मेरे लिए ग्रेजुएट होना ही शिखर समान था: अमिताभ

 शुक्रवार, 31 अगस्त, 2012 को 10:42 IST तक के समाचार
अमिताभ बच्चन

कौन बनेगा करोड़पति सात सितंबर से शुरू हो रहा है.

आज के जमाने में भले ही ज्यादातर माता-पिता चाहते हों कि उनके बच्चे या तो क्रिकेटर बनें या फिर एक्टर लेकिन अमिताभ बच्चन के जमाने में ऐसा नहीं होता था. अब आप कहेंगे कि अमिताभ बच्चन के जमाने से क्या मतलब? उनका जमाना गया कहाँ है?

हम बात कर रहे हैं 1958 की, जिस वक्त अमिताभ अपने कॉलेज जाने की तैयारी में थे. हाल ही में मुंबई में हुई एक प्रेस वार्ता में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमिताभ ने अपने पुराने दिन कुछ इस अंदाज में याद किए.

ग्रेजुएशन की परेशानियाँ

उन्होंने कहा, ''हमारे जमाने में माता-पिता का ये आदेश रहता था कि सबसे पहले ग्रेजुएट होना ज़रूरी है. ग्रेजुएट होना उनकी नजरों में एक जरूरी पैमाना था. हमारे लिए भी ग्रेजुएट बनना एक शिखर समान था.''

अब अमिताभ बच्चन ने ग्रैजुएशन तो कर ली लेकिन ये डिग्री अमिताभ की जिन्दगी में कुछ परेशानियाँ भी अपने साथ ले आई.

क्या थी ये परेशानियाँ, आप जरा अमिताभ बच्चन से ही सुनिए, ''डिग्री तो हमने हासिल कर ली लेकिन उसके बाद हमें पता ही नहीं था कि जीवन में अब क्या करें, कहाँ जाएँ, कौन सी नौकरी करें. कुछ कंपनियों में नौकरी के लिए जब हमने इंटरव्यू दिए तो ऐसे कई सवाल हमसे पूछे गए जिनके जवाब हमें आते ही नहीं थे. और इस वजह से हमें इंटरव्यू से निकाल दिया गया.''

अमिताभ आगे कहते हैं, ''मैं मानता हूँ कि उस वक़्त अगर हमारे पास अधिक ज्ञान होता तो शायद कोई और नौकरी हमें मिल जाती. उस दिन मुझे ज्ञान के महत्व का पता चला.''

'कर्म और ज्ञान से भाग्य का निर्माण'

"जो भी प्रतियोगी केबीसी सेट पर आता है वो मेरे घर आए मेहमान जैसा होता है. मेरे घर आए मेहमान की मेहमान-नवाज़ी मैं जैसे करता हूँ वैसा ही व्यवहार मैं शो के प्रतियोगियों के साथ भी करता हूँ."

अमिताभ बच्चन

वैसे अच्छा ही हुआ कि अमिताभ बच्चन को कोई और नौकरी नहीं मिली वर्ना हिंदी फिल्मों में 'एंग्री यंग मैन' की भूमिका कौन निभाता. अमिताभ ने अगर ज्ञान से मात खाई तो क्या भाग्य ने तो उनका साथ दिया न.

तो क्या अमिताभ मानते हैं कि भाग्य, ज्ञान से ऊपर है? इस सवाल का जवाब देते हुए अमिताभ कहते हैं, ''हमारे जीवन में कई ऐसे प्रश्न होते हैं जिनका कोई जवाब नहीं होता. दुनिया में न हर इंसान एक जैसा है न ही कोई फूल पत्ती एक समान है. जिस बात का ज्ञान हमें नहीं होता उसे हम या तो परमात्मा पर या तो भाग्य पर डाल देते हैं. लेकिन मैं ऐसा मानता हूँ कि आप अपने कर्म और अपने ज्ञान से अपने भाग्य का निर्माण खुद कर सकते हैं. अगर आप अपने ज्ञान को निरंतर बढ़ाएंगे तो एक दिन आपका कर्म और आपका भाग्य दोनों ही आपके साथ होंगे.''

वैसे ये बार-बार जो अमिताभ बच्चन 'ज्ञान' को सर्वोपरि कह रहे हैं उसके पीछे एक वजह और भी है. वो वजह है कौन बनेगा करोड़पति. इस बार केबीसी की टैग लाइन ही है 'ज्ञान ही आपको आपका हक़ दिलाता है'.

शो पर आने वाले प्रतियोगियों के साथ अमिताभ बच्चन का व्यवहार बहुत ही आत्मीय होता है. इसके पीछे कोई खास वजह?

इस सवाल का जवाब देते हुए अमिताभ कहते हैं, ''जो भी प्रतियोगी मेरे सेट पर आता है वो मेरे घर आए मेहमान जैसा होता है. मेरे घर आए मेहमान की मेहमान-नवाजी मैं जैसे करता हूँ वैसा ही व्यवहार मैं शो के प्रतियोगियों के साथ भी करता हूँ.''

ये शो सात सितंबर से शुरू हो रहा है और इस बार हफ्ते में तीन बार इसका प्रसारण होगा.

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