दिल्ली, अगली मायानगरी ?

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Image caption फिल्म एजेंट विनोद की दिल्ली में शूटिंग करते सैफ अली खान

भारतीय सिनेमा के 100 साल पूरे हो रहे हैं और इस पूरी सदी में हिंदी फिल्म जगत की माया नगरी बनने का सौभाग्य मिला है सिर्फ मुंबई को.

यहां तमाम स्टूडियोज, प्रोडक्शन हाउस हैं. लगभग सभी बड़े, छोटे कलाकार यहां रहते हैं और ज्यादातर फिल्म और टीवी सीरियलों की शूटिंग भी यही होती है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि मुंबई पर ही ये सारा बोझ क्यो. क्या किसी दूसरे शहर को फिल्म नगरी के रूप में विकसित नहीं किया जा सकता.

12वें ओसियान फिल्म समारोह में इसी बात पर चुनिंदा फिल्मकारों के बीच चर्चा हुई और जो नाम उभर कर सामने आया वो था भारत की राजधानी दिल्ली का.

रॉकस्टार और लव आज कल जैसी हिट फिल्में बना चुके इम्तियाज अली ने दिल्ली को शूटिंग के लिए एक बेहतरीन स्थान माना और कहा कि दिल्ली में तमाम संभावनाएं हैं. इम्तियाज ने खुद अपनी फिल्मों की शूटिंग दिल्ली में की.

इम्तियाज ने कहा, "दिल्ली के पास बेहद समृद्ध है. यहां कला और थिएटर का अच्छा माहौल है. और कुछ अच्छे तकनीशियन भी हैं. लेकिन फिल्म हब वो जगह बनती हैं जहां फिल्म निर्माण से संबंधित ज्यादातर लोग रहते हैं. जैसे मुंबई."

इम्तियाज कहते हैं कि लोग दिल्ली में फिल्म बनाते हैं लेकिन निर्माताओं की तलाश में उन्हें मुंबई जाना पड़ता है. अगर दिल्ली में ही लोगों को निर्माता मिलने लगें तो इसे फिल्म हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी.

इम्तियाज के मुताबिक दिल्ली में शूटिंग करने में एक बड़ी समस्या ये है कि यहां पर सरकार से अनुमति लेने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, साथ ही दिल्ली में होटलों का खर्चा बहुत ज्यादा होता है.

शेखर कपूर ने कहा, "किसी भी शहर में शूटिंग के लिए जरूरी है वो शहर लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करे. वहां अफसरशाही कम से कम हो. साथ ही शहर का रवैया थोड़ा बगावती किस्म का हो. क्योंकि बागी तेवरों से ही कला का जन्म होता है. दिल्ली में ये तमाम खूबियां हैं."

शेखर कपूर ने ये भी कहा कि दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्दालय जैसे और संस्थान होने जरूरी हैं. इनसे बेहतरीन कलाकार मिलते हैं. शेखर कपूर ने बताया कि उनकी फिल्म बैडिंट क्वीन में जय्जातार कलाकार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के थे.

इम्तियाज अली और शेखर दोनों ने ही माना कि दिल्ली में अगर मुंबई की तरह तमाम स्टूडियोज़ और फिल्म तकनीक से संबंधित दूसरे चीज़ें मुहैया हों तो इसे आसानी से फिल्म नगरी के रूप में विकसित किया जा सकता है.

शेखर कपूर ने कहा कि उन्हें अपनी फिल्म मासूम की शूटिंग मुंबई के बजाय दिल्ली में करने मे बेहद मजा आया.

ओसियान के फाउंडर नेनिल तुली ने कहा कि ओसियान के प्लेटफॉर्म में ऐसी चर्चा करने का मकसद ही यही है कि दिल्ली को फिल्म नगरी के रूप में विकसित करने के उपायों पर चर्चा की जा सके. जिससे फिल्मों को बतौर करियर अपनाने की इच्छा रखने वाले नौजवानों को दिल्ली छोड़कर मुंबई ना जाना पड़े.

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