...तो मेरा बेटा भी सुपरस्टार होता: अनुपम खेर

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Image caption अनुपम खेर की आने वाली फिल्म है 'छोड़ो कल की बातें'

अभिनेता अनुपम खेर, साफ और बेबाक बातें करने के लिए जाने जाते हैं, और बीबीसी से एक खास मुलाकात में अनुपम अपने इसी चिर परिचित अंदाज में नजर आए.

उनकी आने वाली फिल्म है छोड़ो कल की बातें. इसी के बारे में बात करते करते अनुपम ने अपने निजी जीवन और फिल्मी करियर के बारे में ढेर सारी बातें की.

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके जैसे बड़े कलाकार का बेटा होने की वजह से उनके बेटे सिकंदर खेर को बॉलीवुड में अपने पैर जमाने में आसानी हुई, तो अनुपम खेर बोले, "अगर उसे आसानी हुई होती तो वो सुपरस्टार ना होता. मैंने तो किसी को पांच या 10 करोड़ रुपए देकर नहीं कहा कि मेरे बेटे के लिए फिल्म बना दो."

अब अनुपम का इशारा किसकी तरफ था, ये तो वो ही जाने लेकिन अनुपम अपने बेटे के करियर से संतुष्ट दिखे.

उन्होंने कहा कि स्थापित कलाकार बनना एक प्रक्रिया है और सिकंदर धीरे धीरे अपना काम कर रहा है. वो इस प्रक्रिया से गुजर रहा है.

अनुपम खेर से जब पूछा गया कि वो सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं. तो इस समय जो फिल्में पास की जा रही हैं, जिस तरह से फिल्मों पर द्विअर्थी संवाद और फूहड़ दृश्य होने के आरोप लग रहे हैं, उन पर क्या कहना है उनका, तो वो बोले, "देखिए मैंने एक फिल्म की थी भट्टी ऑन छुट्टी. उसमें जॉर्ज बुश और मनमोहन सिंह के नामों का जिक्र था. हमें वो हटाने को कहा गया. दूसरी तरफ डेल्ही बैली जैसी फिल्में हैं. जिनमें गालियां होती हैं. उन्हें पास किया जा रहा है. तो सेंसर बोर्ड के मौजूदा नियमों पर फिर से विचार विमर्श करने की जरूरत है."

अनुपम खेर से जब पूछा गया कि एक ओर उन्होंने सारांश जैसी अर्थपूर्ण फिल्म से अपना करियर शुरु किया तो दूसरी तरफ आगे चलकर उन्होंने विशुद्ध व्यवसायिक सिनेमा में भी काम किया, किस तरह की फिल्में करके उन्हें ज्यादा संतुष्टि मिली. अनुपम ने कहा कि वो काम में किसी तरह का विभाजन नहीं करते. काम, काम है.

"मुझे करियर की शुरुआत में काफी संघर्ष करना पड़ा तो मैं काम की अहमियत जानता हूं. मुझे किसी भी तरह के सिनेमा से कोई शिकायत नहीं है."

अनुपम के मुताबिक वो जिंदगी को पूरी तरह जीना चाहते हैं और हर एक पल का लुत्फ उठाने में यकीन रखते हैं. क्या किसी रोल को करके उन्हें अफसोस हुआ. इस पर वो बोले, "मैं अपने आपको इतनी गंभीरता से नहीं लेता, कि सोचूं अरे यार ये फलां काम मैंने क्यों किया. हां मैंने कई बेकार और फूहड़ फिल्में भी की हैं. लेकिन मुझे इसका कोई अफसोस नहीं."

उनकी सबसे मशहूर और चर्चित फिल्मों में से एक 'सारांश' का रीमेक बने तो कैसा लगेगा. अनुपम बोले, "ताजमहल तो एक ही होता है ना. सारांश का रीमेक वैसा बन ही नहीं सकता. शोले का रीमेक बना. सबने देख ही लिया कि उसका क्या हश्र हुआ."

अपनी आने वाली फिल्म छोड़ो कल की बातें के बारे में अनुपम ने कहा कि ये हल्की फुल्की गुदगुदाने वाली फिल्म है, जो यही बताती है कि जिंदगी को मजे लेकर जिओ. उसे गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है.

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