शुक्रवार नहीं कोई भी वार चलेगा !

 शनिवार, 18 अगस्त, 2012 को 05:14 IST तक के समाचार

एक था टाइगर बुधवार, 15 अगस्त को रिलीज हुई थी. इसने पहले दिन तकरीबन 35 करोड़ कमाए.

सप्ताह के बीच में छुट्टी हो तो क्या फिल्म देखने का ख्याल आपके मन में नहीं आता? ज़्यादातर लोग छुट्टी वाले दिन कोई न कोई फिल्म जरूर निबटाना चाहते हैं.

और यह बात फ़िल्म निर्माताओं को कैसे फायदा पहुंचा सकती है ये दिखा दिया है सलमान खान की इस हफ़्ते रिलीज़ हुई फ़िल्म 'एक था टाइगर' ने.

फ़िल्म रिलीज़ हुई 15 अगस्त को जो कि राष्ट्रीय अवकाश का दिन है और पहले ही दिन फिल्म ने तकरीबन 35 करोड़ कमा लिए.

कई फ़िल्मी जानकारों का यह भी मानना है कि यह अब तक हिंदी सिनेमा में किसी भी फिल्म को मिली सबसे बड़ी ओपनिंग है.

"अगर शुक्रवार से पहले ही कोई ऐसा दिन आ जाये जो फिल्म को अच्छा बिजनेस दिला सकता है तो क्यूँ न फिल्म उसी दिन रिलीज की जाए."

तरण आदर्श, फिल्म व्यापार विशेषज्ञ

यानि अब निर्माता-निर्देशक फिल्म को रिलीज करने के लिए शुक्रवार का इंतजार करने के बजाय यह देखते हैं कि उस पूरे हफ्ते में कौन सा दिन फिल्म को सबसे अच्छा बिज़नेस दे सकता है.

लंबा वीकएंड

फिल्मी व्यवसाय के जानकार तरण आदर्श का मानना है कि आजकल जिस हिसाब से ढेरों ढेर फिल्में बन रही हैं, सारा खेल इसी बात पर निर्भर करता है कि किसी फिल्म को कितने दिन तक अकेले सिनेमा घरों पर राज करने का मौका मिल सकता है.

ऐसे में अगर शुक्रवार से पहले ही कोई ऐसा दिन आ जाये जो फिल्म को अच्छा बिज़नेस दिला सकता है तो क्यूँ न फिल्म उसी दिन रिलीज की जाए. इससे फिल्म को मिलने वाला हफ्ता सात के बजाय बढ़ कर आठ से 10 दिन का हो जाता है जिसका व्यवसाय पर खासा असर पड़ता है.

हालाँकि सलमान खान के चाहने वालों का मानना है कि वो हर साल ईद के मौके पर एक फिल्म रिलीज करके अपने चाहने वालों को ईद का तोहफा देते हैं. लेकिन ईद के तोहफे से ज्यादा इस फैसले में छुपी है निर्माताओं कि व्यवसायिक दूरदर्शिता जिसे अब और लोग भी अपनाने लगे हैं.

फिल्म - 'एक था टाइगर'

पिछले हफ्ते रिलीज़ हुई फ़िल्म 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' भी शुक्रवार की जगह बुधवार को रिलीज़ हुई. जिसका सीधा सा कारण था जन्माष्टमी की छुट्टी. खुद फ़िल्म के निर्देशक अनुराग कश्यप ने बताया कि वो और यूटीवी चाहते थे कि फ़िल्म को एक लम्बा वीकेंड मिले.

इससे पहले दीवाली, और क्रिस्मस के मौकों पर भी देखा गया है कि आमिर खान और सलमान खान जैसे कलाकारों ने अपनी फिल्मों की रिलीज़ के लिए ऐसे कुछ दिनों को चुना है.

हालाँकि तरण आदर्श ये भी मानते हैं कि इस तरह का चांस हर फिल्म के साथ नहीं लिया जा सकता. लोग छुट्टी में फ़िल्म देखना तो पसंद करते हैं लेकिन या तो अपने पसंदीदा बड़े स्टार की या फिर कोई ऐसी फिल्म जो रिलीज़ से पहले से ही खासी उत्सुकता जगा चुकी हो.

तरण के अनुसार ' गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' को वैसा व्यवसाय नहीं मिला जिसकी यूटीवी ने उम्मीद की थी. इसलिये यह फ़ैसला उनके हित में नहीं निकला.

सिर्फ बड़ी फिल्मों को फायदा ?

"मैं और यूटीवी चाहते थे कि हमारी फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर-2 को को एक लंबा वीकेंड मिले. इसलिए इसे बुधवार को रिलीज किया गया."

अनुराग कश्यप, निर्देशक, गैंग्स ऑफ वासेपुर

तरण कहते हैं कि सलमान खान ऐसा चांस कभी भी ले सकते हैं, और जैसा कि देखा गया है कि वो पिछले कई सालों से ईद पर अपनी ये लोकप्रियता भुनाते आए हैं.

'एक था टाईगर' के लिए भी तरण ने कहा कि अभी तो सिर्फ 15 अगस्त कि छुट्टी का फायदा मिला है फ़िल्म को अभी ईद का फायदा मिलना बाकी है.

जैसा कि मुंबई के एक मल्टीप्लैक्स 'सिनेमैक्स' के उप महा प्रबंधक गिरीश वानखेड़े ने बीबीसी को बताया कि बिज़नेस के नज़रिए से उन्हें फ़िल्म निर्माताओं का ये फैसला बड़ा कारगर लग रहा है.

अगर आजकल लोगों को फिल्में देख कर छुट्टी बिताना अच्छा लगता है तो इसका फायदा भी उठाया जाना चाहिए. सिनेमा घरों में इन फ़िल्मों के लिए उमड़ रही भीड़ इस बात की पुष्टि कर रही है कि फिल्म की रिलीज का दिन से कोई संबंध नहीं, संबंध है केवल छुट्टी और लोगों के पास फ़ुर्सत से.

तो यानि कुल मिलाकर 'वार' के फेर से मुक्त होने से फिल्मों को व्यावसायिक फ़ायदा तो मिल ही रहा है साथ ही दर्शकों के सामने भी विकल्प बढ़ जाते हैं.

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