दर्शकों और सिनेमा के बीच भावनात्मक लगाव नहीं-दिलीप कुमार

  • 19 फरवरी 2012
दिलीप कुमार

मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार मानते हैं कि मौजूदा दौर में दर्शक, सिनेमा और कलाकारों के साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस नहीं करते.

दिलीप कुमार के मुताबिक़, "आज के समय में दर्शकों और सिनेमा का वो भावनात्मक रिश्ता नहीं है, जो 50 और 60 के दशक में हुआ करता था. शायद इसकी वजह ये है कि उस दौर में सिर्फ़ सिनेमा ही मनोरंजन का साधन हुआ करता था और लोग इसे काफ़ी गंभीरता से लिया करते थे."

89 वर्षीय दिलीप कुमार को 'डायलॉग्स ऑफ़ देवदास' नाम की एक किताब के लॉन्च में हिस्सा लेना था, लेकिन ख़राब सेहत की वजह से वो इस समारोह में नहीं आ पाए.

उन्होंने अपने विचार एक ख़त के ज़रिए भेजे, जिन्हें इस समारोह में अभिनेता शाहरुख़ ख़ान ने पढ़कर सुनाया.

'डायलॉग्स ऑफ़ देवदास' की लेखिका नसरीन मुन्नी कबीर हैं. इस किताब में बिमल रॉय की देवदास के डॉयलॉग्स का संग्रह है. ये संवाद मशहूर लेखक राजिंदर सिंह बेदी ने लिखे थे.

ग़ौरतलब है कि दिलीप कुमार ने ही 1955 में बिमल रॉय के निर्देशन में देवदास में काम किया था. साथ ही शाहरुख़ ख़ान ने भी 2002 में संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी देवदास में मुख्य भूमिका निभाई थी.

इस मौक़े पर शाहरुख़ ख़ान ने कहा कि उनकी मां को लगता था कि वो दिलीप कुमार जैसे दिखते हैं.

शाहरुख़ के मुताबिक़, "मेरी मां चाहतीं थीं कि मैं भी दिलीप कुमार बनूं. ये अलग बात है कि मैं उनके जैसा नहीं बन पाया, और मैं ही क्या, दिलीप साहब जैसा तो कोई भी नहीं बन सकता."

शाहरुख़ ने इस मौके पर ये भी कबूल किया कि 'देवदास' का रोल करना उनकी एक भूल थी. वो कहते हैं कि आज अगर उनके सामने ये प्रस्ताव आता तो शायद वो ये कभी नहीं करते.

शाहरुख़ के मुताबिक़, "मेरे मां-बाप को दिलीप कुमार वाली देवदास बहुत पसंद आई थी, शायद इस वजह से मेरा इस किरदार के प्रति भावनात्मक लगाव था. और उस वक्त मैं थोड़ा अपरिपक्व था जब मैंने ये फ़िल्म की, लेकिन दिलीप कुमार का आशीर्वाद मेरे साथ था, इसलिए मैं ये फ़िल्म कर गया."

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