मैं तो अब भी विद्यार्थी हूं: पंडित हरि प्रसाद चौरसिया

पंडित हरिप्रसाद चौरसिया

भारत में बांसुरी वादन की बात हो तो सबसे पहले ज़ेहन में पंडित हरि प्रसाद चौरसिया का नाम आता है.

60 सालों से अपनी बांसुरी की मधुर तान छेड़ने वाले पद्मविभूषण पंडित हरि प्रसाद चौरसिया एक जुलाई को 74 साल के हो रहे हैं, लेकिन वो अब भी अपने आपको संगीत का विद्यार्थी ही मानते हैं.

बीबीसी से खास बात करते हुए पंडित हरि प्रसाद चौरसिया कहते हैं, "मैं अब भी बच्चा हूं. मुझे लगता है बस अभी कुछ दिन पहले ही मेरा जन्म हुआ है. संगीत में मुझे बहुत कुछ सीखना है. मुझे दूसरों का मार्गदर्शन मिल रहा है. मैं विद्यार्थी हूं और सच मानिए इसमें बहुत आनंद आता है."

पंडित हरि प्रसाद चौरसिया के पिताजी एक पहलवान थे और वो चाहते थे कि उनका बेटा भी पहलवान बने. हरि प्रसाद चौरसिया ने कहा, "मुझे पहलवानी में मज़ा नहीं आता था. अखाड़े में दूसरों के हाथों मार खाओ या उन्हें चित कर दो, ये सब काम में मेरा मन नहीं लगता था. मैं पिताजी से छुपकर बांसुरी बजाया करता था."

पंडित हरि प्रसाद चौरसिया ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में बांसुरी को नई पहचान दिलाई.

उन्होंने मशहूर संतूर वादक पंडित शिव प्रसाद शर्मा के साथ मिलकर संगीतकार जोड़ी शिव-हरि बनाई. दोनों ने मिलकर सिलसिला, चांदनी, लम्हे और डर जैसी फिल्मों में सुपरहिट संगीत दिया.

इस जोड़ी के संगीतबद्ध किए गीत, रंग बरसे भीगे चुनर वाली, ये कहां आ गए हम, मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां और जादू तेरी नज़र सुपरहिट साबित हुए.

फिल्म सिलसिला के दो गाने, रंग बरसे भीगे चुनरवाली और ये नीला आसमान सो गया अमिताभ बच्चन ने गाए थे.

उन दिनों को याद करते हुए पंडित हरि प्रसाद चौरसिया कहते हैं, "अमिताभ बच्चन तो एक योगी व्यक्ति हैं. ये बात 1979-80 की है. तब वो बेहद व्यस्त हुआ करते थे और तीन-तीन शिफ्टों में काम करते थे. लेकिन उसके बाद भी सारा काम खत्म करके वो मेरे घर रात में आते और मुझसे कहते कि हरि भैया मुझे गाना सिखाओ. ऐसा समर्पण ऐसी कड़ी मेहनत कहां देखने को मिलती है."

उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन उन्हें बड़ा भाई मानते हैं और बच्चन परिवार से उनके बेहद मधुर संबंध हैं.

पंडित हरि प्रसाद चौरसिया इस उमर में भी बेहद व्यस्त रहते हैं. हाल ही में वो स्पेन सहित कई देशों में अपने कॉन्सर्ट करके लौटे जो बेहद कामयाब रहे.

वो नीदरलैंड की रॉटरडम म्यूज़िक कंसरवेटरी के वर्ल्ड म्यूज़िक डिपार्टमेंट के प्रमुख हैं.

उन्होंने बताया कि फिल्म संगीत देते देते वो थोड़े से उकता गए थे. उन्हें लगने लगा कि उन्हें संगीत बिरादरी के लिए कुछ और भी करना चाहिए.

इन दिनों पंडित हरि प्रसाद चौरसिया मुंबई स्थित अपने आश्रम गुरुकुल वृंदावन में ग़रीब बच्चों को संगीत की शिक्षा दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस आश्रम में पुरानी गुरू-शिष्य परंपरा का निर्वाह होता है और बच्चे इसी आश्रम में रहकर संगीत सीखते हैं.