बाल्की और सब्यसाची ने दोबारा मुझमें विश्वास जगाया: विद्या बालन

  • 5 जून 2012
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Image caption विद्या को 'द डर्टी पिक्चर' के लिए राष्ट्रिय पुरस्कार से नवाज़ा गया.

आज की तारिख में भले ही विद्या बालन का नाम बॉलीवुड की श्रेष्ठ अभिनेत्रियों में आता हो. भले ही हर कोई विद्या की तारीफ करता हो लेकिन विद्या उस वक़्त को नहीं भूली है जब हर तरफ से उन पर आलोचनाओं के बांण चलाए जाते थे.

विद्या कहती हैं, ''हर तरफ बस मेरी बुराई ही हो रही थी. कभी मेरे कपड़ों को लेकर, तो कभी मेरे वज़न को लेकर तो कभी मैं किस अभिनेता के साथ फिल्म कर रही हूं उसे लेकर, मेरे बारे में प्रेस में ख़राब ही लिखा जा रहा था. मैं जो भी करती थी उसमें कोई न कोई बुराई निकाल ही ली जाती थी.''

अपनी बात को पूरा करते हुए विद्या कहती हैं, ''मेरी समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं ऐसा भी क्या गलत कर रही हूं. मैं जब किसी समारोह में जाती थी तो मैं ये सोचती रहती थी कि हे भगवान आज मुझमें क्या कमी निकाली जाएगी. मेरा खुद पर से यकीन उठने लगा था, आत्मविश्वास की बहुत कमी हो गई थी मुझमें.''

वक़्त हमेशा एक जैसा नहीं होता और वक़्त विद्या के लिए भी बदला. हर तरफ से आलोचनाओं की मार झेल रही विद्या के लिए रहत की बात ये थी कि ऐसे वक़्त में भी विशाल भारद्वाज उन्हें 'इश्किया' में लेना चाहते थे और आर बाल्की उनके पास 'पा' का ऑफर लाए थे.

विद्या कहती हैं, ''धीरे-धीरे मुझे लगने लगा कि नहीं अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं जो बतौर कलाकार मुझ पर यकीन रखते हैं, जो अपनी फिल्मों में मेरे साथ काम करना चाहते हैं.''

विद्या की अगर माने तो जैसे-जैसे उन्होंने बाल्की के साथ 'पा' में काम करना शुरू किया वैसे-वैसे उनका खुद पर जो विश्वास था वो बढ़ता चला गया.

विद्या अपने और बाल्की के बीच हुई एक बातचीत को कुछ ऐसे याद करती हैं, ''मैं और बाल्की मलेशिया से वापस आ रहे थे, मुझे याद है कि बाल्की ने मुझसे कहा कि विद्या आप जैसा इंडस्ट्री में और कोई नहीं है. आप एक सम्पूर्ण भारतीय नारी की परिभाषा पर खरी उतरती हैं. आप क्यों भीड़ का हिस्सा बनना चाहती हैं. उन्होंने मुझसे कहा कि क्यों मैं अपनी पहचान बदलने की कोशिश कर रही हूं.''

विद्या कहती हैं कि बाल्की के साथ हुई इस बातचीत ने पल भर में ही सब कुछ बदल कर रख दिया. और उन्होंने तय किया कि वो जैसी हैं वैसी ही रहेंगी और उन्हें किसी के लिए भी बदलने की ज़रुरत नहीं है.

खुद में लौटे आत्मविश्वास का श्रेय अपने परिवार के साथ-साथ विद्या आर बाल्की और फैशन डिज़ाइनर सब्यसाची मुखर्जी को देती हैं. विद्या कहती हैं, ''मेरे परिवार के अलावा अगर बाल्की और सब्यसाची नहीं होते तो आज मैं यहां नहीं होती. अगर ये लोग नहीं होते तो मैं अपने खोए हुए आत्मविश्वास को कभी दोबारा हासिल नहीं कर पाती.''

विद्या बालन ज़्यादातर सब्यसाची मुख़र्जी द्वारा बनाई हुई साड़ियां ही पहनती हैं.

विद्या की आनेवाली फिल्मों में 'घनचक्कर' शामिल है. इस फिल्म में विद्या एक बार फिर इमरान हाश्मी के साथ काम कर रही हैं. फिल्म के निर्देशक हैं 'नो वन किल्ड जेसिका' बनाने वाले राजकुमार गुप्ता.

'घनचक्कर' में अपने किरदार के बारे में तो अभी बात नहीं करना चाहती विद्या लेकिन हां ये ज़रूर कहती हैं कि क्योंकि ये उनकी पहली कॉमेडी फिल्म है तो इससे लेकर वो थोड़ा नर्वस ज़रूर हैं.

फिल्म की शूटिंग इसी साल अगस्त में शुरू होने की सम्भावना है.

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