ग़ालिब का तीसरा मुलाज़िम मैं-गुलज़ार

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जाने माने गीतकार गुलज़ार कहते हैं कि वो अपने आप को मशहूर उर्दू शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का मुलाज़िम मानते हैं. इतना ही नहीं वो तो यहां तक कहते हैं कि वो ग़ालिब की पेंशन ले रहे हैं जो ख़ुद ग़ालिब नहीं ले पाए.

गुलज़ार ने ये बातें मिर्ज़ा ग़ालिब के ख़तों पर आधारित एलबम 'तेरे बयां ग़ालिब' के लॉन्च के मौक़े पर कही.

गुलज़ार ने कहा, "ग़ालिब के यहां तीन मुलाज़िम थे. एक वफ़ादार थी जो तुतलाया करती थी. एक कल्लन थे जो बाहर का सौदा सब्ज़ी लाते थे. ग़ालिब की बोतलें संभालते थे. तीसरा मुलाज़िम मै हूं. वो सारे तो वक़्त के साथ रिहाई पा गए. मैं अभी तक ग़ालिब की मुलाज़मत में हूं."

गुलज़ार कहते हैं कि ग़ालिब पर सीरियल तो हो चुका लेकिन उस सीरियल को आगे बढ़ाने की तमन्ना हम सबकी थी. ग़ालिब का कहा हुआ इतना कुछ है. और इसमें उनकी ग़ज़लें ही शामिल नहीं उनके द्वारा लिखा गया गद्य भी शामिल है.

एलबम के बारे में गुलज़ार कहते हैं, "इस एलबम में ग़ालिब साहब के कुछ ख़त हैं और कुछ ग़ज़ले हैं जिन्हें जगजीत सिंह साहब ने गाया है."

ग़ौरतलब है कि गुलज़ार ने 80 के दशक के आख़िर में मिर्ज़ा ग़ालिब के जीवन पर आधारित एक टेलीविज़न धारावाहिक बनाया था जिसमें मिर्ज़ा ग़ालिब का किरदार नसीरुद्दीन शाह ने अदा किया था.

गुलज़ार कहते हैं कि मेरे पास तीन इंसान थे जिनकी वजह से मैं ग़ालिब सीरियल का निर्माण कर पाया. एक जगजीत सिंह, एक नसीरुद्दीन शाह और एक ख़ुद ग़ालिब, जिनके बारे में सोचकर मुझे हौसला मिलता रहा.

गुलज़ार कहते हैं कि उन्हें एक ऐसे कॉन्सेप्ट की तलाश थी जो ग़ालिब धारावाहिक से आगे इस सिलसिले को बढ़ा सके.

गुलज़ार कहते हैं, "सलीम आरिफ़ साहब के पास इसका एक कॉंन्सेप्ट था, जिसको वो स्टेज पर ग़ालिबनामा के नाम से किया करते थे. इसीलिए हमने सलीम साहब से कहा कि आप हमें निर्देशित करें और जैसे जैसे आप हमें निर्देशित करेंगे हम वैसे वैसे करेगें और इसी तरह ये एलबम 'तेरा बयां ग़ालिब' हमने बनाई है."

गुलज़ार कहते हैं कि उन्हें इस एलबम से उम्मीदें भी हैं और कई बार उन्हें कुछ मायूसी भी हो जाती हैं कि ये पीढ़ी ग़ालिब को जानेगी? या ग़ालिब कहते रहेंगे, 'कि पूछते हैं कि वो ग़ालिब कौन है, कोई बतलाओ कि हम बतलाएं क्या.'

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