सत्यमेव का दूसरा सीज़न भी करना चाहूँगा: आमिर खान

 मंगलवार, 26 जून, 2012 को 13:41 IST तक के समाचार
आमिर खान

आमिर खान कहते हैं कि उन्हें रेटिंग से कोई फर्क नहीं पड़ता.

आजकल हर तरफ आमिर खान ही छाए हुए हैं वजह है उनका टीवी शो सत्यमेव जयते. इस साल छह मई से शुरू हुए इस शो के कुल 13 एपिसोड ही हैं. तो क्या 13 एपिसोड ख़त्म होने के बाद सत्यमेव जयते का दूसरा सीज़न भी करेंगे आमिर खान?

बीबीसी से की एक खास बातचीत में इस सवाल का जवाब हां में दिया आमिर खान ने. उन्होंने कहा, ''देखिए जब 13वां एपिसोड ख़त्म होगा तब मैं और मेरी टीम बैठ कर फैसला करेंगे कि हमें इस शो को आगे ले जाना है या नहीं. सच कहूं तो इस बात का फैसला हमारे हाथ में कम है और लोगों के हाथों में ज़्यादा है. हम जल्दबाज़ी में ये फैसला नहीं लेना चाहते.''

अपनी बात को पूरा करते हुए आमिर कहते हैं, ''13 एपिसोड ख़त्म होने के बाद अगर हिंदुस्तान की जनता को लगता है कि वाकई ये शो उनके दिल के करीब आ चुका है और वो चाहते हैं कि ये सिलसिला जारी रहे तब यकीनन हम भी इस सिलसिले को आगे ले जाना चाहेंगे. मैं और मेरी टीम दूसरा सीज़न भी करना चाहेंगे, 13 नए मुद्दों पर रिसर्च कर फिर नया शो करना चाहेंगे.''

वैसे जहां ज़्यादातर लोग आमिर खान की तारीफ कर रहे हैं वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जो ये कहता है कि समाज से जुड़े जिन गंभीर मुद्दों पर आमिर खान आवाज़ उठा रहे हैं उन मुद्दों पर तो पहले से ही काम चल रहा था लेकिन आज उन मुद्दों पर सबकी नज़र इसलिए पड़ रही है क्योंकि वो आमिर खान के शो के ज़रिए सामने आ रहे हैं. तो इस आलोचना को किस तरह से ले रहे हैं आमिर खान?

आमिर कहते हैं, ''मैं तो इसे आलोचना मानता ही नहीं. मुझे इस बात की ख़ुशी है कि जो पिछले 20 सालों में मैंने इज़्जत कमाई है मैं उसका सही इस्तेमाल कर सकता हूं, जो भी मैंने समाज से पाया वो मैं वापस कर सकता हूं. और मेरी वजह से लोगों का ध्यान इन मुद्दों पर आ रहा है तो मुझे ये बात अच्छी लग रही है.''

आमिर कहते हैं, ''इसी मकसद से तो हमने ये शो शुरू किया था. यकीनन बहुत सारे लोग और गैर सरकारी संस्थाएं इन मुद्दों पर सालों से काम कर रही हैं और बेहतरीन काम कर रही हैं, बहुत सारे पत्रकार हैं जो इन मुद्दों पर बहुत कुछ लिख चुके हैं और यकीन मानिए इन सभी के कामों पर ही हमनें अपनी रिसर्च आधारित की है. हमारी ये पूरी कोशिश है कि टीवी जो की इतना सशक्त माध्यम है उसके ज़रिए हम अपनी बात घर घर तक पहुचाएं.''

"यकीनन बहुत सारे लोग और गैर सरकारी संस्थाएं इन मुद्दों पर सालों से काम कर रही हैं और बेहतरीन काम कर रही हैं, बहुत सारे पत्रकार हैं जो इन मुद्दों पर बहुत कुछ लिख चुके हैं और यकीन मानिए इन सभी के कामों को ही हमनें अपनी रिसर्च का आधार बनाया है. हमारी ये पूरी कोशिश है कि टीवी जो की इतना सशक्त माध्यम है उसके ज़रिए हम अपनी बात घर घर तक पहुचाएं."

आमिर खान

बीबीसी ने आमिर खान से पूछा कि क्या उन्हें इस बात का अंदाज़ा था कि जब ये शो टीवी पर आएगा और जब 'खाप पंचायत' या फिर डॉक्टरों से जुड़ी किसी बात पर चर्चा होगी तब कुछ लोग उनके खिलाफ भी हो जाएंगे?

इस सवाल का जवाब देते हुए आमिर खान कहते हैं, ''जब दो साल पहले हमने ये सफ़र शुरू किया था तब ही हमें अंदाज़ा हो गया था कि आगे क्या होने वाला है. क्योंकि हम हमारे समाज से जुड़े इतने अहम् मुद्दे उठा रहे थे. अगर 99 प्रतिशत लोगों को हमारे शो से फायदा होगा तो एक प्रतिशत जनता तो ऐसी भी है न जिनकी गलतियों पर हम रोशनी डाल रहे हैं तो उन्हें तो इस बात से समस्या होगी ही.''

आमिर मानते हैं कि ये लोग उन पर अलग अलग किस्म के इल्ज़ाम लगाएंगे, उन्हें बुरा भला कहेंगे. लेकिन अर्जुन की तरह उनका ध्यान सिर्फ पेड़ पर बैठी चिड़िया की आंख पर है, वो अपने मकसद से बिलकुल नहीं हट रहे हैं.

सामाजिक सेवक की पदवी

भई अब जब आमिर खान भ्रूण हत्या, घरेलु हिंसा, बाल शोषण और दहेज जैसे मुद्दों को अपने शो पर उठा रहे हैं तो कुछ लोग उन्हें समाज सेवक भी कहने लगे हैं. तो कैसा लगता है आमिर को अपनी इस नई पदवी को सुन कर?

आमिर कहते हैं, ''मैं तो किसी पदवी के बारे में सोचता ही नहीं हूं. मैंने अपनी ज़िन्दगी के दो साल इन मुद्दों को दिए हैं, ज़ाहिर है कि मैं एक सामाजिक काम कर रहा हूं. लेकिन किसी भी तरह की पदवी में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है. मेरा काम है लोगों को कहानियां बताना उनके जज़्बात को टटोलना, उनके दिल को छूने की कोशिश करना.''

अपनी बात को पूरा करते हुए आमिर कहते हैं कि बतौर अभिनेता उनकी जो छवि है वो उसका अच्छा इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं. सामाजिक सेवक को एक बहुत बड़ी पदवी बताते हुए वो कहते हैं कि वो ये नहीं जानते कि वो इसके लायक हैं भी या नहीं.

सत्यमेव जयते जब शुरू हुआ था तो शो की रेटिंग आसमान छू रही थी लेकिन आजकल रेटिंग थोड़ा कम हो गई है.

आमिर कहते हैं कि वो तो रेटिंग को देखते ही नहीं हैं. वो कहते हैं, ''चाहे आप मुझे बताएं कि शो की रेटिंग अच्छी है या बुरी है, मुझे इस बात से फर्क ही नहीं पड़ता. रेटिंग जो हैं वो सात हज़ार टीवी सेट के आंकड़ों पर आधारित हैं. भारत की जनसंख्या 120 करोड़ है. 120 करोड़ लोग क्या देख रहे हैं वो सात हज़ार डिब्बे कैसे बता पाएंगे. मुझे तो ये रेटिंग का पूरा खेल ही मज़ाक लगता है. मैं इसे नहीं मानता.''

अपनी बात पूरा करते हुए आमिर कहते हैं, ''मुझे कैसे पता चलता है कि लोग क्या सोच रहे हैं, जब मुझे देश भर से फोन आते हैं. जब मेरे दोस्त का ड्राइवर कहता है कि सुबह 11 बजे सब लोग टीवी के आगे बैठे होते हैं. जब लोग मुझे ख़त लिखते हैं. मैं तो इसी से बेहद खुश हूं इसलिए मैं उन सात हज़ार डिब्बों पर भरोसा नहीं करता.''

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