नवाजुद्दीन का गांव से कान समारोह तक का सफर

  • 27 मई 2012
नवाजुद्दीन सिद्दिकी

हिंदी फ़िल्मों में आजकल एक उभरते हुए कलाकार हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, जो मानते हैं कि कई वर्षों की जद्दोजेहद के बाद अब उनके भी दिन फिर रहे हैं.

नवाज़ुद्दीन को हाल ही में रिलीज़ हुई सुजोय घोष की फ़िल्म ‘कहानी’ में एक इंसपेक्टर के रोल में काफ़ी सराहा गया था.उससे पहले उन्होंने पीपली लाईव में भी राकेश नामक पत्रकार की भूमिका निभाई थी.

इस महीने फ़्रांस के कान फ़िल्म समारोह में भी उनकी दो फ़िल्में दर्शाई जा रही हैं. और इनकी कई फ़िल्में न्यूयॉर्क, शिकागो, और लॉस ऐंजिलस के फ़िल्म समारोहों में भी दिखाई जा रही हैं.

नवाजुद्दीन हाल ही में अपनी फ़िल्मों के प्रचार के लिए अमरीका के दौरे पर आए थे जहां उन्होंने बीबीसी से बातचीत की.

चंद साल पहले तक भी नवाज को फ़िल्मों में एक छोटा सा सीन करके ही तसल्ली करनी पड़ती थी. आज इनकी करीब 10 फ़िल्में रिलीज़ को तैयार हैं जिनमें इनकी मुख्य या अहम भूमिका है.

इसीलिए अब उनको लगता है कि उनके अच्छे दिन शुरू हो रहे हैं.

छोटे से गांव का किसान

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का फ़िल्मी सफ़र एक छोटे से गांव से शुरू होकर मुंबई की चमक दमक तक पहुंचा है.उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर ज़िले से 40 किलोमीटर दूर भुवाना नामक गांव में नवाजुद्दीन का जन्म हुआ.उनके पिता किसान हैं.

वह बताते हैं कि उनको जब फ़िल्में देखना होता था तो ईद या दिवाली के मौके पर पैसा जमा करके वह अपने गांव से शहर में जाकर फ़िल्में देखते थे.

नवाजुद्दीन ने अपनी पढ़ाई मुज़फ्फरनगर में पूरी करने के बाद थिएटर करना शुरू किया. वह बताते हैं कि छोटे मोटे नाटक करते हुए उन्हे लगा कि वह भी अभिनय कर सकते हैं.

कुछ साल बाद उन्होंने दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में प्रवेश मिला और वहीं उन्होंने अपनी कला को तराशा.फिर दिल्ली में ही वह कोई चार साल तक छोटे मोटे नाटक करके गुज़ारा करते रहे.

मायानगरी का रुख

साल 2000 में उन्होंने मुंबई का रूख किया औऱ उन्हे उम्मीद थी कि वहां जल्द ही अच्छा काम मिल जाएगा.

लेकिन ऐसा न हुआ. टीवी सीरियलों में भी उनको काम नहीं मिलता था.

नवाजकहते हैं, “मुंबई में करीब पांच साल तक मुझे बहुत संघर्ष करना पड़ा. टीवी प्रोडक्शन हाउस के चक्कर काटते रहे. अपनी फोटो हर जगह देते रहे. लेकिन कोई रोल देने को तैयार ही नहीं था क्यूंकि भिखारी का रोल करने के लिए भी उन्हे छह फ़ुट का जवान चाहिए था. मैं साधारण-सा दिखने वाला व्यक्ति. उन लोगों को हीरो मटिरियल की तलाश रहती.”

फिर नवाजने फ़िल्मों में काम ढूंढना शुरू किया.

और कुछ फ़िल्मों जैसे सरफ़रोश और मुन्नाभाई एमबीबीएस में एक एक सीन के रोल मिलने भी लगे. उन्होंने ये सोचकर रोल किए कि शायद एक सीन से दो सीन फिर और कोई बड़ी भूमिका हाथ लगेगी

लेकिन जल्द ही नवाजको लगा कि अब उन्हे सिर्फ़ एक सीन के ही रोल के लिए बुलाया जाने लगा है. तब उन्होंने तय किया कि अब वह एक सीन का रोल नहीं करेंगे.

एक वक्त का खाना

नवाजबताते हैं कि मुंबई में संघर्ष का यह ऐसा समय था कि वह एक समय खाना खाते तो दूसरे समय के लाले पड़ जाते. उन्होंने कई बार हार मानने की सोची और सब कुछ छोड़कर वापस गांव जाने का सोचा. लेकिन फिर याद आता कि वह गांव क्या मुंह लेकर जाएंगे.

नवाजकहते हैं, “अगर मैं वापस जाता तो गांव में सब मज़ाक उड़ाते कि ‘बड़ा बन रहा था, हीरो बनने गया था, वापस आ गया.’ तो वापस गांव जाने का विचार मैंने छोड़ ही दिया था. मुझे कोई और काम आता भी नहीं था तो कुछ और कर भी नहीं सकते थे. लेकिन मैंने सोच लिया था कि अब मरना जीना मुंबई में ही होगा.”

इस बीच फ़िल्मकार अनुराग कश्यप ने उनका एक नाटक दिल्ली में देखा और उन्हें अपनी फ़िल्म ब्लैक फ़्राईडे में काम दिया जिससे उन्हे अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिला.

उसके बाद फ़िराक, न्यूयॉर्क और देव डी जैसी फ़िल्मों में काम मिला.

वह कहते हैं, “लेकिन समस्या ये हुई कि न्यूयॉर्क फ़िल्म के बाद कई फ़िल्मों के रोल के लिए बुलाया गया लेकिन सभी या तो गुंडे या आतंकवादी के रोल थे. तो मुझे कई रोल से इंकार करना पड़ा.” फिर उन्हे पीपली लाईव में भी थोड़ा बेहतर रोल मिला और सुजोय घोष की ‘कहानी’ में उनका काम सराहा गया.

अनुराग कश्यप का साथ

Image caption नवाज भविष्य में पतंग, मानसून शूटआउट और देख इंडियन सर्कस जैसी फ़िल्मों में दिखेंगे.

अब नवाजुद्दीन अनुराग कश्यप की तीन नई फ़िल्मों में भी काम कर चुके हैं. 'गैंग्स ऑफ़ वासीपुर' और अशीम अहलूवालिया की 'मिस लवली' में नवाजुद्दीन ने अहम भूमिका निभाई है.

और यs दोनो फ़िल्में इस महीने फ़्रांस के कांस फ़िल्म फ़ेस्टीवल में भी दिखाई जा रही हैं.

इसके अलावा आमिर खान औऱ करीना कपूर के साथ ‘तलाश’फ़िल्म में नवाजकी अहम भूमिका है. ये फ़िल्म नवंबर में रिलीज़ होनी है. तलाश से नवाजको काफ़ी उम्मीद है क्यूंकि यह एक मुख्यधारा की फ़िल्म है.

इनके अलावा पतंग, लायर डाईस, मानसून शूटआउट, देख इंडियन सर्कस जैसी फ़िल्में भी रिलीज़ होने वाली हैं.

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