संगीत समीक्षा - एक दीवाना था

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Image caption 'एक दीवाना था' 17 फरवरी को रिलीज़ हो रही है.

करीब दो वर्ष पूर्व तमिल सिनेमा में एक युवा प्रेम कहानी ने काफ़ी धूम मचाई थी, निर्देशक गौतम वासुदेव मेनन की ये फ़िल्म थी ‘विन्नईथन्डी वरुवाया’ (वीटीवी). फ़िल्म की सफ़लता में इस प्रेम कथा के प्रस्तुतिकरण के अतिरिक एआर रहमान के संगीत ने बहुत बड़ा योगदान दिया था.

इसी प्रेम कहानी को गौतम मेनन अब हिन्दी में लेकर आ रहे हैं ‘एक दीवाना था’ शीर्षक से. इस फ़िल्म में भी संगीत एआर रहमान का ही है जबकि गीतों को हिन्दी शब्दों में ढालने का ज़िम्मा जावेद अख्तर को दिया गया है, जो इससे पहले रहमान के साथ कई यादगार रचनाएं दे चुके हैं. चूंकि तमिल ‘वीटीवी’ का संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ था और रहमान प्रशंसकों के बीच एक ‘कल्ट’ प्रतिष्ठा हासिल कर चुका है, इसलिए हिन्दी वर्ज़न को लेकर बहुत उत्सुकता है.

एलबम में कुल 12 ट्रैक हैं, जिनमें से सात ट्रैक मूल तमिल फ़िल्म के ही गीतों का हिन्दी रूपान्तर हैं, तीन अतिरिक्त ट्रैक थीम और वाद्य संगीत के हैं और एक गीत रहमान ने हिन्दी फ़िल्म के लिये विशेष रूप से नया रचा है.

रहमान के स्वरों में एलबम को एक अच्छी शुरुआत मिलती है ‘क्या है मुहब्बत’ से, जो फ़िल्म का एक थीम गीत प्रतीत होता है. रहमान की धुन सरल है और उनकी गायकी गीत के लिए उचित वातावरण बनाने में सहयोग देती है लेकिन गीत के बोल साधारण हैं और गीत का प्रभाव कम करते हैं. ‘मुहब्बत’ के विषय को लेकर रचे गए इस गीत में बहुत सम्भावनाएं थीं मगर औसत कथ्य की वजह से ये गीत पूरा प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहता है.

एलबम की जो रचना सबसे लोकप्रिय होने का माद्दा रखती है वो है ‘होसाना’. तमिल फ़िल्म में भी ये गीत बहुत पसंद किया गया था. एक खुशनुमा सा प्रेम गीत है जिसे लिओन डी’सूज़ा और सुज़ैन डी’मैलो ने स्वर दिये हैं. रहमान की धुन खूबसूरत बन पड़ी है और लिओन और सुज़ैन की गायकी गीत के रंग जमाने में अपना योगदान प्रदान करती है.

तमिल ‘वीटीवी’ में जिस गीत ने प्रेम की तीव्र अनुभूति से सुनने वालों के दिलों को छुआ था वो था मलयाली गीत ‘आरोमले’. हिन्दी गीत में ‘आरोमले’ शब्द को गीत में बरकरार रखते हुए नया गीत रचा गया है जिसे स्वर मूल गीत के गायक अल्फोन्सो जोसेफ ने ही दिये हैं. रहमान का वाद्य संयोजन गिटार की स्ट्रमिंग के आधार के साथ बेहतरीन है. हिन्दी वर्ज़न, मूल वर्ज़न के मुकाबले फ़ीका सा लगता है. अल्फोन्सो का उच्चारण कहीं कहीं पर बहुत अखरता है, खासकर ‘शुभ शुभ’ को ‘शुभ्भ शुभ्भ’ कहना गीत का मज़ा ख़राब करता है. जावेद अख्तर के बोल भी मूल वर्ज़न की खूबसूरती के नज़दीक नहीं हैं. सौन्दर्य प्रतीकों से सजे इस गीत में ‘मदिर’ की बजाय ‘मधिर’ का गलत उपयोग भी अखरता है.

मूल फ़िल्म में श्रेया घोषाल के स्वरों में ‘आरोमले’ का पार्श्व-थीम की तरह से प्रभावी ढंग से प्रयोग किया गया था, जिसने पर्दे पर फ़िल्म के दृश्यों का प्रभाव बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी.

‘एक दीवाना था’ एलबम में ‘ब्रोकन प्रोमिस’ के नाम से ट्रैक को जगह मिली है. लगभग चार मिनट के ट्रैक में श्रेया अपनी मधुर गायकी से बिना बोलों के भी एक सुनने लायक रचना प्रस्तुत करती हैं.

‘फूलों जैसी है ये लड़की’ हिन्दी में एक निराशाजनक प्रस्तुति है. मूल तमिल फ़िल्म में बेनी दयाल ने ‘ओमना पन्ने’ में जो रंग जमाया था वो यहां गायब सा है. जावेद अख्तर के बोल भी नर्सरी कविता के स्तर के लगते हैं. गीत में धुन और वाद्य संयोजन प्रभावी हैं लेकिन बोल और गायकी की कमज़ोरी की वजह से औसत सी प्रस्तुति साबित होती है.

‘शर्मिंदा हूं’ एलबम की एक और ठीक-ठाक सी प्रस्तुति है, जिसे मधुश्री ने अपने स्वरों से खूबसूरती से प्रदान करने की कोशिश की है. मूल तमिल फ़िल्म में गीत श्रेया घोषाल ने गाया था और मधुश्री अपनी गायकी से उनकी कमी का अहसास होने नहीं देतीं. मधुश्री के साथ गीत में एआर रहमान के स्वर भी हैं जो गीत का असर बढ़ाने में योगदान देते हैं. जावेद अख्तर के बोल यहां बाकी गीतों के मुकाबले ठीक हैं लेकिन निरन्तरता का कमी है. रहमान ने इस गीत में डॉ. अल्लामा इक़बाल के मशहूर गीत ‘सितारों से आगे जहां और भी हैं’ को भी कॉयर के स्वरों में प्रस्तुत किया है.

‘ज़ोहरा-ज़बीं’ जावेद अली के आवाज़ में एक और प्रस्तुति है. जावेद अली के स्वरों का सॉफ़्ट रोमांटिक रचना में रहमान ने अच्छा उपयोग किया है.

एलबम की अगली प्रस्तुति है ‘सुन लो ज़रा’ रशीद अली और श्रेया घोषाल के स्वरों में. एक हल्का-फुल्का खुशनुमा माहौल लिए एक प्रेम गीत है. रवानी लिए हुए, थिरकाने वाले वाद्य संयोजन के साथ इसके रंग युवा श्रोताओं को पसंद आ सकते हैं फिर भी बहुत ज्यादा दिनों तक याद रखे जाने का माद्दा नहीं रखता ये गीत भी.

संजीव थॉमस और टिम्मी के स्वरों मे ‘जैसी ड्राइव मी क्रेज़ी’ एक साधारण सी रचना है और ज्यादा असर नहीं छोड़ती.

एलबम में दो वाद्य संगीत के ट्रैक्स ‘मोमेन्ट्स इन केरल’ और ‘जैसीज़ लैंड’ बहुत खूबसूरत बन पड़े हैं. रहमान का वाद्य संयोजन बेहतरीन है और फ़िल्म में निश्चित रूप से असरदार साबित होंगे ये ट्रैक्स.

‘एक दीवाना था’ का संगीत एक महत्वपूर्ण तथ्य रेखांकित करता है कि आज के दौर में भी शब्दों को नज़र-अंदाज़ करके सिर्फ़ संगीत के दम पर कोई एलबम अपना प्रभाव नहीं छोड़ सकता खासकर एक इंटेंस प्रेमकथा में.

मूल तमिल फ़िल्म के संगीत के मुकाबले इसका संगीत कमज़ोर है. रहमान की धुनें और संयोजन एलबम के लिए एक अच्छा आधार बनाने में सक्षम रही हैं लेकिन जावेद अख्तर अपने बोलों से निराश करते हैं. अन्त में ‘एक दीवाना था’ गुंजाइश के बावजूद एक औसत प्रयास साबित हुआ है और एलबम से जो अपेक्षाएं जुड़ी थीं उस पर खरा नहीं उतरा है.

रेटिंग के लिहाज़ से रहमान का संगीत ज्यादा का अधिकारी है लेकिन सम्पूर्ण प्रभाव में कमज़ोर बोलों से अपना असर खोता है इसलिये ‘एक दीवाना था’ के संगीत को 2.5/5 (पांच मे से ढ़ाई)

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