तेरे नाल लव हो गया: कैसा है संगीत

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फ़रवरी में वैलेंटाइन डे का मौसम आते-आते बॉलीवुड पर भी प्रेम का बुखार चढ़ने लगता है.

पिछले कुछ वर्षों में निर्माता इस दिन को लक्ष्य बना कर रोमांटिक कॉमेडी फ़िल्मों का निर्माण कर रहे हैं.

इस वर्ष भी इस मौसम में कुछ रोमांटिक फ़िल्में आ रही हैं, जिसमें ’एक मैं और एक तू’ और ’एक दीवाना था’ के साथ एक और फ़िल्म उल्लेखनीय है, रितेश देशमुख और जेनेलिया डी’सूज़ा अभिनीत ’तेरे नाल लव हो गया’.

करीब आठ वर्ष पूर्व इसी किस्म की रोमांटिक-म्यूज़िकल-कॉमेडी फ़िल्म आई थी ’तुझे मेरी कसम’, जिसमें दो ताज़े चेहरों ने बॉलीवुड में दस्तक दी थी.

रितेश देशमुख और जेनेलिया की वही जोड़ी आठ साल बाद फिर ’तेरे नाल लव हो गया’ का मुख्य आकर्षण है. हालांकि दोनों ही नाम एक आशाजनक शुरुआत के बाद बॉलीवुड मे अभी तक अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्षरत हैं.

इस किस्म की फ़िल्मों में संगीत की एक महत्वपूर्ण भूमिका रहती है.

’तेरे नाल लव हो गया’ में संगीत दे रही है सचिन-जिगर की प्रतिभाशाली जोड़ी, जो पिछले साल शोर और फ़ालतू जैसी फ़िल्मों के लोकप्रिय संगीत से अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं.

’वारी जावां - पिया रे पिया’, पाँच मुख्य और छह रीमिक्स ट्रैक्स से सजे इस एलबम की सबसे बेहतरीन प्रस्तुति है.

सचिन-जिगर, प्रीतम के स्कूल से निकले हुए संगीतकार हैं और उनके संगीत में प्रीतम के संगीत की झलक दिखाई देती है.

’पिया रे पिया’ की धुन और वाद्य संयोजन पर भी उसी टैम्प्लेट की एक कड़ी नज़र आती है. श्रेया घोषाल और आतिफ़ के स्वर गीत को एक ख़ूबसूरत रोमांटिक वातावरण देने में सफल हुए हैं.

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’जीने दे’ मोहित चौहान के स्वरों में एक और बेहतर रचना है. शब्दों में ज़्यादा गहराई नहीं है, फिर भी मोहित अपनी गायकी से गीत को सुनने लायक बनाते हैं. धुन और संयोजन पर फिर से ’सुने हुआ सा गीत’ का असर है.

फ़िल्म की कहानी का बहुत सा हिस्सा हरियाणा और पंजाब में आधारित है और उस रंग से रंगे दो गीत इस एलबम का हिस्सा है.

पंजाबी लोक संगीत ने वैसे तो फ़िल्म क्षेत्र में पिछले डेढ़ दशक में अपनी धाक जमा रखी है, पर हरियाणवी लोक संगीत, मुख्य धारा के हिन्दी सिनेमा में अमूमन उपेक्षित ही रहा है.

दिलजीत और प्रिया पंचाल के स्वरों में ’जट पी-पा हो गया’ पर टैक्नो पंजाबी रंग चढ़े हुए हैं. एक मज़ेदार गीत की गुंजाइश थी लेकिन अंत में एक फ़ंक्शनल गीत साबित होता है.

एक और गीत जिसके संगीत, शब्दों, और गायकी में हरियाणा के लोक संगीत की छाप देखी जा सकती है, वो है, ’छोरे मैं तेरी फ़ैण बन गई’. एक मज़ेदार गीत है जहां सुनिधि अपनी गायकी से गीत में रंग जमाती हैं.

’कजरारे’से बॉलीवुड में जिस रोड साइड ढाबा आइटम गीतों के चलन की शुरुआत हुई थी, उसी की अगली कड़ी है ये गीत. कैलाश खेर सुनिधि के स्वरों के सामने दबे से नज़र आते हैं और केवल सहयोगी भूमिका निभाते नज़र आते हैं. पर्दे पर कुछ मज़ेदार क्षण देने की संभावना रखता है ये गीत.

एक और गीत है ’तू मुहब्बत है’, अतीफ़ असलम और मोनाली ठाकुर के स्वरों में. बहुत साधारण सी रचना है और इस तरह के गीत पिछले दो वर्षों में बहुतायत में सुनाई दिए हैं, इसलिये बहुत असर नहीं छोड़ पाता ’तू मुहब्बत है’.

’तेरे नाल लव हो गया’ के संगीत में सचिन-जिगर अपनी संभावनाओं के मुताबिक तो नज़र नहीं आते फिर भी फ़िल्म के माहौल के मुताबिक फ़िल्म के लिये फ़ंक्शनल संगीत देने में कामयाब रहे हैं. निराशा इस बात की नहीं कि उनके संगीत में प्रीतम के प्रचलित टैम्प्लेट की झलक बहुत नज़र आती है, बल्कि इससे है कि ये जोड़ी खुद उस टैम्प्लेट से बाहर आने का प्रयास करती नहीं दिखती. कम से कम ’तेरे नाल लव हो गया’ का संगीत इसी बात को इंगित करता है.

रेटिंग - 2/5 (पाँच मे से दो)

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