रोमांस के सुपरस्टार राजेश खन्ना को सलाम

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Image caption बताते हैं कि एक जमाने में राजेश खन्ना को उनके चाहते वाले खून से चिट्ठियां लिखा करते हैं.

राजेश खन्ना को लोग प्यार से 'काका' कह कर पुकारते थे. ये राजेश खन्ना ही थे जिन्होंने 1960 और 1970 के दशक में परदे पर रोमांस को एक नई पहचान दी.

राजेश खन्ना को हिंदी सिनेमा में पहले सुपरस्टार का रुतबा हासिल हुआ.

दिलचस्प बात ये है कि राजेश खन्ना एक टेलेंट हंट प्रतियोगिता के विजेता बन कर फिल्मों में आए थे और उन्होंने उस जमाने में हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाई जब दिलीप कुमार, देवानंद और राजकपूर की त्रिमूर्ति पूरी तरह छाई हुई थी.

यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेयर ने 1965 में एक टेलेंट हंट प्रतियोगिता कराई जिसमें लगभग दस हजार लोगों ने हिस्सा लिया और आखिर में इसके विजेता बने राजेश खन्ना.

इस तरह अमृतसर में पैदा होने वाले जतिन खन्ना फिल्म नगरी पहुंचे और राजेश खन्ना बन गए.

शानदार कामयाबी

राजेश खन्ना की शुरुआत 'आखिरी खत', 'बहारों के सपने' और 'राज' जैसी फिल्मों से हुई, लेकिन 1969 में आई 'अराधना' ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया. इसके बाद 'खामोशी' में उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई और फिल्म समीक्षक उन्हें सुपरस्टार कहने लगे.

राजेश खन्ना ने 1969 से 1972 के बीच लगातार 15 हिंट फिल्में दीं. कुछ फिल्मी पंडित कहते हैं कि ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है जो अब तक नहीं टूटा है.

'कटी पतंग', 'अमर प्रेम', 'अपना देश', 'आपकी कसम', 'नकम हराम', 'फिर वही रात', 'अगर तुम न होते', 'आवाज', 'प्रेम नगर', 'अवतार', 'आनंद' और 'हम दोनों' जैसी फिल्में आज भी सिने प्रेमियों को अपनी तरफ खींचती हैं.

मुमताज के साथ राजेश खन्ना की जोड़ी बेहद हिट रही. दोनों आठ फिल्मों में एक साथ आए और ये सभी बड़ी गोल्डन जुबली हिट रहीं. लेकिन शर्मिला टैगोर, आशा पारिख और जीनत अमान जैसी अभिनेत्रियों के साथ भी उनकी जोड़ी को खासा पसंद किया गया.

फिल्मों से राजनीति तक

लेकिन 1976 के बाद से उनकी फिल्में बॉक्स पर कमजोर पड़ने लगीं. दरअसल ये वो दौर था जब हिंदी फिल्मों के दूसरे और सबसे बड़े सुपरस्टार अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा पर छाने लगे थे.

Image caption राजेश खन्ना ने राजनीति में भी हाथ आजमाया लेकिन जल्द ही फिल्में उन्हें अपनी तरफ खींच ले गईं.

दरअसल सामाजिक और राजनीतिक हलचल वाले उस दौर में सिने प्रेमियों के बीच अमिताभ बच्चन की एंग्री यंगमैन की छवि रोमांटिक फिल्मों पर भारी पड़ रही थी. लेकिन इससे पहले का लगभग एक दशक राजेश खन्ना और उनकी फिल्मों के नाम रहा.

1980 के दशक में भी राजेश खन्ना फिल्मों में दिखते रहे और टीना मुनीम के साथ उन्होंने'फिफ्टी-फिफ्टी', 'सौतन', 'आखिर क्यों', 'बेवफाई' और 'अधिकार' जैसी कई हिट फिल्में दीं. इस दौर में उन्होंने बहुत सी मल्टीस्टारर फिल्मों भी काम किया. उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण भी किया.

लेकिन 1990 का दशक आते आते राजेश खन्ना ने फिल्मों को अलविदा कह दिया और राजनीति में आ गए. वो 1991 में कांग्रेस के टिकट पर नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए. हालांकि राजीव गांधी के कहने पर वो कांग्रेस के लिए प्रचार काफी पहले से करते रहे थे.

वर्ष 2000 के बाद राजेश खन्ना फिल्मों से गायब से हो गए. इस दौरान इक्का दुक्का फिल्में ही कीं. इसके अलावा कुछ टीवी सीरियलों में भी वो दिखे.

परिवार

'काका' के नाम से मशहूर राजेश खन्ना ने मार्च 1973 में डिंपल कपाड़िया से शादी की यानी उनकी पहली फिल्म बॉबी रिलीज होने से छह महीने पहले. हालांकि बाद में दोनों अलग हो गए लेकिन कभी तलाक नहीं लिया. राजेश खन्ना के बीमारी के दौरान डिंपल ने उनका काफी ख्याल रखा.

राजेश खन्ना और डिंपल की दोनों बेटियों ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना भी बॉलीवुड में अभिनय कर चुकी हैं.ट्विंकल खन्ना के पति और मशहूर अभिनेता अक्षय कुमार अपने ससुर राजेश खन्ना के काफी करीबी रहे हैं.

राजेश खन्ना ने अपने करियर में अदाकारी के अलग अलग रंग दिखाए लेकिन 1969 से 1976 बीच निर्विवाद रूप से वो हिंदी सिनेमा के मेगास्टार रहे हैं. उनके चलने, बोलने और पहनावे समेत हर अदा पर लोग कुरबान हुआ करते थे.

बताते हैं कि उनके चाहने वाले उन्हें अपने खून से लिखी चिट्ठियां भेजा करते थे. हाल ही में राजेश खन्ना पंखों के एक विज्ञापन में दिखाई दिए. विज्ञापन में बेहद कमजोर दिख रहे राजेश खन्ना ये कहते दिखाई दिए कि उनके ‘फैंस’ हमेशा उनके साथ रहेंगे.

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