बड़े शर्मीले थे काका

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Image caption वहीदा रहमान और राजेश खन्ना फिल्म खामोशी के एक दृश्य में.

मेरी राजेश खन्ना से पहली मुलाकात फिल्म खामोशी के सेट पर हुई. उस वक्त वो नए नए फिल्मों में आए थे.

बहुत ही खामोश और शर्मीले किस्म के इंसान थे. ज्यादा बातें नहीं करते थे.

फिर फिल्म की शूटिंग के लिए हम कोलकाता गए. वहां सारी यूनिट एक ही होटल में रुकी. तब थोड़ा थोड़ा उनसे मुलाकात होने लगी और वो थोड़ा खुलने लगे.

वो उन दिनों बड़े सरल तरीके से रहा करते थे. किसी को इल्म भी नहीं था कि ये लड़का इतना बड़ा सितारा बनने वाला है.

बहुत कम लोगों को पता है कि खामोशी के लिए निर्देशक हेमंत कुमार को मैंने राजेश खन्ना का नाम सुझाया था. उस वक्त उनकी फिल्म आखिरी खत रिलीज हो चुकी थी.

दरअसल खामोशी एक हीरोइन प्रधान फिल्म थी. इसलिए उसमें उस वक्त का कोई बड़ा सितारा काम करने को तैयार नहीं था. हेमंत दा देव आनंद को लेना चाहते थे, लेकिन बात बनी नहीं.

मैंने हेमंत दा को कहा कि ये जो नया लड़का आया है, ये ठीक है. इसे ले सकते हैं. उन्होंने बात मान ली.

खामोशी की शूटिंग का एक दिलचस्प वाकया है. हम इसके गाने वो शाम कुछ अजीब थी की शूटिंग कर रहे थे. और राजेश खन्ना गाने के बोल भूल रहे थे. तो लिप सिंक में मुश्किल हो रही थी.

गाने के दृश्य में मुझे उनके गले लगना था. उन्होंने मुझसे कहा, वहीदा जी जब कैमरा मेरे चेहरे पर आए और आपकी पीठ पर तो आप गाना गुनगुना देना जिससे मुझे उसके बोल पकड़ने में आसानी हो जाएगी. वो अक्सर गाने के बोल पकड़ नहीं पाते थे.

खामोशी फिल्म के बाद धीरे धीरे वो बड़े सितारे बनने लगे. उनकी शर्मिला टैगोर और मुमताज के साथ जोड़ी ज्यादा जमने लगी. मैं गंभीर किस्म की फिल्में ज्यादा करती थी और बतौर नायिका मेरा करियर धीरे धीरे खत्म हो रहा था तो मैंने उनके साथ ज्यादा फिल्में नहीं कीं.

वो बहुत ही सरल किस्म के इंसान थे. लेकिन उनमें कोई जादू था. हर उम्र का इंसान उनकी तरफ खिंचा चला आता था. उनके आकर्षण को परिभाषित नहीं किया जा सकता.

कई लोग उन्हें मूडी किस्म का कलाकार मानते थे. लेकिन ऐसा नहीं था. हम कलाकारों के साथ दिक्कत ये है कि मीडिया वाले समझते नहीं कि हमारी भी निजी जिंदगी होती है. कई बार हम अपनी निजी समस्याओं की वजह से परेशान रहते हैं, और सेट पर कई बार चिढ़चिढ़ा जाते हैं या मान लीजिए किसी वजह से स्पॉट ब्वॉय या यूनिट के किसी सदस्य को डांट दिया तो लोग तिल का ताड़ बना देते हैं.

कहने लगते हैं कि बड़े गुस्से वाला कलाकार है. मूडी है. उनके भी बरताव को लोगों ने गलत तरीके से लिया. उन्हें भी मूडी करार दिया. जबकि वो ऐसे बिलकुल नहीं थे.

अपने आखिरी दिनों में उन्हें बड़ी तकलीफ हुई. देखिए. कुछ सालों से उनकी तबियत बेहद खराब रहने लगी. हमें पता था कि उनका अंत समय नजदीक आ चुका है. लेकिन फिर भी उनकी मौत की खबर से बेहद सदमा पहुंचा.

मैं कहूंगी कि वो एक तरह से भाग्यशाली थे कि बीमारी के वक्त उनका पूरा परिवार उनके साथ था. उनकी पत्नी डिंपल कपाड़िया ने उनका भरपूर साथ दिया. उनके बच्चे और दामाद उनके साथ थे. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति पहुंचाए.

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