चारों तरफ महंगाई है, फिर भी हम शंघाई हैं !

निर्देशक दिबाकर बनर्जी की फिल्म आठ जून को रिलीज होगी इमेज कॉपीरइट pr
Image caption शंघाई में अभय देओल और इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में है

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और राजनीतिक उठा-पटक वाले माहौल के बीच निर्देशक दिबाकर बैनर्जी की फिल्म शंघाई सिनेमाघर में अपनी बारी का इंतजार कर रही है.

दिबाकर मानते हैं कि हर देश में बदलाव आता है और यही बदलाव इस फिल्म की प्रेरणा है.

अभय देओल, इमरान हाशमी, कल्कि कोचलिन अभिनीत फिल्म शंघाई एक राजनैतिक थ्रिलर है पर बीबीसी से एक खास बातचीत में दिबाकर ने ये साफ किया कि इस फिल्म में ना तो राजभवन या राजनेता दिखाई देंगे और ना ही शंघाई शहर. शंघाई वो सपना है जिसे भारत के हर शहर को दिखाया जाता है.

चारों तरफ महंगाई है, फिर भी हम शंघाई हैं - वर्तमान स्थिति को इस एक लाइन में समझाते हुए दिबाकर ने बताया कि शंघाई की कहानी भारत के उन शहरों की कहानी है जहां एक तरफ तो फ्लाईओवर और बड़ी बड़ी इमारतों की चकाचौंध है तो दूसरी तरफ पेट्रोल और सब्जी जैसी आधारभूत जरुरतों के लिए भी आम आदमी को संघर्ष करना पड़ता है.

लेकिन इन्हीं संघर्षों में एक रोमांच छुपा है जो भारतीयों को कुछ कर दिखाने के लिए प्रेरित करता है.

सकारात्मक लड़ाई

परदेस से जल्दी बोर हो जाने वाले दिबाकर मानते हैं कि विदेशों में भारत जैसी उत्तेजना और रोमांच की कमी है और शंघाई के माध्यम से भारत की इसी उत्तेजना को दिखाने की कोशिश की गई है जहां अच्छे बुरे हर किस्म के बदलाव के साथ देश आगे बढ़ रहा है.

दिबाकर के शब्दों में एक आम आदमी की सकारात्मक लड़ाई को दिखाने की कोशिश है शंघाई. हालांकि दिबाकर ने ये भी साफ किया कि उनकी फिल्म में किसी नाटकीय सकारात्मकता की उम्मीद ना की जाए.

शंघाई से पहले दिबाकर ने खोसला का घोसला, ओए लकी लकी ओए और लव सेक्स और धोखा जैसी फिल्में बनाकर आलोचकों की प्रशंसा बटोरी थी.

शंघाई आठ जून को रिलीज हो रही है.

संबंधित समाचार