जब हेमा मालिनी को पड़ी डांट

  • 7 जून 2012
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Image caption हेमा ने न सिर्फ फिल्मों में अभिनय किया है बल्कि एक निर्माता और निर्देशक कि भूमिका भी निभाई है.

आज की तारीख में इस बात की कल्पना कर पाना ज़रा मुश्किल है कि अपने ज़माने में चोटी पर रही अभिनेत्री हेमा मालिनी को भी कभी किसी से डांट पड़ी हो. लेकिन एक वक़्त ऐसा था जब हेमा मालिनी को भी किसके गुस्से का शिकार होना पड़ता था.

बात है उस वक़्त की जब हेमा मालिनी अपनी पहली हिंदी फिल्म 'सपनों का सौदागर' कर रही थीं. फिल्म के निर्देशक महेश कौल अक्सर हेमा पर चिल्लाते थे.

क्यों चिल्लाते थे महेश कौल हेमा पर? इस सवाल का जवाब देते हुए हेमा मालिनी कहती हैं, ''महेश एक बहुत ही अच्छे इन्सान थे, वो उम्रदार भी थे. मुझे आज भी याद है कि वो मुझ पर कितना चिल्लाते थे. मुझे अभिनय नहीं आता था लेकिन मैं नृत्य कला में पारंगत थी. लेकिन फिल्म करनी है तो अभिनय तो करना ही था.''

हेमा कहती हैं कि 'सपनों के सौदागर' के निर्देशक महेश कौल की डांट सुन कर उन्हें बहुत बुरा लगता था.

वो कहती हैं, ''मुझे जब डांट पड़ती थी तो मुझे लगता था कि मुझे वापस मद्रास चले जाना चाहिए. मैं अपनी मां से भी कहती थी कि मुझे वापस जाना है. लेकिन फिर महेश साहब मुझे बुलाते थे और कहते थे, बेटा इधर आओ, ये बताओ कि भरतनाट्यम में आप जब किसी को बुलाते हो तो क्या करते हो, मैं कहती थी कि हाथ से इशारा करते हैं, वो कहते थे कि बस हाथ से इशारा मत करो मुह से बोलो इधर आओ.''

हेमा मालिनी कहती हैं कि ऐसे धीरे-धीरे उन्होंने सीखा कि फिल्मों में अभिनय कैसे होता है और अपने संवाद कैसे बोले जाते हैं. साथ ही वो ये भी कहती हैं कि अगर मन में आगे बढ़ने की चाह हो तो सब संभव है.

वो कहती हैं, ''मैं चाहती थी कि फिल्मों में मेरी अपनी एक खास जगह हो. मैं चाहती थी कि मैं सफल अभिनेत्री बनूं. इसीलिए मैं अपने आप को पूरी तरह से फिल्म के प्रति समर्पित कर दिया. महेश कौल मुझे जैसे-जैसे सीखाते गए मैं वैसे वैसे करती चली गई.''

'सपनों का सौदागर' से पहले हेमा मालिनी एक दक्षिण भारतीय फिल्म में अभिनय कर रही थी. लेकिन उन्हें इस फिल्म से निकाल दिया गया.

अरे भई ऐसा क्या हो गया था कि हेमा को शूटिंग से बाहर का रास्ता दिखाया गया?

हेमा कहती हैं, ''जब मैं फिल्म इंडस्ट्री में आई मैं तो जानती ही नहीं थी कि एक्टिंग करते कैसे हैं. मुझे दक्षिण भारतीय फिल्मों के एक निर्देशक श्रीधर ने अपनी फिल्म में लिया. उस वक़्त मैं उम्र में बहुत छोटी थी और मैं घबराई हुई भी थी. मैंने अपनी मां से कहा भी कि मैं कैसे करूंगी ये फिल्म, तो उन्होंने मुझसे कहा कि निर्देशक आपको आपके संवाद देगा और बस आपको कैमरा के आगे वो संवाद बोलने हैं. लेकिन सच कहूं तो मैं एक्टिंग कर ही नहीं पाई. मैंने इतनी गलतियां की कि श्रीधर ने मुझे अपनी फिल्म से निकल ही दिया.''

राजकपूर के साथ काम करने का मौक़ा

लेकिन दक्षिण भारतीय फिल्म से निकला जाना एक तरह से हेमा मालिनी के लिए अच्छा ही साबित हुआ क्योंकि हेमा के सामने 'सपनों के सौदागर' का प्रस्ताव आया.

हेमा कहती हैं, ''सपनों के सौदागर में महान अभिनेता राज कपूर के साथ काम करना तो एक बहुत बड़ी चुनौती थी. मुझे तो वैसे ही अभिनय के बारे में कुछ मालूम नहीं था. मेरे लिए ये बड़ा मुशिकिल था.''

हेमा कहती है, ''आरके स्टूडियो में मेरा स्क्रीन टेस्ट लिया गया. मेरा टेस्ट लेने राज कपूर खुद आए थे. मैंने उनसे कहा कि आप थोड़ा मुझे करके बता दीजिए कि क्या करना है क्योंकि मुझे कुछ मालूम नहीं है. उन्होंने मुझे वो संवाद दिए थे जो 'जिस देश में गंगा बहती है' में पदिमिनी जी के संवाद थे.''

राज कपूर के साथ अपनी इस मुलाक़ात के बारे में आगे बताते हुए हेमा कहती हैं, ''राज कपूर ने मेरे सामने जिस अंदाज़ में वो संवाद कहे मैंने ठीक उसी तरह से वो बोल डाले. मैंने हुबहू राज कपूर की नक़ल उतार डाली और मुझे उनके साथ 'सपनों के सौदागर' में काम करने का मौका मिल गया.''

'सपनों का सौदागर' साल 1968 में रिलीज़ हुई थी.

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