बेहतर कई और है. आप कितनी भी बड़ी सफलता हासिल कर लें वो कम है. तो मुझे लगता है कि आपको ताक़त अपने आप से ही मिल सकती है क्योंकि अगर आपके अंदर एक कायर है तो आपके अंदर ही एक बहादुर इंसान भी है.”

इस मौक़े पर अनुपम खेर की पत्नी किरन खेर भी मौज़ूद थी.

किरन खेर ने कहा, “ अनुपम को मैं तब से जानती हूँ जब हम सिर्फ़ दोस्त हुआ करते थे. जब कभी मैं भावनात्मक रुप से कमज़ोर महसूस करती थी, तब वो ही मेरा मनोबल बढ़ाते थे. तो मुझे लगता है कि इस तरह की किताब लिखने के लिए अनुपम ही उपयुक्त हैं.”

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