ग़ज़ल को शहंशाहत बख्शी मेहदी हसन ने: आबिदा

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Image caption 18 जुलाई को मेहदी हसन की 85वीं जयंती है

"अल्लाह ने उन्हें क्या आवाज बख़्शी थी. उनके जैसा सुर तो कोई गायक लगा ही नहीं सकता." मशहूर गजल गायक मेहदी हसन के बारे में ये कहना है पाकिस्तानी सूफी गायिका आबिदा परवीन का.

बुधवार 18 जुलाई को मेहदी हसन की 85वीं जयंती है. इसी साल 14 जून को ये प्रख्यात गजल गायक अपने चाहने वालों को हमेशा के लिए छोड़कर चला गया. कराची के एक अस्पताल में उनका निधन हुआ.

जिस दिन मेहदी हसन का निधन हुआ था उस दिन बीबीसी से खास बात करते हुए आबिदा परवीन ने कहा, "मेहदी साहब हमेशा सीखते रहते थे. मैंने आज तक किसी और गायक को संगीत में इतना डूबते नहीं देखा. संगीत ही उनके लिए सब कुछ था."

आबिदा कहती हैं कि उनके बाद के हर गायक में उन्हीं का प्रभाव है. पूरी सदी में उनके जैसा गायक पैदा ही नहीं हुआ.

आबिदा कहती हैं, "मेरी उनसे मुलाकात होती रहती थी. एक बार मैंने उन्हें अपने घर दावत में बुलाया. वो दावत संगीत की ऐसी यादगार महफिल में बदल गई कि पूछिए मत. मैं उस शाम को कभी नहीं भुला पाऊंगी."

आबिदा के मुताबिक, "लता मंगेशकर और जगजीत सिंह जैसे प्रख्यात गायक भी उनसे प्रभावित रहते थे."

आबिदा के शब्दों में, "गजल को पूरी दुनिया में जो प्रसिद्धि मिली वो मेहदी साहब ने ही दिलाई. उन्होंने गजल को शहंशाहत बख्शी."

मशहूर गायिका लता मंगेशकर ने एक बार मेहदी हसन से कहा था, "आपके गले में भगवान बोलता है."

मेहदी हसन का जन्म भारतीय राज्य राजस्थान में हुआ था, लेकिन विभाजन के वक्त वो पाकिस्तान चले गए थे.

गजल सम्राट के नाम से जाने जाने वाले मेहदी हसन के आखिरी दिन काफी मुश्किल भरे रहे. हालांकि जीते जी उन्होंने काफी दौलत और शोहरत कमाई. लेकिन आखिरी दिनों में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा. उनकी बीमारी के दिनों में उनका परिवार उन्हें इलाज के लिए भारत लाने पर भी विचार कर रहा था, लेकिन अंतत: अत्यधिक बीमार होने की वजह से उन्हें भारत ना लाया जा सका.

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