हिंदी के लिए केबीसी की 'लाइफ़ लाइन'

Image caption आर डी तैलंग पिछले छह सीज़न से केबीसी के लिए लिख रहे हैं

‘नमस्कार, आदाब, सत् श्री अकाल, कौन बनेगा करोड़पति में आपका स्वागत है’- ये पंक्तियां आप केबीसी में अक्सर सुनते हैं और बच्चन साहब की हिंदी की तारीफ करते हैं. लेकिन कभी आपने सोचा है कि ये भारी-भरकम शब्द किसने लिखे हैं?

कौन बनेगा करोड़पति के ‘घड़ियाल बाबू’ जैसे कई और शब्द लिखे हैं आरडी तैलंग ने और पिछले बारह साल से वो ही कौन बनेगा करोड़पति की स्क्रिप्ट लिखते आ रहे हैं.

केबीसी के लिए लिखते वक्त क्या हिंदी का इस्तेमाल भारत की आम जनता के मद्देनज़र किया गया था या अमिताभ बच्चन के मद्दनेज़र. इस पर तैलंग कहते हैं,“आज भी भारत में आम लोग हिंदी में ही बात करते हैं और कौन बनेगा करोड़पति आम जनता का शो है इसलिए इसे हिंदी में ही होना था.”

Image caption अमिताभ के लिखना आर डी तैलंग के लिए बड़ी चुनौती रहा.

इस शो ने टीवी की भाषा में हिन्दी की मौजूदगी दर्ज करवाई और हिन्दी बोलना फैशनेबल बना.

इस बदलाव के बारे में तैलंग कहते हैं, “जब टीवी शुरू हुआ था तो भाषा हिन्दी और इंगलिश का मेल हुआ करती थी और कहीं ना कहीं ये दिमाग में था कि इसे बदला जाए. बच्चन साहब भी उसी अंदाज में बोलते तो वो जमता नहीं. साथ ही बच्चन साहब का बैकग्राउंड भी ऐसा रहा था. अच्छी बात ये रही कि जिस तरह से बच्चन साहब ने आदर, आदाब और अभिनंदन जैसे शब्द इस्तेमाल किए, वो बहुत जमे. जो ब्रदर्स और सिस्टर्स जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे वो भी आदाब और अभिनंदन शब्दों पर आ गए हैं. ये बहुत बड़ा बदलाव है जिसका श्रेय मैं बच्चन साहब को देता हूं.”

आरडी तैलंग ने टीवी के लिए लिखने की शुरुआत ‘मूवर्स और शेकर्स’ प्रोग्राम के साथ की और शेखर सुमन के लिए लिखना शुरू किया.

तो क्या अमिताभ बच्चन के लिए लिखना चुनौतीपूर्ण था? अगर हां तो वो चुनौती क्या थी? तैलंग कहते हैं, “अमिताभ के लिए लिखने की सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि ऐसा नहीं लगना चाहिए कि वो कुछ लिखा हुआ पढ़ रहे हैं और इस बात पर मेरा ध्यान था.”

मगर ऐसा नहीं है कि अमिताभ बच्चन पूरे कार्यक्रम में स्क्रिप्ट से ही पढ़ते हैं. तैलंग ने बताया कि अमिताभ कार्यक्रम की शुरुआत और अंत में ही स्क्रिप्ट का इस्तेमाल करते हैं. एक बार जब खेल शुरु हो जाता है तो फिर अमिताभ अपने मन से बोलते हैं.

कुछ समय के लिए शाहरुख खान भी इस शो से जुडे हुए थे तो शाहरुख खान और अमिताभ के बीच आपने अंतर क्या पाया?

इस सवाल के जवाब में वो कहते हैं, “दोनों का अलग अंदाज़ हैं, अलग स्वभाव है अगर मैं अंतर लेखन के हिसाब से बताऊँ तो अमित जी के पास भाषा का भंडार ज्यादा है क्योंकि वो साहित्यिक परिवार से आते हैं वहीं शाहरुख युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी भाषा युवाओं वाली भाषा है.”

जब शाहरुख ने केबीसी की कमान संभाली थी तो भाषा में भी बदलाव किया गया.

तैलंग कहते हैं, “जो भाषा बच्चन साहब की है वो भाषा शाहरुख खान की नहीं है और जो शाहरुख की है वो इनकी नहीं है. शाहरुख की भाषा आम बोलचाल की भाषा है जबकि बच्चन साहब की भाषा सधी हुई है जिसमें गंभीरता भी है और ह्यूमर भी है. यानी दोनों केबीसी बराबर थे बस उनके अंदाज़ जुदा हैं.”

आरडी तैलंग कहते हैं कि केबीसी के होस्ट के तौर पर अमिताभ उन्हें सबसे ज्यादा पसंद हैं.

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