असरदार लेखन के बिना अभिनेता बेअसर: नसीर

  • 8 जुलाई 2012
नसीरुद्दीन शाह इमेज कॉपीरइट PR

अक्सर ही बातें उठती रहती हैं कि बॉलीवुड में ज़्यादा अच्छी फिल्में ना आने की वजह ख़राब लेखन है.

जानकार मानते हैं कि लेखकों को किसी भी फिल्म की कामयाबी में ज़्यादा श्रेय नहीं मिलता इसी वजह से बॉलीवुड में अच्छे लेखकों की सख़्त कमी है.

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी लेखकों के योगदान को बेहद अहम मानते हैं और कहते हैं कि लेखकों को और ज़्यादा क्रेडिट मिलना ही चाहिए.

मुंबई में एक किताब लॉन्च करने के मौके पर पहुंचे नसीरुद्दीन शाह कहते हैं, "बेहतर लेखन के बिना कोई अभिनेता असरदार साबित नहीं हो सकता. चाहे वो कितना भी अच्छा कलाकार क्यों ना हो, अगर लिखाई अच्छी ना हो तो हम कुछ नहीं कर सकते."

नसीरुद्दीन शाह कहते हैं कि हिंदी सिनेमा में जो भी अच्छे परफारमेंस हुए हैं. जो भी बेहतरीन अभिनय हुए हैं वो इस वजह से हुए हैं क्योंकि उन फिल्मों की लिखाई अच्छी हुई है.

नसीरुद्दीन शाह के मुताबिक़ लगातार अच्छा और मनोरंजक तरीक़े से लिखना बहुत मुश्किल होता है.

उन्होंने प्रख्यात लेखक, फिल्मकार और शायर गुलज़ार का उदाहरण देते हुए कहा, "एक बार ऐसा हुआ कि गुलज़ार की फ़िल्में लगातार नाकामयाब हो रहीं थीं. उनके पास कोई वजह नहीं थी अपने ऑफिस जाने की क्योंकि उनके पास कोई काम नहीं था. लेकिन वो लगातार सुबह साढ़े नौ बजे से डेढ़ बजे तक ऑफिस जाते और लगातार लिखते रहते. गुलज़ार ने मुझे बताया कि उस दौरान उन्होंने जो भी लिखा वो फेंक दिया लेकिन उस लिखाई ने उनके दिमाग को संतुलित बनाए रखा."

पिछले हफ्ते ही नसीरुद्दीन शाह की फिल्म मैक्सिमम रिलीज हुई.

अब इसी साल उनकी फिल्म डेढ़ इश्किया की शूटिंग शुरू होगी, जिसमें वो माधुरी दीक्षित के साथ काम कर रहे हैं. ये फिल्म उनकी हिट फिल्म इश्किया की सीक्वेल है.

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