9/11 पर मीरा नायर का 'दूसरा' नज़रिया

 रविवार, 2 सितंबर, 2012 को 12:33 IST तक के समाचार
मीरा नायर

मीरा नायर की नई फ़िल्म में 9/11 की घटना के बाद पूरब और पश्चिम के बीच की सांस्कृतिक विभिन्नता बहुत साफ़ तौर पर सामने आती है.

इस फ़िल्म को वेनिस फ़िल्म फेस्टिवल में दिखाया गया, जो इसी हफ़्ते शुरू हुआ है.

नायर की फ़िल्म बहुचर्चित उपन्यास 'द रेलक्टेंट फंडामेंटलिस्ट' पर आधारित है.

फ़िल्म एक पाकिस्तानी मूल के ब्रितानी चंगेज़ ख़ान की कहानी है जो वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हुए आतंकवादी हमले के बाद अपनी शख़्सियत को नई रोशनी में देखता है.

चंगेज़ ख़ान का किरदार ब्रितानी आदाकार रिज़ अहमद ने अदा किया है. फ़िल्म में हॉलीवुड के कीफ़र स्दरलैंड और केट हडसन जैसे कलाकारों ने भी काम किया है.

चौवन साल की मीरा नायर दशकों से न्यूयार्क में रहती आई हैं और उन्हें लगता है कि इसी वजह से वो मोहसिन हामिद के उपन्यास का फ़िल्मी रूपांतरण करने के लिए सबसे सही व्यक्ति थीं.

विचार-विमर्श

"मैं इस किताब को एक सौग़ात की तरह देखती हूं. मैं कुछ सालों पहले पहली बार पाकिस्तान गई थी और वो दौरा बड़ा भावनात्मक था.

"लाहौर उन सबसे कहीं अलग था जैसा पाकिस्तान के बारे में सोचा जाता है. हमेशा ऐसा बताया जाता है कि वहां ड्रोन हमले होते हैं और भ्रष्टाचार व्याप्त है. लेकिन वो शहर पूरब के वेनिस की तरह है. वहां हर तरफ़ सुंदरता बिखरी है.

मैं चाहती हूँ कि लोगों को समकालीन पाकिस्तान दिखाऊं और मुझे लगा कि ये किताब उसके लिए बहुत सटीक है. इसमें पाकिस्तान, भारतीय महाद्वीप और पश्चिम के बीच बातचीत है. पिछले दशक में ये मामला और गंभीरता से सामने आया है.

फ़िल्म में एक अमरीकन पत्रकार चंगेज़ ख़ान से साक्षात्कार करने जाता है, जो लाहौर में प्रोफेसर है और ऐसा संदेह है कि वो पश्चिम विरोधी भावनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं.

बातचीत के दौरान पता चलता है कि चंगेज़ ख़ान ने पहले प्रिंस्टन में पढ़ाई की थी और वो वॉल स्ट्रीट पर भी जानी पहचानी शख़्सियत थे. लेकिन जब उन्होंने ट्रेड टावर पर हमला होते हुए देखा तो उनके मन में ये भावना उठी थी कि पूंजीवाद के पश्चिमी गढ़ पर कोई हमला करने वाला तो सामने आया.

गैर-अमरीकी नज़रिया

रिज़ अहमद का कहना है कि पहली बार 9/11 को ग़ैर-अमरीकी नज़िरए से देखा गया है.

नायर का कहना है कि ये एक ऐसे आदमी की कहानी है जिसे अमरीका से लगाव है, जो उसे पसंद करता है, जो वहीं बसा है लेकिन अचानक से सब कुछ बदल जाता है और उसे 'दूसरे' की तरह देखा जाने लगता है.

मीरा नायर कहती हैं कि हमले के बाद उन जैसे परिवारों को जो दशकों से अमरीका में रहे हैं, वहां के बाशिंदे हैं, को दूसरों की तरह देखे जाने का अहसास हुआ था.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.