मराकश में दिल तोड़ आए सैफ़

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Image caption जयपुर की तरह गुलाबी है मराकश

जयपुर और मोरोक्को के ऐतिहासिक शहर मराकश में एक समानता है. दोनों शहरों में इमारतें गुलाबी हैं. जयपुर को तो 'पिंक सिटी' कहा जाता है जबकि मराकश को अहमर या रेड सिटी के नाम से भी जाना जाता है.

ऐसा क्यों है इसका किसी के पास जवाब नहीं. मराकश में जहाँ तक नज़र जाती है वहाँ गुलाबी इमारत दिखाई देती हैं. सरकारी इमारतें हों यह निजी दफ्तर या फिर आम लोगों के घर, सभी गुलाबी रंग से रंगे हैं.

यहाँ विश्व भर से पर्यटक आते हैं और अधिकतर लोग शहर के पुराने इलाके में रहना पसंद करते हैं, जिसे यहाँ मदीना के नाम से जाना जाता है.

मदीना और पुरानी दिल्ली का माहौल मिलता-जुलता है. यहाँ संपेरे, फुटपाथ पर छोटी-छोटी दुकानें और खाने पीने की दुकानें दिल्ली की याद ताज़ा करते हैं.

यहाँ की पुरानी इमारतें और तंग गलियाँ पुरानी दिल्ली से काफी मिलती जुलती हैं. यहाँ के होटलों को रियाध कहते हैं, जो कई सौ साल पुराने हैं . ये पुरानी हवेलियों के अंदर होते हैं.

मैं भी यहाँ के एक रियाध में तीन दिनों के लिए रुका. यहाँ रहने पर एहसास होता है कि सदयों पहले भी इन इमारतों में मुसाफिर आकर इसी तरह से रहा करते होंगे जैसे मैं रह रहा हूँ. रियाध की एक दिलचस्प बात यह है कि यहाँ आपको अपने कमरे के दरवाज़े पर ताला लगाने की ज़रुरत नहीं.

यहाँ दुकानों में बॉलीवुड की फ़िल्में आसानी से मिल जाती हैं. लोग अपनी दुकानों पर हिंदी गाने सुनते दिखाई देते हैं. एक जूस की दूकान का मालिक ग्राहकों को जूस पिलाते समय अपनी थकान ज़ोरदार आवाज़ में हिंदी गाने सुनकर दूर कर रहा था.

पास ही खाने-पीने की एक दूकान वाला यूट्यूब पर हिंदी गानों के वीडियो के मज़े ले रहा था. यह मंज़र तो मैंने कभी मुंबई की दुकानों पर भी नहीं देखा था.

इस शहर के लोग बॉलीवुड की फिल्मों के कारण भारत के प्रति काफी अच्छी राय रखते हैं. हिंदी फिल्मों के निर्माता और निर्देशक यह सपने में भी नहीं सोच सकते कि उनकी फ़िल्में इस शहर के लोगों पर कितना गहरा असर छोडती हैं.

इंसानियत का सबक़

एक फ़ूड स्टाल के एक वेटर ने मुझे बताया कि वह भारत से बहुत प्यार करता है क्योंकि उसे हिंदी फिल्मों के ज़रिए यह पता चला कि हिन्दू मुस्लिम सिख और इसाई एक साथ मिल-जुलकर कितनी ख़ुशी से देश में रहते हैं. उसने कहा मजहब उसकी ज़िन्दगी में अहम नहीं है, इंसानियत सबसे ऊपर है जिसकी सीख उसे हिंदी फिल्मों से मिली है.

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Image caption अब्दुल्लाह ने अपनी बेटी को भी बॉलीवुड का दीवाना बना दिया है

अब्दुल्लाह नाम का यह व्यक्ति पिछले पचीस सालों से बॉलीवुड की फ़िल्में देख रहा है. और कई हिंदी गाने उसे ज़बानी याद हैं जिन्हें वह अच्छी तरह गाता भी है. और तो और, उसने अपनी पत्नी और पाँच वर्षीय बेटी को भी हिंदी फिल्मों का दीवाना बना दिया है.

उसकी साली मज़ाक में कहती है कि जब उसकी बहन की शादी अब्दुल्लाह से हुई तो उसे लगा अब्दुल्लाह एक हिंदुस्तानी है क्योंकि वो हमेशा बॉलीवुड की बातें करता रहता था.

बॉलीवुड और भारत के इस दीवाने को उस वक़्त एक ज़बरदस्त झटका लगा जब हाल में सैफ अली खान और उनकी गर्लफ्रेंड करीना कपूर मराकश घूमने आए.

वह मदीना के भीड़भाड़ वाले इलाके का मज़ा ले रहे थे, जब वे अब्दुल्लाह के फ़ूड स्टाल के निकट आए तो अब्दुल्लाह ने उन्हें फ़ौरन पहचान लिया और ख़ुशी के मारे उन्हें उसने जोर से सलाम किया, मगर कोई जवाब नहीं मिला.

दूसरी बार सलाम ठोका लेकिन फिर भी कोई जवाब नहीं मिला. तीसरी बार में उसे समझ में आया कि छोटे नवाब उसे नज़रअंदाज़ कर रहे हैं.

अब्दुल्लाह का दिल टूट गया लेकिन उसका बॉलीवुड और भारत के प्रति प्यार नहीं डगमगाया. उसने कहा कि सैफ मग़रूर निकला लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बोलीवुड के सभी कलाकार घमंडी हैं.

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