पान सिंह तोमर का वो नर्वस पत्रकार !

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Image caption ब्रजेंद्र काला ने फिल्म पान सिंह तोमर में महत्तवपूर्ण किरदार निभाया है.

फिल्म पान सिंह तोमर में इंटरव्यू करने वाला वो घबराया सा पत्रकार याद है आपको ? वही पत्रकार जो ज़मीन पर बैठकर, दीवार पर पैन - पेपर टिका कर, हकलाते हुए पान सिंह तोमर से सवाल करता है कि आप...डकैत कैसे बने ?

इस प्रतिभावान कलाकार का नाम है ब्रजेंद्र काला और जब ये बीबीसी के दफ्तर पहुंचे, तब इस रोल के बारे में और ब्रजेंद्र के बारे में मन में कई सवाल घूम रहे थे.

सुनिए ब्रजेंद्र काला से खास बातचीत

ब्रजेंद्र ने बताया "वीरप्पन से मिलने जो पत्रकार जाया करते थे, मैं उनकी खबरें पढ़ा करता था. मुझे लगता था ये लोग जा तो रहे है लेकिन इनके लौटने की क्या गारंटी है."

फिल्म के निर्देशक तिग्मांषु धूलिया ने भी ब्रजेंद्र को किरदार के बारे में बस इतना कहा था कि इस पत्रकार की हालत खराब है. बस इसके बाद एक नर्वस पत्रकार के रोल को ब्रजेंद्र ने ऐसे पकड़ा कि फिल्म में उन्हें नजरअंदाज़ करना मुश्किल हो गया.

फिल्म में मुख्यतः बुंदेलखंडी भाषा का इस्तेमाल हुआ है पर ब्रजेंद्र ने थोड़ा प्रयोग करते हुए बृज भाषा बोली है जिसमें उन्हें महारात हासिल है.

मथुरा आकाशवाणी से अपने करियर की शुरुआत करने वाले ब्रजेंद्र ने बताया किस तरह बचपन में रेडियो पर कार्यक्रम करने पर पांच रुपए की फीस ने उनका मनोबल बढ़ाया .

लगातार 18 साल तक थिएटर करने के बाद ब्रजेंद्र ने फिल्मों और टेलीविजन के लिए लिखना और अभिनय करना शुरु किया पर थिएटर के लिए ब्रजेंद्र का प्यार अभी भी बरकरार है.

ब्रजेंद्र की माने तो वो कभी मुंबई नहीं जाना चाहते थे पर शायद, मुंबई उन्हें बुला रही थी.

ब्रजेंद्र कहते हैं कि बॉलीवुड़ में हीरो बनने का पैमाना जरा अलग है. हालांकि उन्हें कई निर्देशक ऐसे मिले हैं जिन्होंने उनके दो मिनट के रोल को भी याद रखा और कहा कि आपका रोल देखकर जी नहीं भरा .

'जब वी मेट' में टैक्सी ड्राइवर का रोल हो या फिर 'हासिल' फिल्म में अखबार बेचने वाला किरदार सुग्गी हो,छोटे से छोटे रोल में भी ब्रजेंद्र का अभिनय दर्शकों को गुदगुदाता है.

ब्रजेंद्र मानते हैं कि रोल कितना भी छोटा हो, पर लगना चाहिए कि आप सीन का हिस्सा हो और बाद में लोग बोलें कि थोड़ा और होता तो मज़ा आ जाता.

ब्रजेंद्र की आने वाली फिल्म है 'जन्नत 2'. इसके अलावा 'प्रणामवालेकुम' और 'ये है मुंबई रियल लाइफ' इन दोनों ही फिल्मों में ब्रजेंद्र ने सिर्फ अभिनय बल्कि लेखन भी किया है.

ब्रजेंद्र का कहना है कि बॉलीवुड में हर तरह की फिल्में बनती है जिसमें कुछ स्टार प्रधान होती है तो कुछ किरदार पर भी केंद्रित होती हैं.

समय बदल रहा है और दर्शकों की पसंद भी . अच्छी अदाकारी के कद्रदान चाहेंगे कि ब्रजेंद्र काला जैसे कलाकार को उनके नाम से जाना जाए ना कि "पान सिंह के उस नर्वस पत्रकार" की तरह.

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