संगीत समीक्षा - कहानी

  • 15 फरवरी 2012
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Image caption कहानी 9 मार्च को रिलीज़ हो रही है.

बॉलीवुड में जहां एक ओर इन दिनों रॉम-कॉम फ़िल्मों की बारिश हो रही है, कुछ फ़िल्मकार लीक से हटकर नई और अनूठे विषयों की फ़िल्मों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराने की कोशिश कर रहे हैं.

फ़िल्मकार सुजॉय घोष की आने वाली फ़िल्म ‘कहानी’ भी एक ऐसा प्रयास है जिसमें विद्या बालन एक गर्भवती महिला का मुख्य किरदार कर रही हैं जो कोलकाता शहर में अपने पति की तलाश में दिन रात एक कर रही हैं.

‘कहानी’ कोलकाता में उसकी खोज और संघर्ष की दास्तां है. फ़िल्म में संगीत विशाल-शेखर का है जो सुजॉय घोष की पहली म्यूज़िकल ‘झंकार बीट्स’ से अब तक हर फ़िल्म में संगीत की ज़िम्मेदारी निभाते आए हैं. विशाल डडलानी ने एलबम में गायक और गीतकार की भूमिका भी निभाई है।

‘आमी शोत्ति बोलछी’ एलबम को एक ज़ोरदार शुरुआत देता है. कोलकाता शहर को फ़िल्म में एक मुख्य किरदार के रूप में प्रस्तुत किया गया है. ये गीत उसी किरदार के लिए परिचय गीत है और कोलकाता शहर के कई चेहरे प्रस्तुत करता है. हालांकि विशाल-शेखर का ट्रीटमेंट बहुत कुछ ‘नो वन किल्ड जैसिका’ के ‘काट कलेजा दिल्ली’ की याद दिलाता है फिर भी ऊषा उत्थुप अपनी गायकी से गीत को विशिष्ट तेवर देने में सफ़ल हुई हैं. विशाल डडलानी के बोल भी कोलकाता शहर का बहुरंगी कोलाज खूबसूरती से पेश करते हैं. जैज़ और रॉक के मेल से विशाल-शेखर कोलकाता के किरदार को ना सिर्फ़ एक अनूठी और मनोरंजक श्रद्धांजलि देने में सफ़ल हुए हैं वरन रिलीज़ से पहले प्रोमोज़ के लिए फ़िल्म का चेहरा प्रस्तुत करने में सफ़ल हुए हैं जो अब तक फ़िल्म के बारे में उत्सुकता जगाने में सफ़ल रहा है.

पाकिस्तानी गायक जावेद बशीर के स्वरों में संदीप श्रीवास्तव का लिखा गीत ‘पिया तू काहे रूठा रे’ एलबम की एक और उल्लेखनीय प्रस्तुति है. विशाल-शेखर दुहराव से बचते हुए यहां अपने प्रयोगवादी रंग में नज़र आए हैं और हाई वोल्टेज रॉक आधारित आधुनिक वाद्य संयोजन के बीच जावेद बशीर की मंझी हुई उप-शास्त्रीय गायकी के फ़्यूज़न को बेहतर ढंग से पेश करने में सफ़ल हुए हैं. मंदिर के मंजीरे/घंटियों से गीत को एक अलग माहौल मिलता है जो फ़िल्म के महत्वपूर्ण प्रसंगों का गवाह हो सकता है.

सन 2012 की शुरुआत में अली ज़फ़र, हादिया कियानी, सनम मार्वी के बाद जावेद बशीर की हिन्दी फ़िल्मों में इस प्रस्तुति से संकेत मिलते हैं कि अदनान सामी, राहत फ़तेह अली खान और अतिफ़ असलम के बाद पाकिस्तानी गायकों की एक नई कतार बॉलीवुड में अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराने के लिए तैयार है.

केके और विशाल डडलानी के स्वरों में ‘कहानी’ फ़िल्म का थीम गीत कहा जा सकता है. परिवर्तन के तौर पर विशाल-शेखर ने इसे सॉफ़्ट टोन दी है. पार्श्व में विशाल डडलानी के सहयोगी स्वर गीत का असर बढ़ाते हैं. मुख्य किरदार के नज़रिए से एक अजनबी शहर में अनजानी सी तलाश के सफ़र की दास्तां विशाल के सरल से बोल बखूबी बयान करते हैं.

गीत एक और वर्ज़न में है जिसे श्रेया घोषाल ने स्वर दिए हैं और उनकी मधुर प्रस्तुति पुरुष स्वर प्रधान एलबम को एकरसता का शिकार होने से बचाती है. श्रेया के वर्ज़न में हल्के से गिटार का साथ गीत को प्रभावी बनाने में अपना योगदान देता है.

सुखविंदर के स्वरों में ‘तोरे बिना’ एलबम की अगली प्रस्तुति है. अन्विता दत्त के बोलों पर सुखविंदर अपनी गायकी से कुछ असर जमाते हैं फिर भी धुन और वाद्य संयोजन इंडी-रॉक के जाने पहचाने से धरातल का आभास देता है और नवीनता के अभाव में गीत बहुत असर नहीं छोड़ता है.

एलबम की एक खास प्रस्तुति है अमिताभ बच्चन के स्वरों में गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर की कालजयी रचना ‘एकला चालो रे’. गीत फ़िल्म के मुख्य किरदार के सफ़र के संघर्ष को समर्पित लगता है और साथ में कोलकाता और बंगाल को एक और श्रद्धांजलि भी है.

पिछले सौ सालों में इस गीत को स्वयं गुरुदेव से लेकर किशोर कुमार और सुचित्रा मित्रा से लेकर श्रेया घोषाल तक अनेकोंनेक गायकों ने अलग-अलग वर्ज़न में गाया है और अमिताभ बच्चन उन स्वरों की अगली कड़ी हैं. वैसे अमिताभ ने गीत के साथ उचित न्याय किया है, लेकिन युवा पीढ़ी तक पहुंचने के लिए गीत के मूल स्वरूप में अंग्रेज़ी बोल और आधुनिक वाद्य संयोजन को जोड़ा गया है. अमिताभ के स्वरों में अनप्ल्गड वर्ज़न शायद ज्यादा असरदार साबित हो सकता था. फिर भी गीत अच्छा बन पड़ा है.

कुल मिलाकर विशाल-शेखर ‘कहानी’ जैसे चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट में अपने संगीत से उम्मीदों पर खरे उतरे हैं. अपनी पिछली फ़िल्मों से स्थापित दायरे से थोड़ा आगे निकलने की कोशिश नज़र आती है विशाल-शेखर के इस एलबम में. संगीत फ़िल्म के कथानक और माहौल में रचा-बसा सा लगता है. सुजॉय, विशाल-शेखर के इस प्रयास को फ़िल्म में कितनी बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर पाते हैं अब ये उनकी रचनाधर्मिता पर निर्भर करता है.

रेटिंग के लिहाज़ से कहानी के संगीत को 3/5 (पाँच में से तीन).

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