मेरी फ़िल्मों में होता है अंगप्रदर्शन- महेश भट्ट

  • 22 मार्च 2012
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फ़िल्मकार महेश भट्ट अपनी साफगोई और बेबाक बातों के लिए जाने जाते हैं. बीबीसी से अपनी आने वाली ब्लडमनी के बारे में बात करते हुए महेश भट्ट ने कई बातें बड़ी ईमानदारी से कबूल कीं.

अक्सर ही उन पर आरोप लगता है कि उनकी फ़िल्मों में काफी अंगप्रदर्शन होता है. इसका जवाब देते हुए महेश भट्ट कहते हैं, "लोग बिलकुल सही फरमाते हैं. मेरी फ़िल्म में दर्शकों को आकर्षित करने के लिए अंगप्रदर्शन होता है. मैंने कभी इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा है."

लेकिन साथ में महेश भट्ट अपनी तरफ से एक सवाल खड़ा करते हैं. वो कहते हैं, "ये बताइए कि लोगों को आज इंटरनेट पर क्या उपलब्ध नहीं है. वो जो देखते हैं उसकी तुलना में तो हमारी फ़िल्में बड़ी साफ सुथरी होती हैं."

महेश भट्ट ने ये भी बताया कि हिंदी सिनेमा 'स्टार कल्चर' से जूझ रहा है. वो कहते हैं, "जब कलाकार किरदार से बड़ा हो जाता है तो फ़िल्म के कथानक के साथ बड़ा अन्याय होता है. और हिंदी फ़िल्मों में आजकल यही दिक्कत है. हम सितारा केंद्रित फ़िल्में बनाते हैं, किरदार केंद्रित नहीं."

महेश भट्ट ने कहा कि वो कभी सितारों पर निर्भर नहीं रहे हैं और हमेशा उन्होंने नए चेहरों को मौका दिया है.

महेश भट्ट से जब पूछा गया कि एक निर्देशक के तौर पर उन्होंने सारांश, अर्थ, दिल है कि मानता नहीं और हम हैं राही प्यार के जैसी साफ़ सुथरी और अच्छी फ़िल्में दी हैं जिनमें नायक सीधा सादा और शरीफ़ होता है. जबकि अब एक निर्माता के तौर पर उनकी फ़िल्मों जैसे जिस्म, मर्डर, जन्नत और राज़ जैसी फ़िल्मों का नायक नकारात्मक क्यों होता है. इसके जवाब में महेश भट्ट ने कहा, "वक्त बदला है. लोगों की सोच बदली है. अब ग्रे शेड्स वाला नायक नई पीढ़ी के बीच ज़्यादा असर छोड़ता है. इसलिए हमारी फ़िल्मों का नायक ऐसा होता है."

महेश भट्ट की बतौर निर्माता आ रही फ़िल्म 'ब्लड मनी' 30 मार्च को रिलीज़ हो रही है. इसमें कुणाल खेमू और अमृता पुरी की मुख्य भूमिका है.

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