कैमरे के आगे नग्न दिखना आसान नहीं: शर्लिन

  • 24 जुलाई 2012
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Image caption शर्लिन, प्लेबॉय पत्रिका के मालिक ह्यू हेफनर के साथ

स्कूल के दिनों में टॉपर रही शर्लिन चोपड़ा, पिछले दिनों विश्व प्रसिद्ध प्लेबॉय मैगज़ीन के कवर शूट के बाद काफी चर्चा में है.

बीबीसी से एक खास बातचीत में शर्लिन ने बताया कि कैमरे के सामने नग्न होना और बिना कपड़ों के खूबसूरत दिखना आसान काम नहीं है.

शर्लिन कहती हैं "मैं हमेशा से ही ऐसी थी, यही जज़्बा था आगे बढ़ने का. मुझे बहुत पहले प्लेबॉय मॉडल बन जाना चाहिए था. प्लेबॉय, विश्व की सबसे प्रतिष्ठित व्यस्क मैगज़ीन है और अगर किसी को पूरी तरह नग्न होना है तो प्लेबॉय से बड़ा अवसर क्या हो सकता है".

तो क्या शर्लिन प्लेबॉय के लिए कवर शूट करने वाली पहली भारतीय महिला हैं? इस सवाल के जवाब में शर्लिन कहती हैं "मैंने इससे पहले किसी भारतीय का नाम प्लेबॉय के साथ जुड़ते हुए नहीं सुना. पहली भारतीय प्लेबॉय मॉडल का खिताब मुझे मिला है और इसे मुझसे कोई नहीं छीन सकता".

बगैर ऑडिशन के मैगज़ीन के लिए चयनित होने वाली शर्लिन ने बताया कि प्लेबॉय में दिखने का विचार उनके मन में पिछले साल आया.

शर्लिन कहती हैं "पिछले साल एक निर्माता की हैसियत से मैंने 'धूम' के निर्देशक संजय गढ़वी को साइन किया था लेकिन फिर कहानी को लेकर हमारे बीच में अनबन हो गई. तब मैंने सोचा कि मैं अब अपने बलबूते पर, बगैर किसी की सहायता के, कुछ ऐसा करूंगी जिससे शोर भी मचे और धूम भी मचे".

लेकिन शोर मचाने के लिए प्लेबॉय मैगज़ीन का सहारा लेना कितना सही है, इसका जवाब देते हुए शर्लिन कहती हैं "शोबिज़ में सही समय पर शोर मचाना ज़रूरी होता है और सही समय पर सही दरवाज़े पर दस्तक देना ज़रूरी होता है. अगर मैं कहूं कि मुझे शोर मचाना अच्छा लगता है, तो क्या मुझे इसके लिए समाज की इजाज़त लेनी पड़ेगी?"

लोगों द्वारा मिल रही तीखी प्रतिक्रियाओं पर शर्लिन कहती है "भारत में ही नहीं, विश्व में ऐसे कई लोग हैं जो सोचते हैं कि जो लड़की अपने जिस्म का इस्तेमाल करती है उसके पास टैलेंट नहीं होता. जिसके पास गुण नहीं होते वो अपने रुप का इस्तेमाल करती है, पर मेरी सोच ऐसी नहीं है".

अपने परिवारजनों की बात करते हुए शर्लिन ने कहा "मेरी बहन ने मुझे एसएमएस भेजा और कहा कि उसे गर्व है की वो मेरी बहन है. उसने कहा कि जब जब उसे मौका मिलेगा तब तब वो लोगों को बताएगी कि वो मेरी बहन है".

अपनी मां का ज़िक्र करते हुए शर्लिन कहती हैं "मेरी मां से कोई बात नहीं हुई है, लेकिन मैं सोच रही हूँ कि हैदराबाद जाकर उन्हें समझाऊँ कि मैं ऐसी ही हूँ और उन्हें मुझे स्वीकार करना ही पड़ेगा".

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